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Shahjahanpur News: उन्नत साधन अपनाकर पुवायां के किसान आगे, मिर्जापुर-कलान पिछड़े

Sun, 04 Feb 2024 02:27 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 04 Feb 2024 02:27 AM IST
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Farmers of Puwayan are ahead by adopting advanced means, Mirzapur-Kalan are backward.
मिर्जापुर में फसल की रखवाली करता किसान। संवाद
शाहजहांपुर। पुवायां तहसील क्षेत्र में किसान जलवायु और मिट्टी की क्षमता के मुताबिक उन्नत और गैरपरंपरागत खेती कर समृद्ध हो रहे हैं लेकिन पुरानी लीक पर फसल कर रहे मिर्जापुर, कलान, जैतीपुर आदि ब्लॉकों के किसानों के लिए खेती घाटे का सौदा साबित हो रही है। स्वामी शुकदेवानंद महाविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग और पर्यावरण के लिए काम रही पृथ्वी संस्था के संयुक्त अनुसंधान में यह तथ्य सामने आया है।
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एसएस कॉलेज के अर्थशास्त्र विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रामशंकर पांडेय ने बताया कि शाहजहांपुर जिले में उत्पादन में अंतर, मिट्टी की गुणवत्ता, फसलचक्र, कृषकों की आय आदि विषय पर अध्ययन किया गया है। उत्तर की पुवायां तहसील एवं दक्षिण में स्थित जलालाबाद, कलान तहसील की कृषि पद्धति पर शोध से स्पष्ट हुआ कि आजादी के बाद से ही दोनों तहसीलों में कृषि उत्पादन में लगभग तीन से चार गुना वृद्धि हुई है। फिर भी यह अपर्याप्त है क्योंकि सीमांत किसान उतना ही उत्पादन कर पाते हैं जिसमें किसी तरह उनकी गुजरबसर हो जाए।
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परिणामस्वरूप तमाम युवा खेती छोड़ दूसरे शहरों में मजदूरी के लिए जाने को मजबूर होते हैं। पुवायां क्षेत्र में प्रति एकड़ गेहूं की पैदावार 20 से 24 क्विंटल तथा धान की पैदावार 30 से 35 क्विंटल है। मिर्जापुर क्षेत्र में गेहूं की पैदावार 18 से 20 क्विंटल और धान की पैदावार 25 से 30 क्विंटल है।
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इसलिए पिछड़े मिर्जापुर-कलान
-जिले के दक्षिणी भाग में जोत छोटे हैं।
-यहां व्यापारिक खेती जैसी कोई व्यवस्था नहीं है।
-यहां पर किसान ट्रैक्टर, कंबाइन, रोटावेटर व अन्य कृ़षि उपकरणों का इस्तेमाल कम करते हैं।
-परंपरागत फसल धान और गेहूं पर अधिक निर्भरता है। सहफसली खेती कम है।
-वर्षा का उत्तर से दक्षिण की ओर घटना भी है मुख्य वजह।
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बेहतर उपज के लिए ये उपाय अपनाएं
- मृदा की प्रकृति के मुताबिक गाजर, मूली, आलू, टमाटर, तरबूज, ककड़ी उगाएं।
-ज्वार, मक्का और मूंगफली की खेती करें।
-खेती में ऑर्गेनिक कार्बन बढ़ाने के लिए गोबर की खाद का प्रयोग ज्यादा करें।
- सहफसली को बढ़ावा दें ताकि लागत के साथ ही मुनाफा भी निकल सके।
-मिट्टी के पीएच लेवल को संतुलित करने के लिए एलिमेंटल सल्फर तथा अमोनियम नाइट्रेट का उपयोग करें।
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मिट्टी के मुताबिक हो फसल
मिर्जापुर क्षेत्र में मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ का प्रतिशत कम है। नदियों के कारण रेत के तत्व ज्यादा हैं। इससे मिट्टी का पीएच मान 8.9 से 12 तथा नदी तट पर इससे भी अधिक है। आदर्श मान 5.5 से 7.5 के मध्य होना चाहिए। नाइट्रोजन एवं पोटेशियम की मात्रा मिर्जापुर क्षेत्र में 201, 287 किलोग्राम / हेक्टेयर है जबकि कैल्शियम तथा मैग्नीशियम भी बढ़े हुए हैं। ऐसे में जरूरी है कि मिट्टी के मुताबिक ही फसल हो।


- डॉ. रामशंकर पांडेय, असिस्टेंट प्रोफेसर अर्थशास्त्र विभाग, एसएस कॉलेज
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आधुनिक तकनीक अपनाने की जरूरत

किसानों को आधुनिक कृषि यंत्रों का इस्तेमाल करने के साथ ही सहफसली और मृदा की प्रकृति के मुताबिक फसल चक्र अपनाना चाहिए। इसके लिए सरकारी स्तर पर भी प्रयास किए जाने की जरूरत है। किसान जागरूक हों और आधुनिक खेती पद्धति को अपनाएं तो उपज बढ़ाकर समृद्ध हो सकते हैं।
- डॉ.विकास खुराना, निदेशक, पृथ्वी संस्था

मिर्जापुर में फसल की रखवाली करता किसान। संवाद

मिर्जापुर में फसल की रखवाली करता किसान। संवाद

मिर्जापुर में फसल की रखवाली करता किसान। संवाद

मिर्जापुर में फसल की रखवाली करता किसान। संवाद

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