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रामगंगा में कूदे आलोक का शव दूसरे दिन मिला
मिर्जापुर।
Updated Sun, 30 Aug 2015 12:03 AM IST
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शुक्रवार को कुनिया शाहनजीरपुर गांव में माता-पिता की डांट से क्षुब्ध होकर रामगंगा नदी में कूदे 22 वर्षीय आलोक सिंह का शव शनिवार को शाम गांव पहरूआ के समीप नदी में गिरे पड़े पीपल के पेड़ में फंसा मिल गया है। गांव के दर्जनों लोगों ने मौके पर पहुंचकर शव की शिनाख्त आलोक के रूप में की है। शनिवार को रक्षाबंधन पर भाई का शव मिलते ही उसकी बहनें पछाड़ें खाकर गिर रहीं हैं।
बता दें कि शुुक्रवार सुबह साढ़े पांच बजे गांव वालों के देखते देखते राकेश सिंह के इकलौते पुत्र आलोक सिंह ने आत्महत्या करने के लिए रामगंगा नदी में छलांग लगा दी थी। शुक्रवार को गोताखोर नदी में आलोक की तलाश में गोते लगाते रहे, लेकिन उसका कोई पता नहीं चला। शनिवार को गोताखोर रामगंगा के कोलाघाट से नदी में उतरे और उसमें कांबिंग करते हुए गांव पहरूआ के समीप आकर बाढ़ में बहे पीपल के पेड़ में फंसा हुआ आलोक का शव मिल गया। शव की शिनाख्त गांव के तमाम लोगों ने आलोक के रूप में की है।
शनिवार को रक्षाबंधन के दिन इकलौते भाई का शव मिलने की खबर मिलते ही बहनें किरन व कोमल पछाड़े खाकर गिर पड़ीं। भाई की मौत के गम में बार बार बेहोश हो रहीं बहने कह रहीं थीं कि उनका तो रक्षाबंधन का त्योहार हमेशा के लिए सूना हो गया है। गांव के लोग और रिश्तेदार दुख की इस घड़ी में परिवार को ढाढस बंधाने और शव के आने के इंतजार में राकेश के दरवाजे पर जमा हैं, जबकि आलोक के बाबा रहीशपाल सिंह, दादी सियादेवी, माता सीतादेवी और पिता राकेश खुद को संभाल नहीं पा रहे हैं। शव देर शाम घर पहुंच जाने की उम्मीद है।
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बता दें कि शुुक्रवार सुबह साढ़े पांच बजे गांव वालों के देखते देखते राकेश सिंह के इकलौते पुत्र आलोक सिंह ने आत्महत्या करने के लिए रामगंगा नदी में छलांग लगा दी थी। शुक्रवार को गोताखोर नदी में आलोक की तलाश में गोते लगाते रहे, लेकिन उसका कोई पता नहीं चला। शनिवार को गोताखोर रामगंगा के कोलाघाट से नदी में उतरे और उसमें कांबिंग करते हुए गांव पहरूआ के समीप आकर बाढ़ में बहे पीपल के पेड़ में फंसा हुआ आलोक का शव मिल गया। शव की शिनाख्त गांव के तमाम लोगों ने आलोक के रूप में की है।
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शनिवार को रक्षाबंधन के दिन इकलौते भाई का शव मिलने की खबर मिलते ही बहनें किरन व कोमल पछाड़े खाकर गिर पड़ीं। भाई की मौत के गम में बार बार बेहोश हो रहीं बहने कह रहीं थीं कि उनका तो रक्षाबंधन का त्योहार हमेशा के लिए सूना हो गया है। गांव के लोग और रिश्तेदार दुख की इस घड़ी में परिवार को ढाढस बंधाने और शव के आने के इंतजार में राकेश के दरवाजे पर जमा हैं, जबकि आलोक के बाबा रहीशपाल सिंह, दादी सियादेवी, माता सीतादेवी और पिता राकेश खुद को संभाल नहीं पा रहे हैं। शव देर शाम घर पहुंच जाने की उम्मीद है।
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