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Shahjahanpur News: श्रीराम-केवट संवाद और सीता हरण प्रसंग सुनकर भावुक हुए श्रद्धालु
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अल्हागंज के बारहपत्थर मंदिर प्रांगण में श्रीराम कथा सुनतीं महिलाएं। संवाद
अल्हागंज। बारहपत्थर देवस्थान मंदिर प्रांगण में आयोजित श्रीराम कथा में रविवार को कथाव्यास पंडित सत्यदेव द्विवेदी ने भगवान श्रीराम के वनगमन के पश्चात उनसे केवट के संवाद और सीता हरण प्रसंग का मार्मिक वर्णन किया। इस दौरान तमाम श्रद्धालु श्रद्धालु भावुक हो उठे।
कथाव्यास ने कहा कि भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और माता सीता गंगा तट पर पहुंचे तो निषादराज उनके दर्शन पाकर भावविभोर हो उठे। प्रभु के चरण पखारने की बात कहकर उन्होंने अपनी भक्ति का परिचय दिया। श्रीराम और केवट के बीच हुए संवाद को सुनकर श्रद्धालुओं के नेत्र सजल हो उठे। इस प्रसंग के माध्यम से कथा व्यास ने बताया कि ईश्वर को पाने के लिए निष्काम और निष्कपट भक्ति करनी चाहिए।
सीता जी के हरण के बाद उनके वियोग में व्याकुल श्रीराम की पीड़ा सुनकर श्रद्धालु फिर द्रवित हो उठे। कथा व्यास ने कहा कि लोभ और आकर्षण में फंसकर मनुष्य अक्सर बड़ी भूलें कर बैठता है। कथा श्रवण के दौरान भगवान के जयकारों से पंडाल गूंजता रहा। संवाद
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कथाव्यास ने कहा कि भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और माता सीता गंगा तट पर पहुंचे तो निषादराज उनके दर्शन पाकर भावविभोर हो उठे। प्रभु के चरण पखारने की बात कहकर उन्होंने अपनी भक्ति का परिचय दिया। श्रीराम और केवट के बीच हुए संवाद को सुनकर श्रद्धालुओं के नेत्र सजल हो उठे। इस प्रसंग के माध्यम से कथा व्यास ने बताया कि ईश्वर को पाने के लिए निष्काम और निष्कपट भक्ति करनी चाहिए।
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सीता जी के हरण के बाद उनके वियोग में व्याकुल श्रीराम की पीड़ा सुनकर श्रद्धालु फिर द्रवित हो उठे। कथा व्यास ने कहा कि लोभ और आकर्षण में फंसकर मनुष्य अक्सर बड़ी भूलें कर बैठता है। कथा श्रवण के दौरान भगवान के जयकारों से पंडाल गूंजता रहा। संवाद
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