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Shahjahanpur News: धान में कंडुआ रोग से बालियों में लग रही फफूंद, खराब हुआ दाना
सार
देवकली क्षेत्र में धान की फसल में फूल आने के बाद बालियां लाल और काली पड़ रही हैं। कंडुआ रोग के प्रकोप और उचित रसायन न मिलने से किसान परेशान हैं। किसानों ने प्रशासन से सर्वे व उपचार की मांग की है।
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बंडा के ग्राम पटनी में धान की फसल में लगा कांडुआ रोग। संवाद
विस्तार
देवकली। क्षेत्र में बढ़वार ले रही धान की फसल में फूल आने के बाद बालियां रंगत बदलकर लाल और काली हो रही हैं। कई जगह धान में कंडुआ रोग लगने से फसल पीली पड़ने लगी है, लेकिन सटीक कृषि रक्षा रसायन नहीं मिलने से रोग पर नियंत्रण न हो पाने से किसान परेशान हैं।
किसान जगराम सिंह धान में कंडुआ बीमारी से बेहद परेशान हैं। उन्होंने बताया कि चार एकड़ खेत में पीआर-13 प्रजाति की धान पौध लगाई थी। जुलाई में बारिश कम होने पर सिंचाई में काफी लागत आई। बाद में भारी वर्षा शुरू होने पर फसल को डूबने से बचाने के काफी जतन किए, लेकिन अब पौधों में फूल आने के बाद खेत के कुछ हिस्से की बालियां पहले लाल हुईं और बाद में काली पड़ने लगीं।
इन बालियों में दाना भी नहीं पड़ा। शेष बचे धान में कंडुआ रोग लगने से बालियों पर फफूंदी आ रही है और उनका दाना भी खराब हो रहा है। पटनी गांव के किसान सरोज वर्मा ने बताया कि उनके पांच एकड़ खेत में तैयार हो रही धान में कंडुआ रोग लग जाने से बाली में पीली फफूंदी आ रही है और दाना खराब हो रहा है। किसानों ने रोग प्रभावित फसलों का कृषि विशेषज्ञों से सर्वे कराकर उचित उपचार कराने की प्रशासन से मांग की है।
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कंडुआ रोग फसल के बीज पर हमला करता है। इसलिए इसे बीज रहित बीमारी कहा जाता है। इसके नियंत्रण के लिए कॉपर हाइड्रो क्लोराइड 400 ग्राम प्रति एकड़ और टेवयू कोनोजोल 250 से 300 ग्राम प्रति एकड़ उचित मात्रा में पानी में मिलाकर छिड़काव करने से रोग को नियंत्रित किया जा सकता है। यह सभी रसायन कृषि रक्षा इकाई सहित बाजार में उपलब्ध हैं।
-पवन वर्मा, प्रभारी, कृषि रक्षा इकाई, बंडा
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किसान जगराम सिंह धान में कंडुआ बीमारी से बेहद परेशान हैं। उन्होंने बताया कि चार एकड़ खेत में पीआर-13 प्रजाति की धान पौध लगाई थी। जुलाई में बारिश कम होने पर सिंचाई में काफी लागत आई। बाद में भारी वर्षा शुरू होने पर फसल को डूबने से बचाने के काफी जतन किए, लेकिन अब पौधों में फूल आने के बाद खेत के कुछ हिस्से की बालियां पहले लाल हुईं और बाद में काली पड़ने लगीं।
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इन बालियों में दाना भी नहीं पड़ा। शेष बचे धान में कंडुआ रोग लगने से बालियों पर फफूंदी आ रही है और उनका दाना भी खराब हो रहा है। पटनी गांव के किसान सरोज वर्मा ने बताया कि उनके पांच एकड़ खेत में तैयार हो रही धान में कंडुआ रोग लग जाने से बाली में पीली फफूंदी आ रही है और दाना खराब हो रहा है। किसानों ने रोग प्रभावित फसलों का कृषि विशेषज्ञों से सर्वे कराकर उचित उपचार कराने की प्रशासन से मांग की है।
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कंडुआ रोग फसल के बीज पर हमला करता है। इसलिए इसे बीज रहित बीमारी कहा जाता है। इसके नियंत्रण के लिए कॉपर हाइड्रो क्लोराइड 400 ग्राम प्रति एकड़ और टेवयू कोनोजोल 250 से 300 ग्राम प्रति एकड़ उचित मात्रा में पानी में मिलाकर छिड़काव करने से रोग को नियंत्रित किया जा सकता है। यह सभी रसायन कृषि रक्षा इकाई सहित बाजार में उपलब्ध हैं।
-पवन वर्मा, प्रभारी, कृषि रक्षा इकाई, बंडा