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सब रजिस्ट्रार की हत्या में दो को उम्रकैद

Tue, 15 Dec 2015 11:58 PM IST
शाहजहांपुर।
शाहजहांपुर। Updated Tue, 15 Dec 2015 11:58 PM IST
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Registrar killing all life in two
 बरेली में कचहरी के पास 31 जुलाई 1990 को सरेशाम साढ़े छह बजे सब रजिस्ट्रार रणवीर प्रताप गौतम की हत्या के मामले में शाहजहांपुर के एडीजे अष्टम गोपाल उपाध्याय ने दो अभियुक्तों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही दोनों पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। इस मामले में तीन अन्य अभियुक्त बरेली के तत्कालीन चीफ रजिस्ट्रार फकीर प्रसाद, प्रेमनगर थाना क्षेत्र के छावनी अशरफ खां निवासी कालोनाइजर मो. जफर अली और बहेड़ी के ग्राम मकरोई निवासी कुलविंदर सिंह की सुनवाई के दौरान वर्ष 2011 से 2013 के बीच मौत हो गई थी। खास बात यह कि बरेली में मामले की सुनवाई चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट ने वहीं के सत्र न्यायालय में केस की सुनवाई को सुपुर्द किया था और वहां पांच गवाहों के बयान भी दर्ज हुए थे। मगर इस केस से जुड़े दस्तावेजों के खुदबुर्द किए जाने पर हाईकोर्ट ने गंभीर संज्ञान लेते हुए सुनवाई के लिए मामला शाहजहांपुर कोर्ट में स्थानांतरित कर दिया था।
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वारदात से कुछ दिनों पहले वर्ष 1990 में बरेली में तत्कालीन चीफ रजिस्ट्रार फकीर प्रसाद के खिलाफ विजिलेंस जांच शुरू हुई और उनका निलंबन भी हो गया था। तब रणवीर प्रताप गौतम को सब रजिस्ट्रार रहते हुए चीफ रजिस्ट्रार का चार्ज मिल गया था और उन्होंने विजिलेंस को अपेक्षा के अनुरूप काफी सहयोग किया था। इसी से फकीर प्रसाद और उनके साथी कालोनाइजरों से रंजिश बन गई थी। इस वारदात से पहले आरोपियों ने बाकायदा रणवीर सिंह को घर जाकर धमकी दी थी कि इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। उस धमकी के बाद तत्कालीन सब रजिस्ट्रार एहतियातन साथ में अपने साले अजय कुमार पाठक को भी रखने लगे थे, जो कि उस समय प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था। घटना वाली शाम दोनों साले - बहनोई स्कूटर से अपने आवास जा रहे थे। तभी निलंबित चीफ रजिस्ट्रार के साथ कालोनाइजर मो. जफर अली, कुलविंदर सिंह, बरेली के भमौरा निवासी राजपाल और शाहजहांपुर के निगोही निवासी वीरेंद्र गुप्ता उर्फ वीरे ने दोनों को कचहरी के पास ऑफिसर हास्टल के सामने रोक लिया। रणवीर कुछ समझ पाते कि फकीर चंद और जफर के कहने पर बाकी तीन आरोपियों ने सब रजिस्ट्रार पर चाकू से 17 बार किए, जिससे वह बुरी तरह घायल होकर जमीन पर गिर पड़े। तभी पांचों आरोपी भाग निकले और अजय ने अपने जीजा को तत्काल मिशन अस्पताल पहुंचाया। जहां इलाज शुरू होने से पहले ही उनकी मौत हो गई।
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बरेली कोतवाली में इस हत्याकांड की रिपोर्ट दर्ज हुई थी। इस हाईप्रोफाइल केस की जांच सीआईएस लखनऊ और सीबीसीआईडी ने भी की थी। तफ्तीश पूरी होने पर पांचों आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में दाखिल हुई। शाहजहांपुर में हुई इस केस की सुनवाई के दौरान सरकरी वकील बंसीलाल और वादी के वकील योगेश नाथ पाठक ने बरेली के रिटायर्ड एडीएम (वित्त एवं राजस्व) वंशीधर और रिटायर्ड डीएसपी शिवप्रकाश मिश्रा समेत कुल 19 गवाहों के बयान करवाए। शाहजहांपुर के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अष्टम गोपाल उपाध्याय ने इस मामले की सुनवाई पूरी करते हुए अपने फैसले में लिखा है कि यह हत्या व्यावसायिक प्रतिद्वंदता - हितबद्धता और अपराधियों के नौकरशाही से गठजोड़ का परिणाम है, जिसके चलते एक सरकारी कर्मचारी की अभियुक्तों ने नृशंस हत्या की।
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