फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Shahjahanpur News ›   Caught without stealing 15 Is to marry

बिना पकड़े गए 15 चोरियां करने पर होती है शादी

Fri, 04 Dec 2015 10:36 PM IST
जनार्दन सिंह
जनार्दन सिंह Updated Fri, 04 Dec 2015 10:36 PM IST
विज्ञापन
Caught without stealing 15 Is to marry
बीते करीब आठ साल से लंबी दूरी की ट्रेनों में चोरियां करने वाले बरेली के फरीदपुर के गिरोहों के सदस्य परिवारों ने कुछ रोचक रिवाज भी हैं। मसलन 12 से 15 लगातार सफल चोरियां करने और पुलिस की पकड़ में न आने वाले युवक को ही ये दामाद बनाते हैं या उसकी शादी कराते हैं। परिवार के सभी सदस्य इनके आपराधिक कृत्य से अवगत रहते हैं, लेकिन वे इसे ही जीवनयापन का सुरक्षित जरिया मानते हैं। इनके यहां की महिला सदस्य पुलिस का छापा पड़ने पर जमकर शोर मचाती है और अपने साथ दुराचार करने का आरोप लगाते हुए लोगों को जुटा लेती है, ताकि दबिश देने वाले पुलिस अधिकारी या कर्मी चुपचाप लौट जाएं या फिर पकड़े गए पुरुष सदस्य को छोड़ दें।
विज्ञापन

जीआरपी की पकड़ में आए सरगना रवींद्र और उसके साथियों ने पूछताछ में ऐसी कई दिलचस्प जानकारियां दी हैं। बताया कि कमाने के लिए टूर पर निकलने पर एक बार में 10 से 15 वारदात करते हैं और नए सदस्यों को दो से तीन वारदातों के बाद कुछ समय के लिए अलग कर देते हैं ताकि वह घबराए नहीं और उसका आत्मविश्वास इस काम में बढ़ जाए। जब युवक ठीकठाक काम करने लगता है और आय सुधरती है तभी उसका घर बसाना तय किया जाता है।
विज्ञापन

उक्त रिवाज की कसौटी पर खरा उतरने पर सरगना रवींद्र की करीब 13 साल पहले शादी हुई। उसके पांच बच्चे हैं और सभी अंग्रेजी माध्यम वाले स्कूल में पढ़ते हैं। उसने दो कोठियां पहले ही बनवा ली थीं और तीसरी बनवा रहा है, जिसके लिए उसने हाल में दो लाख रुपये की ईंटें भी खरीदी हैं। एसओ जीआरपी जयशंकर सिंह ने बताया कि इस सरगना के पास पहले मामूली खेतीबाड़ी थी और अब उसने फरीदपुर में 18 बीघा खेत खरीदा है। इसकी ही तरह अन्य सदस्यों के भी कम से कम आठ से 10 बीघे के खेत इसी कमाई से खरीदे गए हैं और कोठियां भी बनी हैं। शिशुपाल का दामाद कोई रोजगार नहीं करता, लेकिन इसी की कमाई से उसके पास तीन कोठियां हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन



फरीदपुर में चोरों के गिरोहों का जनक है रवींद्र
शाहजहांपुर। ट्रेनों में यात्रियों का ताले में बंद सामान उन्हीं के आंखों के सामने उड़ाने में माहिर करीब 42 वर्ष का रवींद्र का किस्सा खासा दिलचस्प है। इसने ताला खोलने और बनाने की मिस्त्रीगिरी चोरी के वारदातों को सफलता से अंजाम देने के लिए अलीगढ़ में अपने दिवंगत गुरु मुकेश से सीखी। फिर पारंगत होने पर ट्रेनों में चोरी शुरू की। करीब 20-22 साल पहले इसने हल्के-फुल्के हाथ आजमाए और सफलता हाथ लगने के बाद उसने अपना दायरा बढ़ा दिया। फिर उसने दिवंगत गुरु के करीबी रहे शिशुपाल को साथ लिया, जो बीमारी का बहाना बनाकर यात्रियों की सहानुभूति हासिल कर बैठने का जुगाड़ बनाने में माहिर है। इसके साथ आने पर इसने इस चोरी को एक नए पेशे के रूप में विकसित किया और फरीदपुर में 10 लोगों को ताला खोलने का काम सिखाने के साथ आठ सालों से अन्य चार नए गिरोह भी बनवा दिए। सभी में छह से नौ तक की संख्या में सदस्य हैं। हर गिरोह में एक बूढ़ा-सा दिखने वाले शख्स भी इसी की दिमाग की उपज है। अभी तक जीआरपी को तीन ऐसे बूढ़े चोरों की जानकारी मिली है, जिनमें से एक का नाम कलक्टर है। वे तीनों भी फरीदपुर के ही हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed