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कोतवाल समेत पांच निलंबित

Sat, 13 Jun 2015 09:06 PM IST
शाहजहांपुर।
शाहजहांपुर। Updated Sat, 13 Jun 2015 09:06 PM IST
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 Provost including five suspended
पत्रकार जगेंद्र सिंह की मौत के पांचवें दिन एसपी के आदेश पर कोतवाली के तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक श्रीप्रकाश राय, एसआई क्रांतिवीर समेत उन सभी पांच पुलिस कर्मियों को निलंबित कर दिया गया है, जो जगेंद्र के घर दबिश देने गए थे। उधर, आईजी (नागरिक सुरक्षा) अमिताभ ठाकुर ने एसपी और डीएम के घटनास्थल का निरीक्षण नहीं करने को बहुत बड़ी खामी बताया है। उनका कहना है कि नियमानुसार तो डीआईजी को भी घटना स्थल का निरीक्षण करना चाहिए था।
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जगेंद्र के आवास विकास कॉलोनी स्थित उनके आवास पर एक जून को कोतवाली पुलिस ने जानलेवा हमला और अपहरण की कोशिश के मामले में उनकी गिरफ्तारी के लिए दबिश दी थी। दबिश के दौरान जगेंद्र बुरी तरह झुलस गए थे। जगेंद्र ने कोतवाली के तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक श्रीप्रकाश राय समेत कुछ पुलिस कर्मियों पर पेट्रोल छिड़कर जिंदा जलाने का आरोप लगाया था। जगेंद्र ने मृत्यु पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट को भी यही बयान दिया था, जबकि श्रीप्रकाश राय ने कहना था कि जगेंद्र ने गिरफ्तारी से बचने के लिए खुद आग लगा ली थी। आठ जून को इलाज के दौरान जगेंद्र की लखनऊ के सिविल अस्पताल में मौत हो गई थी। नौ जून को जगेंद्र की हत्या के मामले में उनके बेटे राहुल की ओर से प्रदेश के पिछड़ा वर्ग कल्याण राज्यमंत्री राममूर्ति सिंह वर्मा, कोतवाली के तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक श्रीप्रकाश राय, अमित प्रताप भदौरिया, गुफरान, आकाश गुप्ता और ब्रह्म कुमार दीक्षित के अलावा तीन-चार पुलिस कर्मियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई थी।
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 मुकदमा दर्ज होने के बाद से जगेंद्र के परिवार और पत्रकार संगठनों की तरफ से लगातार आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जा रही है। शनिवार को एसपी बबलू कुमार ने जगेंद्र के घर दबिश देने गए कोतवाल श्रीप्रकाश राय, एसआई क्रांतिवीर, एचसीपी सुभाष यादव, कांस्टेबल मंसूर खां और उदयवीर को निलंबित कर दिया। यहां बता दें कि श्रीप्रकाश राय का घटना के बाद ही झांसी तबादला कर दिया गया था। उनके निलंबन का आदेश नए तैनाती स्थल पर भी भेज दिया गया है।
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डीएम, एसपी द्वारा निरीक्षण न करना गंभीर लापरवाही
शाहजहांपुर। पत्रकार जगेंद्र के खुटार स्थित आवास पर जाकर परिवार के लोगों से घटना की जानकारी लेने और उनके शाहजहांपुर की पुरानी आवास विकास कॉलोनी स्थित घर का निरीक्षण करने के बाद आईजी (नागरिक सुरक्षा) अभिताभ ठाकुर ने पूरे मामले में पुलिस-प्रशासन की गंभीर लापरवाही मानी। कहा, घटना के बाद कानूनन डीआईजी को घटनास्थल का निरीक्षण करना चाहिए था। डीएम और एसपी द्वारा भी घटनास्थल का निरीक्षण नहीं करना तो बहुत बड़ी लापरवाही है। बोले, घटनास्थल का निरीक्षण और आसपास के लोगों से बातचीत के बाद कुछ बातें सामने आई हैं। एक तो यह कि जगेंद्र के मकान में पुलिस के कूदने के बाद आग लगी। दूसरा यह कि जगेंद्र कोई इतने बड़े अपराधी नहीं थे कि उन्हें गिरफ्तार करने के लिए दबिश में बड़ी संख्या में पुलिस आई। तीसरा आसपास के लोगों से बातचीत में पता चला है कि जगेंद्र का चरित्र बहुत अच्छा था। उनके खिलाफ लिखा गया मुकदमा फर्जी है। जगेंद्र किसी के अपहरण की कोशिश नहीं कर सकते थे। मोहल्ले के लोग डरे हुए हैं, जो खुलकर बोलना नहीं चाहते हैं। लोगों के मन में दहशत है। पुलिस को लोगों के मन से दशहत निकालकर उनसे बात करनी होगी। तभी चश्मदीद खुद ब खुद सामने आ जाएंगे।

मामले की सीबीआई जांच कराई जाए: नूतन ठाकुर
आईजी अमिताभ ठाकुर की पत्नी नूतन ठाकुर ने कहा कि जगेंद्र के घर दबिश देने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस लाने का कोई मतलब नहीं था। मोहल्ले के लोग दहशत में हैं, लोग बोलने को तैयार नहीं हैं। घटना की सीबीआई जांच कराई जानी चाहिए। लोग पुलिस के उत्पीड़न के डर से बोलने को तैयार नहीं हैं।


पुलिस ने फिर बदला ताला
शाहजहांपुर। पुलिस ने फॉरेंसिक टीम की जांच के बाद जगेंद्र के आवास विकास कॉलोनी स्थित घर में नया ताला जड़ दिया था। अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद शनिवार को जब आईजी अमिताभ ठाकुर ने पुलिस से ताला बदलने के बाबत सवाल किए तो उन्हें बताया गया कि ताला जगेंद्र का ही है। इसकी चाबी भी पड़ोस में रहती है। ठाकुर ने जब चाबी लाने को कहा तो वहां मौजूद पुलिस कर्मी बगलें झांकने लगे। कुछ देर बाद घर में पुराना ताला डाल दिया गया।
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