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फुफेरे भाई सहित पांच आरोपियों को जेल
शाहजहांपुर
Updated Tue, 30 Dec 2014 11:49 PM IST
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मौनी बाबा की चेतावनी के बाद क्राइम ब्रांच ने उनके चेले संदीप मिश्रा की कथित रूप से हुई हत्या के मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया। बरेली में आईजी दफ्तर के बाहर दोबारा धरने की चेतावनी का ही असर है कि पुलिस ने अभी पांचों पर सिर्फ अपहरण का ही चार्ज लगाया है। वहीं जो लाश संदीप की बताई जा रही है, उसका डीएनए टेस्ट कराया जाएगा। यदि लाश संदीप की ही साबित हुई तो पुलिस इन पांचों पर हत्या की धारा लगाएगी।
संदीप मिश्रा मूल रूप से अल्हागंज के गांव रघुनाथपुर का रहने वाला था और घटियाघाट (फर्रुखाबाद) स्थित आश्रम में मौनी बाबा के साथ रहता था। संदीप के भाई प्रदीप के मुताबिक मिर्जापुर के गांव बानगांव का रहने वाला उसका फुफेरा भाई विनय दीक्षित दो अगस्त को धान रोपाई के बहाने संदीप को अपने घर बुला ले गया था। फिर उसे नौकरी दिलाने के बहाने हरिद्वार (उत्तराखंड) ले गया। बस इसी के बाद कुछ पता नहीं चला। भाई प्रदीप के मुताबिक इसके बाद जलालाबाद के गांव जिगनेरा में तालाब के किनारे एक युवक की लाश मिली, जो संदीप की थी। इस मामले में जलालाबाद में हत्या का मुकदमा भी लिखा गया और शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया था। संदीप के परिवार वाले और मौनी बाबा, विनय दीक्षित और उसके चार दोस्तों- मोनू, योगेश, सुधीर और अंकित की गिरफ्तारी की मांग कर रहे थे। इसी मांग को लेकर मौनी बाबा ने 22 दिसंबर को आईजी दफ्तर पर धरना दिया था। दो दिन पहले एसपी से मिलने भी आए थे। बस इसी के बाद डीआईजी के निर्देश पर जांच कर रही स्थानीय क्राइम ब्रांच तेजी पकड़ी, मगर साक्ष्यों के अभाव में आधी-अधूरी कार्रवाई करते हुए विनय और उसके चारों साथियों को गिरफ्तार करके मंगलवार को जेल भेज दिया। इन लोगों को धारा 365 लगाई गई है, यानी अपहरण करके गुप्त स्थान पर रखना। यह धारा इसलिए लगाई गई क्योंकि संदीप जिंदा तो बरामद हो नहीं सका है, वहीं अभी हत्या की पुष्टि पुलिस की निगाह में हुई नहीं है।
बरामद हुई लाश के दांत सुरक्षित रखवा लिए गए थे। अब इनका संदीप की मां के शरीर के किसी हिस्से से डीएनए टेस्ट कराया जाएगा, तभी हत्या की पुष्टि होगी। कथित हत्या के पीछे कुछ घरेलू मामला ही बताया जा रहा है, डीएनए रिपोर्ट आने के बाद ही इसकी गहराई में जाया जाएगा।
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- राजेश सिंह, विवेचना अधिकारी, क्राइम ब्रांच
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संदीप मिश्रा मूल रूप से अल्हागंज के गांव रघुनाथपुर का रहने वाला था और घटियाघाट (फर्रुखाबाद) स्थित आश्रम में मौनी बाबा के साथ रहता था। संदीप के भाई प्रदीप के मुताबिक मिर्जापुर के गांव बानगांव का रहने वाला उसका फुफेरा भाई विनय दीक्षित दो अगस्त को धान रोपाई के बहाने संदीप को अपने घर बुला ले गया था। फिर उसे नौकरी दिलाने के बहाने हरिद्वार (उत्तराखंड) ले गया। बस इसी के बाद कुछ पता नहीं चला। भाई प्रदीप के मुताबिक इसके बाद जलालाबाद के गांव जिगनेरा में तालाब के किनारे एक युवक की लाश मिली, जो संदीप की थी। इस मामले में जलालाबाद में हत्या का मुकदमा भी लिखा गया और शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया था। संदीप के परिवार वाले और मौनी बाबा, विनय दीक्षित और उसके चार दोस्तों- मोनू, योगेश, सुधीर और अंकित की गिरफ्तारी की मांग कर रहे थे। इसी मांग को लेकर मौनी बाबा ने 22 दिसंबर को आईजी दफ्तर पर धरना दिया था। दो दिन पहले एसपी से मिलने भी आए थे। बस इसी के बाद डीआईजी के निर्देश पर जांच कर रही स्थानीय क्राइम ब्रांच तेजी पकड़ी, मगर साक्ष्यों के अभाव में आधी-अधूरी कार्रवाई करते हुए विनय और उसके चारों साथियों को गिरफ्तार करके मंगलवार को जेल भेज दिया। इन लोगों को धारा 365 लगाई गई है, यानी अपहरण करके गुप्त स्थान पर रखना। यह धारा इसलिए लगाई गई क्योंकि संदीप जिंदा तो बरामद हो नहीं सका है, वहीं अभी हत्या की पुष्टि पुलिस की निगाह में हुई नहीं है।
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बरामद हुई लाश के दांत सुरक्षित रखवा लिए गए थे। अब इनका संदीप की मां के शरीर के किसी हिस्से से डीएनए टेस्ट कराया जाएगा, तभी हत्या की पुष्टि होगी। कथित हत्या के पीछे कुछ घरेलू मामला ही बताया जा रहा है, डीएनए रिपोर्ट आने के बाद ही इसकी गहराई में जाया जाएगा।
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- राजेश सिंह, विवेचना अधिकारी, क्राइम ब्रांच