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घर जाने की जिद में छात्रा छत से कूदी, घायल
निगोही।
Updated Tue, 07 Jul 2015 11:35 PM IST
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घर जाने की जिद में कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय की शौच को उठी छात्रा छत से कूद गई। घायल छात्रा का उपचार निजी चिकित्सक से कराया गया। छात्रा की हालत गंभीर है।
कस्बा निवासी राकेश की 13 वर्षीय पुत्री सुमन का अप्रैल में कक्षा छह में यहां के कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में दाखिला कराया गया। छात्रा को स्कूल में ही रहना-पढ़ना है, लेकिन सुमन रात में स्कूल में रहना नहीं चाहती थी। छह जुलाई को सुमन की मां स्कूल आईं और उससे कहा मन से पढ़ना, रोना नहीं। मैं और तुम्हारे पापा दिल्ली जा रहे हैं। सुमन बोली, मैं भी दिल्ली चलूंगी। समझाबुझा कर सुमन की मां घर चली गईं। मंगलवार को सुबह पांच बजे सुमन चुपचाप उठी और पूर्व की दिशा में छत से कूद गई, जिससे वह घायल हो गई। सुमन के रोने की आवाज सुनकर शिक्षक ज्योति उठीं। घायल सुमन को उसके पिता राकेश घर ले गए और निजी चिकित्सक से उपचार कराया।
बच्चों की सुरक्षा, देखभाल नहीं
कस्तूरबा गांधी आवासीय स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा, उनकी देखभाल की जिम्मेदारी वार्डन और शिक्षकों की होती है। रात में बच्चों के प्रत्येक कमरे में एक शिक्षक इसलिए रहती है कि वह बच्चे के साथ शौच को जाएं, लेकिन यहां ऐसा नहीं हुआ। सुमन स्कूल में रहकर पढ़ना ही नहीं चाहती थी। यदि सुमन की मां दिल्ली जाने की बात न करतीं, तो सुमन यह कदम नहीं उठाती।
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- पूनम गुप्ता, वार्डन
मैं और बच्चे कमरे में सो रहे थे। चुपचाप सुमन उठी और छत से कूद गई।
- ज्योति यादव, शिक्षिका
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कस्बा निवासी राकेश की 13 वर्षीय पुत्री सुमन का अप्रैल में कक्षा छह में यहां के कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में दाखिला कराया गया। छात्रा को स्कूल में ही रहना-पढ़ना है, लेकिन सुमन रात में स्कूल में रहना नहीं चाहती थी। छह जुलाई को सुमन की मां स्कूल आईं और उससे कहा मन से पढ़ना, रोना नहीं। मैं और तुम्हारे पापा दिल्ली जा रहे हैं। सुमन बोली, मैं भी दिल्ली चलूंगी। समझाबुझा कर सुमन की मां घर चली गईं। मंगलवार को सुबह पांच बजे सुमन चुपचाप उठी और पूर्व की दिशा में छत से कूद गई, जिससे वह घायल हो गई। सुमन के रोने की आवाज सुनकर शिक्षक ज्योति उठीं। घायल सुमन को उसके पिता राकेश घर ले गए और निजी चिकित्सक से उपचार कराया।
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बच्चों की सुरक्षा, देखभाल नहीं
कस्तूरबा गांधी आवासीय स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा, उनकी देखभाल की जिम्मेदारी वार्डन और शिक्षकों की होती है। रात में बच्चों के प्रत्येक कमरे में एक शिक्षक इसलिए रहती है कि वह बच्चे के साथ शौच को जाएं, लेकिन यहां ऐसा नहीं हुआ। सुमन स्कूल में रहकर पढ़ना ही नहीं चाहती थी। यदि सुमन की मां दिल्ली जाने की बात न करतीं, तो सुमन यह कदम नहीं उठाती।
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- पूनम गुप्ता, वार्डन
मैं और बच्चे कमरे में सो रहे थे। चुपचाप सुमन उठी और छत से कूद गई।
- ज्योति यादव, शिक्षिका