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पूजा-पाठ छोड़ भूख हड़ताल पर बैठे महंत विश्वनाथ
शाहजहांपुर
Updated Fri, 30 Jan 2015 12:00 AM IST
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पुवायां तहसील के गांव देवकली स्थित देवी मंदिर की तीन एकड़ जमीन पर कब्जा करके टीले से मिट्टी खनन कराने में लिप्त लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होने पर वहां के पुजारी महंत विश्वनाथ गिरि ने पूजा-पाठ छोड़कर सत्याग्रह की राह पकड़ ली। उन्होंने बृहस्पतिवार को कड़ाके की सर्दी के बावजूद कलक्ट्रेट में धरना स्थल पर डेरा जमा लिया। साथ ही जमीन कब्जाने वालों पर कार्रवाई होने तक भूख हड़ताल पर डटे रहने की घोषणा की।
मूलत: देवकली गांव के रहने वाले महंत विश्वनाथ ने करीब तीन दशक पहले युवावस्था में ही सन्यास लेकर गांव के बाहर स्थित मंदिर परिसर में रहकर वहां देव प्रतिमाओं की देखभाल करनी शुरू कर दी। उन्होंने बताया कि टीले पर स्थित प्राचीन मंदिर में आदि शक्ति माता दुर्गा, बालाजी, शिव-पार्वती आदि देव विग्रह काफी बड़े परिसर में स्थापित हैं। मंदिर के नाम लगभग तीन एकड़ जमीन भी है।
महंत के अनुसार पिछले साल इस जमीन पर गांव के ही रहने वाले एक दबंग परिवार के लोगों ने जमीन पर कब्जा कर लिया। इसकी कई बार तहसील दिवस में अफसरों से शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई होने के बजाय आश्वासन देकर टरका दिया गया। इससे जमीन कब्जाने वालों का हौसला इतना बढ़ गया कि उन्होंने टीले से मिट्टी खनन कराना शुरू कर दिया। जमीन पर अवैध कब्जे से हर साल आषाढ़ मास में लगने वाले जात मेला के लिए जगह नहीं बची। अब टीला ढहाकर मंदिर का अस्तित्व खतरे में डाला जा रहा है। उन्होंने इस बावत डीएम के नाम सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन देकर मंदिर की जमीन अवैध कब्जे से छुड़ाए जाने की मांग दोहराई है।
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मूलत: देवकली गांव के रहने वाले महंत विश्वनाथ ने करीब तीन दशक पहले युवावस्था में ही सन्यास लेकर गांव के बाहर स्थित मंदिर परिसर में रहकर वहां देव प्रतिमाओं की देखभाल करनी शुरू कर दी। उन्होंने बताया कि टीले पर स्थित प्राचीन मंदिर में आदि शक्ति माता दुर्गा, बालाजी, शिव-पार्वती आदि देव विग्रह काफी बड़े परिसर में स्थापित हैं। मंदिर के नाम लगभग तीन एकड़ जमीन भी है।
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महंत के अनुसार पिछले साल इस जमीन पर गांव के ही रहने वाले एक दबंग परिवार के लोगों ने जमीन पर कब्जा कर लिया। इसकी कई बार तहसील दिवस में अफसरों से शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई होने के बजाय आश्वासन देकर टरका दिया गया। इससे जमीन कब्जाने वालों का हौसला इतना बढ़ गया कि उन्होंने टीले से मिट्टी खनन कराना शुरू कर दिया। जमीन पर अवैध कब्जे से हर साल आषाढ़ मास में लगने वाले जात मेला के लिए जगह नहीं बची। अब टीला ढहाकर मंदिर का अस्तित्व खतरे में डाला जा रहा है। उन्होंने इस बावत डीएम के नाम सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन देकर मंदिर की जमीन अवैध कब्जे से छुड़ाए जाने की मांग दोहराई है।
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