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Shahjahanpur News: संत राजिंदर के दर्शन पाकर भावुक हुए श्रद्धालु, भक्ति से सराबोर हुआ वातावरण
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हीरा सिंह नेगी। संवाद
शाहजहांपुर। विश्वविख्यात आध्यात्मिक गुरु और सावन कृपाल रूहानी मिशन के प्रमुख संत राजिंदर सिंह के दर्शन पाकर श्रद्धालु भावुक हो उठे। उन्होंने श्रद्धालुओं को दर्शन देकर उनकी समस्याएं सुनीं और समाधान के उपाय बताए। बुधवार की शाम सात बजे आध्यात्मिक सत्संग होगा।
दो दिवसीय सत्संग के लिए मंगलवार सुबह से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। बरेली मोड़ स्थित 132 बीघा भूमि पर बने पंडाल में महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार समेत कई राज्यों के साथ कई देशों के श्रद्धालु भी पहुंचे।
रेलवे स्टेशन पर आने वाले श्रद्धालुओं को लाने के लिए निशुल्क ऑटो का इंतजाम किया गया। पूरे दिन चली तैयारियों के बीच शाम सात बजे संत राजिंदर सिंह कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे। उनका ढोल बजाकर स्वागत किया गया। चिल्ड्रन सत्संग के बच्चों ने स्वागत गीत प्रस्तुुत किए। संत ने मंच पर आकर ध्यान साधना कराई।
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करीब दस मिनट तक ध्यान के बाद संत राजिंदर ने लोगों को दर्शन दिए। कतारबद्ध होकर बैठे श्रद्धालुओं से संत मिले। अपने सामने गुरु को पाकर श्रद्धालु भावुक हो उठे। इस दौरान अपने दुख-दर्द को साझा करते हुए निवारण भी पाया।
इससे पहले महापौर अर्चना वर्मा ने संत का बुके देकर स्वागत किया। कमेटी के अध्यक्ष गिरीश चंद्र गुप्ता, सचिव डॉ.कैलाश चंद्र रस्तोगी, उपाध्यक्ष हरपाल अग्रवाल, सुशील रस्तोगी, अनिल अग्रवाल, रामकुमार मौर्या, सुभाष चंद्र रस्तोगी ने उनका स्वागत किया।
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हजारों लोग जुटे, खुद ही किया सेवा कार्य
पहले दिन हजारों श्रद्धालु सत्संग स्थल पर पहुंचे। उनके खाने का इंतजाम कार्यक्रम स्थल पर ही किया गया था। यहां पर श्रद्धालुओं ने ही सारा कार्य संभाल रखा था। सेवाभाव के तहत रोटियां तैयार करने से लेकर बर्तनों को साफ करने का जिम्मा खुद ही सत्संगियों ने संभाला।
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वर्ष 1994 में नाम दान लिया था। तबसे संत जी की सेवा में लगा हुआ हूं। मन में शांति रहती है। तनाव तो जैसे दूर ही हो गया हो। संत की शिक्षाओं से मन व जीवन बदल गया है।
-हीरा सिंह नेगी
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पिताजी ने संतजी से नामदान लिया है। तबसे पूरा परिवार जुड़ा हुआ है। घर में सत्संग होता रहता है। बेहद शांति और सुखद अहसास होता है। इनके पूरे देश में जहां-जहां सत्संग हुए, वहां जरूर गए।
-ओमप्रकाश
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हम पहली बार सत्संग में आए हैं। सत्संग का श्रवण करने के बाद नामदान लेने की इच्छा है। संतजी की शरण में आकर लोगों का उद्धार हो जाता है, ऐसा मैंने सुना है। इसलिए खुद आईं हूं।
-चांदनी देवी
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संतजी के प्रवचनों को कई बार टीवी पर देखा। पिताजी ने नाम दान भी ले रखा है। उनसे ही प्रभावित होकर पहली बार यहां आया हूं। नामदान भी लूंगा। यहां आकर सुखद अनुभूति हुई है।
-वीरेंद्र कुमार
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दो दिवसीय सत्संग के लिए मंगलवार सुबह से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। बरेली मोड़ स्थित 132 बीघा भूमि पर बने पंडाल में महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार समेत कई राज्यों के साथ कई देशों के श्रद्धालु भी पहुंचे।
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रेलवे स्टेशन पर आने वाले श्रद्धालुओं को लाने के लिए निशुल्क ऑटो का इंतजाम किया गया। पूरे दिन चली तैयारियों के बीच शाम सात बजे संत राजिंदर सिंह कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे। उनका ढोल बजाकर स्वागत किया गया। चिल्ड्रन सत्संग के बच्चों ने स्वागत गीत प्रस्तुुत किए। संत ने मंच पर आकर ध्यान साधना कराई।
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करीब दस मिनट तक ध्यान के बाद संत राजिंदर ने लोगों को दर्शन दिए। कतारबद्ध होकर बैठे श्रद्धालुओं से संत मिले। अपने सामने गुरु को पाकर श्रद्धालु भावुक हो उठे। इस दौरान अपने दुख-दर्द को साझा करते हुए निवारण भी पाया।
इससे पहले महापौर अर्चना वर्मा ने संत का बुके देकर स्वागत किया। कमेटी के अध्यक्ष गिरीश चंद्र गुप्ता, सचिव डॉ.कैलाश चंद्र रस्तोगी, उपाध्यक्ष हरपाल अग्रवाल, सुशील रस्तोगी, अनिल अग्रवाल, रामकुमार मौर्या, सुभाष चंद्र रस्तोगी ने उनका स्वागत किया।
हजारों लोग जुटे, खुद ही किया सेवा कार्य
पहले दिन हजारों श्रद्धालु सत्संग स्थल पर पहुंचे। उनके खाने का इंतजाम कार्यक्रम स्थल पर ही किया गया था। यहां पर श्रद्धालुओं ने ही सारा कार्य संभाल रखा था। सेवाभाव के तहत रोटियां तैयार करने से लेकर बर्तनों को साफ करने का जिम्मा खुद ही सत्संगियों ने संभाला।
वर्ष 1994 में नाम दान लिया था। तबसे संत जी की सेवा में लगा हुआ हूं। मन में शांति रहती है। तनाव तो जैसे दूर ही हो गया हो। संत की शिक्षाओं से मन व जीवन बदल गया है।
-हीरा सिंह नेगी
पिताजी ने संतजी से नामदान लिया है। तबसे पूरा परिवार जुड़ा हुआ है। घर में सत्संग होता रहता है। बेहद शांति और सुखद अहसास होता है। इनके पूरे देश में जहां-जहां सत्संग हुए, वहां जरूर गए।
-ओमप्रकाश
हम पहली बार सत्संग में आए हैं। सत्संग का श्रवण करने के बाद नामदान लेने की इच्छा है। संतजी की शरण में आकर लोगों का उद्धार हो जाता है, ऐसा मैंने सुना है। इसलिए खुद आईं हूं।
-चांदनी देवी
संतजी के प्रवचनों को कई बार टीवी पर देखा। पिताजी ने नाम दान भी ले रखा है। उनसे ही प्रभावित होकर पहली बार यहां आया हूं। नामदान भी लूंगा। यहां आकर सुखद अनुभूति हुई है।
-वीरेंद्र कुमार

हीरा सिंह नेगी। संवाद

हीरा सिंह नेगी। संवाद

हीरा सिंह नेगी। संवाद

हीरा सिंह नेगी। संवाद

हीरा सिंह नेगी। संवाद