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सिर-आंखों पर ली गई पीएम मोदी सर की क्लास
शाहजहांपुर
Updated Sat, 05 Sep 2015 12:12 AM IST
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नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एकबार फिर क्लास लगी। देश के पहले उपराष्ट्रपति सर्वपल्ली डॉ. राधाकृष्णन के जन्मदिन पर प्रतिवर्ष मनाए जाने वाले शिक्षक दिवस को नई परिभाषा देते हुए पीएम मोदी ने न सिर्फ अपनी बात छात्र-छात्राओं के समक्ष रखी, बल्कि उनके प्रश्नों के उत्तर बड़ी ही सरलता और सहजता से देकर युवाओं का दिल जीत लिया। पीएम मोदी की इस अद्भुत क्लास को जिले की शिक्षण संस्थाओं में भी देखा और सुना गया। बच्चों के सवाल पर जैसे ही मोदी जवाब देते थे, तो छात्र-छात्राएं तालियां बजाकर उन होनहार बच्चों का सम्मान करते थे, जो सवाल पूछ रहे थे।
परिषदीय स्कूलों से लेकर माध्यमिक, हायर एजूकेशन देने वाले कॉलेजों में टीवी सेट, रेडियो मोदी की क्लास के इंतजार में सुबह से तैयार कर लिए गए थे। दस बजते ही टीवी पर कार्यक्रम सेट करके बच्चों को अनुशासन के साथ बैठा दिया गया। पहले सभी ने पीएम के विचारों को शांतिपूर्वक सुना और बाद में होनहार और कम उम्र में देश का नाम रोशन करने वाले बच्चों के सवाल सुनकर वह तालियां बजाना नहीं भूलते थे। पौने बारह बजे तक चले कार्यक्रम का लगभग हर स्कूल-कॉलेज में बड़े चाव से देखा और सुना गया। सभी ने एक स्वर से मोदी के इस कार्यक्रम की सराहना की। इस बीच बिजली ने भी बिलेन का रोल निभाया।
किसको मोदी का कौन सा जवाब भाया
पीएम मोदी की क्लास ऑडियो-वीडियो के माध्यम से अटेंड करने के बाद छात्र-छात्राएं बहुत खुश थे। उन्होंने इस कार्यक्रम की सराहना करते हुए उपयोगी भी बताया। जीजीआईसी की कक्षा 10 की छात्रा मीनाक्षी वर्मा और कक्षा 11 की छात्रा रुखसार को सफाई अभियान और योग की बात बहुत अच्छी लगी। जीआईसी के कक्षा 11 के छात्र रंजीत कुमार और सचिन कुमार को मोदी के जवाब विफलता से निकालें सफलता के रास्ते अर्थात सकारात्मक सोच को अच्छा बताया। इसी तरह डॉ. सुदामा प्रसाद कन्या इंटर कॉलेज की 12वीं की छात्रा आकृति आर्या ने सबको साथ लेकर चलने और पहले स्वयं को बदलने तथा शहला खान ने शिक्षकों का कद डॉक्टरों और इंजीनियरों से ऊंचा बताए जाने का स्वागत किया। मोदी ने एक सवाल का जवाब देते हुए कहा था कि यदि एक डॉक्टर किसी की जान बचाता है तो उसकी ख्याति देशभर में फैल जाती है, लेकिन एक शिक्षक सौ डॉक्टर-इंजीनियर भी तैयार करता है तो उसकी कहीं चर्चा तक नहीं होती। बच्चों को यह जवाब बहुत भाया।
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शिक्षकों ने भी मोदी सर से बहुत कुछ सीखा
पीएम मोदी की पाठशाला देखने के बाद शिक्षक-शिक्षिकाएं भी बहुत प्रभावित हुए। उनका कहना है कि मोदी ने शिक्षक दिवस को नई पहचान देकर राधाकृष्णन को और महान बना दिया है। पीएम ने शिक्षक दिवस को प्रेरणा पर्व बताकर महानता का परिचय दिया है। जीजीआईसी की प्रधानाचार्य वंदना यादव ने बताया कि वैसे मोदी के सभी विचार पे्ररणादाई है, लेकिन वह इस बात से बहुत प्रभावित हुईं, जिसमें उन्होंने ऊंचे ओहदों पर बैठे लोगों से सप्ताह में एक घंटा स्कूल में बच्चों के साथ बिताने और अपने अनुभव बांटने का आग्रह किया। इससे बच्चों का बहुत भला होगा। जीआईसी के प्रधानाचार्य रणवीर सिंह बताते हैं कि उन्हें असफलता में सफलता का मूलमंत्र तलाशनें और नेतृत्व क्षमता के गुर विकसित करने का संदेश अच्छे ढंग से दिया। डॉ. सुदामा प्रसाद कन्या इंटर की वरिष्ठ शिक्षिका साधना अग्रवाल को सकारात्मक सोच विकसित करने और सभी को साथ लेकर चलने वाली बात बहुत अच्छी लगी। केंद्रीय विद्यालय-एक के प्रधानाचार्य विनोद कुमार मिश्र को मोदी के उस बात से बहुत सीख मिली, जिसमें उन्होंने कहा कि था सफलता के लिए कोई पैमाना नहीं होता। जो किसी काम को ठान लेता है उसे हासिल करने की जिद पालना, दृढ़ निश्चय, अनुशासन और कठिन परिश्रम ही सफलता दिला सकता है।
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परिषदीय स्कूलों से लेकर माध्यमिक, हायर एजूकेशन देने वाले कॉलेजों में टीवी सेट, रेडियो मोदी की क्लास के इंतजार में सुबह से तैयार कर लिए गए थे। दस बजते ही टीवी पर कार्यक्रम सेट करके बच्चों को अनुशासन के साथ बैठा दिया गया। पहले सभी ने पीएम के विचारों को शांतिपूर्वक सुना और बाद में होनहार और कम उम्र में देश का नाम रोशन करने वाले बच्चों के सवाल सुनकर वह तालियां बजाना नहीं भूलते थे। पौने बारह बजे तक चले कार्यक्रम का लगभग हर स्कूल-कॉलेज में बड़े चाव से देखा और सुना गया। सभी ने एक स्वर से मोदी के इस कार्यक्रम की सराहना की। इस बीच बिजली ने भी बिलेन का रोल निभाया।
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किसको मोदी का कौन सा जवाब भाया
पीएम मोदी की क्लास ऑडियो-वीडियो के माध्यम से अटेंड करने के बाद छात्र-छात्राएं बहुत खुश थे। उन्होंने इस कार्यक्रम की सराहना करते हुए उपयोगी भी बताया। जीजीआईसी की कक्षा 10 की छात्रा मीनाक्षी वर्मा और कक्षा 11 की छात्रा रुखसार को सफाई अभियान और योग की बात बहुत अच्छी लगी। जीआईसी के कक्षा 11 के छात्र रंजीत कुमार और सचिन कुमार को मोदी के जवाब विफलता से निकालें सफलता के रास्ते अर्थात सकारात्मक सोच को अच्छा बताया। इसी तरह डॉ. सुदामा प्रसाद कन्या इंटर कॉलेज की 12वीं की छात्रा आकृति आर्या ने सबको साथ लेकर चलने और पहले स्वयं को बदलने तथा शहला खान ने शिक्षकों का कद डॉक्टरों और इंजीनियरों से ऊंचा बताए जाने का स्वागत किया। मोदी ने एक सवाल का जवाब देते हुए कहा था कि यदि एक डॉक्टर किसी की जान बचाता है तो उसकी ख्याति देशभर में फैल जाती है, लेकिन एक शिक्षक सौ डॉक्टर-इंजीनियर भी तैयार करता है तो उसकी कहीं चर्चा तक नहीं होती। बच्चों को यह जवाब बहुत भाया।
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शिक्षकों ने भी मोदी सर से बहुत कुछ सीखा
पीएम मोदी की पाठशाला देखने के बाद शिक्षक-शिक्षिकाएं भी बहुत प्रभावित हुए। उनका कहना है कि मोदी ने शिक्षक दिवस को नई पहचान देकर राधाकृष्णन को और महान बना दिया है। पीएम ने शिक्षक दिवस को प्रेरणा पर्व बताकर महानता का परिचय दिया है। जीजीआईसी की प्रधानाचार्य वंदना यादव ने बताया कि वैसे मोदी के सभी विचार पे्ररणादाई है, लेकिन वह इस बात से बहुत प्रभावित हुईं, जिसमें उन्होंने ऊंचे ओहदों पर बैठे लोगों से सप्ताह में एक घंटा स्कूल में बच्चों के साथ बिताने और अपने अनुभव बांटने का आग्रह किया। इससे बच्चों का बहुत भला होगा। जीआईसी के प्रधानाचार्य रणवीर सिंह बताते हैं कि उन्हें असफलता में सफलता का मूलमंत्र तलाशनें और नेतृत्व क्षमता के गुर विकसित करने का संदेश अच्छे ढंग से दिया। डॉ. सुदामा प्रसाद कन्या इंटर की वरिष्ठ शिक्षिका साधना अग्रवाल को सकारात्मक सोच विकसित करने और सभी को साथ लेकर चलने वाली बात बहुत अच्छी लगी। केंद्रीय विद्यालय-एक के प्रधानाचार्य विनोद कुमार मिश्र को मोदी के उस बात से बहुत सीख मिली, जिसमें उन्होंने कहा कि था सफलता के लिए कोई पैमाना नहीं होता। जो किसी काम को ठान लेता है उसे हासिल करने की जिद पालना, दृढ़ निश्चय, अनुशासन और कठिन परिश्रम ही सफलता दिला सकता है।