{"_id":"693062a8a39464be00661c66ec0fe7c3","slug":"six-person-killed-in-train-actident-hindi-news-3","type":"story","status":"publish","title_hn":"जिंदगी और मौत के बीच था 25 कदम का फासला ","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
जिंदगी और मौत के बीच था 25 कदम का फासला
शाहजहांपुर
Updated Thu, 22 Jan 2015 12:04 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
खन्नौत नदी के पुल पर ट्रेन की चपेट में आने वाले छह लोगों की जिंदगी और मौत के बीच में 25 कदम का फासला था। अफसोस यह रहा कि इस फासले के आगे मौत जीत गई, जिससे एक डेढ़ साल के मासूम के साथ छह लोग काल के गाल में समा गए। शहर के मोक्षधाम के पास स्थित खन्नौत नदी के पुल के नौ नंबर खंभे के पास से चढ़कर दो महिलाएं, एक किशोरी और तीन बच्चों को लेकर नदी पार करके दूसरी ओर जा रहीं थीं। ये महिलाएं और बच्चे पोल नंबर आठ तक पहुंच चुके थे।
पोल सात के पास ट्रॉली रिफ्यूज (केबिन) जरूर था, जिसका इस्तेमाल रेल आने पर रेलवे कर्मी ट्रॉली वहां उतार लेने में करते हैं। पीछे से आ रही तेज रफ्तार ट्रेन और 25 कदमों की दूरी पर स्थित ट्रॉली रिफ्यूज तक पहुंचने के लिए चंद लम्हे ही थे। इन लम्हों में इन लोगों को वहां तक पहुंचना था, इससे पहले यह लोग ट्रॉली रिफ्यूज तक पहुंचते, ट्रेन छह लोगों को अपनी चपेट में लेते हुए गुजर गई। पोल आठ से लेकर सात के बीच में शव घिसटते हुए गए थे।
काश! अप लाइन के पुल पर होते ये लोग
शाहजहांपुर। हादसा डाउन लाइन के पुल पर हुआ। वहीं अगर हादसे के शिकार ये लोग अप लाइन के पुल पर होते तो उनके बचने के लिए एक ‘रास्ता’ था। अप लाइन के पुल से सटा हुआ ब्रिज साइडिंग पॉथ-वे था। बीचों बीच में भी होने पर दो कदम की दूरी पर इससे कूदकर जाया जा सकता था। यह दुर्भाग्य ही था कि पॉथ-वे होने के बावजूद ये छह लोग सीधे-सीधे पुल की पटरियों पर जा रहे थे। यह साइडिंग पॉथ वे रेलवे कर्मियों के लिए बनाया जाता है, जिसका इस्तेमाल वे मरम्मत कार्य के वक्त करते हैं। लखनऊ से दिल्ली तक हर जगह इस डबल लाइन पर एक तरफ ही ये पॉथ-वे बने हुए हैं। इस पॉथ-वे का निर्माण लखनऊ-बरेली रेलवे लाइन के दोहरीकरण के वक्त 1906 में हुआ था, जबकि डाउन लाइन का पुल 1874 में बना था, तब शायद पॉथ-वे की जरूरत नहीं समझी जाती होगी। वरना यह डाउन लाइन के किनारे ही होता। हालांकि अभी कुछ जगह पुुलों पर पॉथ-वे नहीं है।
विज्ञापन
रेल यातायात 45 मिनट रहा बाधित
दुर्घटना की वजह से डाउन लाइन का रेल यातायात 45 मिनट बाधित रहा। पॉवर केबिन को सूचना मिलने पर सुबह 10:10 बजे से 10:55 बजे के बीच शाहजहांपुर और रोजा के बीच में डाउन लाइन पर कोई ट्रेन नहीं गुजारी गई। रेल पटरी से शव हटाने की सूचना स्टेशन अधीक्षक एके गौतम ने 10:54 बजे मोबाइल फोन से दी। इसके बाद ट्रेनों का संचालन शुरू किया।
इस दौरान डाउन लाइन किसान एक्सप्रेस को प्लेटफार्म एक पर 15 मिनट, रनथ्रू ट्रेन अमृतसर-कानपुर एक्सप्रेस को 10 मिनट तक होम लाइन, डुप्लीकेट और राज्यरानी एक्सप्रेस को बंथरा पर खड़ा किया गया। इसके साथ ही डाउन लाइन की ट्रेन ट्रंबा को 10:30 बजे से11:35 बजे तक प्लेटफार्म दो पर खड़ा किया गया। सभी एक्सप्रेस ट्रेनें गुजारने के बाद ही इसे स्टेशन से पास किया गया।
विज्ञापन
पोल सात के पास ट्रॉली रिफ्यूज (केबिन) जरूर था, जिसका इस्तेमाल रेल आने पर रेलवे कर्मी ट्रॉली वहां उतार लेने में करते हैं। पीछे से आ रही तेज रफ्तार ट्रेन और 25 कदमों की दूरी पर स्थित ट्रॉली रिफ्यूज तक पहुंचने के लिए चंद लम्हे ही थे। इन लम्हों में इन लोगों को वहां तक पहुंचना था, इससे पहले यह लोग ट्रॉली रिफ्यूज तक पहुंचते, ट्रेन छह लोगों को अपनी चपेट में लेते हुए गुजर गई। पोल आठ से लेकर सात के बीच में शव घिसटते हुए गए थे।
विज्ञापन
काश! अप लाइन के पुल पर होते ये लोग
शाहजहांपुर। हादसा डाउन लाइन के पुल पर हुआ। वहीं अगर हादसे के शिकार ये लोग अप लाइन के पुल पर होते तो उनके बचने के लिए एक ‘रास्ता’ था। अप लाइन के पुल से सटा हुआ ब्रिज साइडिंग पॉथ-वे था। बीचों बीच में भी होने पर दो कदम की दूरी पर इससे कूदकर जाया जा सकता था। यह दुर्भाग्य ही था कि पॉथ-वे होने के बावजूद ये छह लोग सीधे-सीधे पुल की पटरियों पर जा रहे थे। यह साइडिंग पॉथ वे रेलवे कर्मियों के लिए बनाया जाता है, जिसका इस्तेमाल वे मरम्मत कार्य के वक्त करते हैं। लखनऊ से दिल्ली तक हर जगह इस डबल लाइन पर एक तरफ ही ये पॉथ-वे बने हुए हैं। इस पॉथ-वे का निर्माण लखनऊ-बरेली रेलवे लाइन के दोहरीकरण के वक्त 1906 में हुआ था, जबकि डाउन लाइन का पुल 1874 में बना था, तब शायद पॉथ-वे की जरूरत नहीं समझी जाती होगी। वरना यह डाउन लाइन के किनारे ही होता। हालांकि अभी कुछ जगह पुुलों पर पॉथ-वे नहीं है।
विज्ञापन
रेल यातायात 45 मिनट रहा बाधित
दुर्घटना की वजह से डाउन लाइन का रेल यातायात 45 मिनट बाधित रहा। पॉवर केबिन को सूचना मिलने पर सुबह 10:10 बजे से 10:55 बजे के बीच शाहजहांपुर और रोजा के बीच में डाउन लाइन पर कोई ट्रेन नहीं गुजारी गई। रेल पटरी से शव हटाने की सूचना स्टेशन अधीक्षक एके गौतम ने 10:54 बजे मोबाइल फोन से दी। इसके बाद ट्रेनों का संचालन शुरू किया।
इस दौरान डाउन लाइन किसान एक्सप्रेस को प्लेटफार्म एक पर 15 मिनट, रनथ्रू ट्रेन अमृतसर-कानपुर एक्सप्रेस को 10 मिनट तक होम लाइन, डुप्लीकेट और राज्यरानी एक्सप्रेस को बंथरा पर खड़ा किया गया। इसके साथ ही डाउन लाइन की ट्रेन ट्रंबा को 10:30 बजे से11:35 बजे तक प्लेटफार्म दो पर खड़ा किया गया। सभी एक्सप्रेस ट्रेनें गुजारने के बाद ही इसे स्टेशन से पास किया गया।