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शाखा प्रबंधक की ओर से बैंक डकैती की रिपोर्ट दर्ज
खुटार।
Updated Sun, 08 Feb 2015 12:15 AM IST
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बैंक ऑफ बड़ौदा की हरनहाई शाखा में शुक्रवार को हुई डकैती के मामले में पुलिस ने प्रबंधक निमिष कुमार की ओर से रिपोर्ट दर्ज कर ली है।
प्रबंधक ने दर्ज कराई रिपोर्ट में बताया कि पांच अज्ञात बदमाश बैंक में घुस आए और असलहों के बल पर बैंक के दो लाख 34 हजार नौ सौ रुपये लूट लिए। बदमाश उनके सहित बैंककर्मियों के तीन मोबाइल, सीसीटीवी कैमरे का कंप्यूटर आदि भी उठा ले गए। उधर, पुलिस और क्राइम ब्रांच की टीम ने बीती रात कुछ लोगों को हिरासत में लिया है। उनसेपूछताछ की जा रही है। सीओ उमेश शर्मा शनिवार सुबह ही खुटार थाने पहुंच गए और पुलिस टीमों की प्रगति की समीक्षा कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। एएसपी श्रीकृष्ण श्रीवास्तव भी थाने पहुंचे और अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी ली। सीओ ने बताया कि पुलिस डकैतों की सरगर्मी से तलाश कर रही है। जल्द ही नतीजे सामने होंगे।
घटना के 24 घंटे बीत जाने के बाद भी पुलिस के पास डकैतों के सुराग के नाम पर कोई सफलता हाथ नहीं लगी है। पुलिस पुराने अपराधियों पर निगाह रखकर आगे बढ़ रही है।
गंठा डकैत है मास्टर माइंड
चांदपुर/खुटार। बैंक डकैती की घटना में शामिल सभी बदमाश युवा थे। चार बदमाश हट्टे कट्टे थे, तो एक नाटा था। नाटे के पास पिस्टल थी और वह सभी को निर्देश दे रहा था। उसे बैंक के अंदर की लोकेशन की जानकारी थी। उसके ही निर्देश पर दूसरे बदमाशों ने कैशियर के पास रखी रकम बैग में भरी और तिजोरी से भी रुपए लूट लिए। ग्राहकों को भी वही चुप रहने और आंखें बंद रखने की चेतावनी भी दे रहा था। इससे लगता है कि नाटा बदमाश ही गिरोह का सरगना था और शेष बदमाश उसके इशारे पर काम कर रहे थे।
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चांदपुर में की पुलिस ने पूछताछ
चांदपुर/खुटार। एसओ राजेश सिंह ने गांच चांदपुर के चौराहे पर पहुंचकर दुकानदारों से पूछताछ की। कुछ दुकानदारों ने बताया कि डकैतों की इनोवा कार मैलानी की ओर से आई थी, लेकिन वापस किधर गई इसकी जानकारी उन्हें नहीं। एसओ ने हरनहाई और चांदपुर से पूरनपुर, पीलीभीत आदि जाने वाले रास्तों के बारे में भी जानकारी ली।
क्षेत्र में ही मौजूद हैं लुटेरों के शरणदाता!
बिना किसी स्थानीय सहायता के बदमाशों के बाहर से आकर क्षेत्र में लूट की घटनाओं को अंजाम देना किसी के भी गले नहीं उतर रहा। आशंका है कि क्षेत्र में कहीं न कहीं बदमाशों के शरणदाता मौजूद हैं, जिन्होंने बैंक लूट में अप्रत्यक्ष मदद की है।
पुवायां और पूरनपुर तहसील सिक्ख बाहुल्य क्षेत्र हैं। आतंकवाद के समय में यहां के कुछ लोगों से आतंकियों के संबंध भी उजागर हुए थे। उसके बाद मामला धीरे-धीरे शांत होता चला गया।
पांच जुलाई 2007 को खुटार के गांव मुरादपुर में बॉब की शाखा में लूट हुई थी। लूट कर भाग रहे पंजाब के तीन लुटेरों को पुलिस और पब्लिक ने धर दबोचा था। इसके बाद 18 मई 2011 को पुवायां में एसबीआई शाखा से डकैतों ने 44 लाख की राशि लूट ली थी। उक्त घटनाओं में पंजाब के बदमाशों के शामिल होने का खुलासा हुआ था। उनके स्थानीय कनेक्शन भी जाहिर हुए थे। इसके बाद 17 जनवरी 13 को पुवायां की बड़ौदा ग्रामीण बैंक में हुई डकैती में मुरादाबाद, बुलंदशहर आदि के डकैत पकड़े गए थे। गांव नाहिल का एक युवक बदमाशों का शरणदाता होने के आरोप में जेल भेजा गया था।
हरनहाई बैंक डकैती के प्रत्यक्षदर्शी भी बदमाशों की हुलिया और बोल भाषा के आधार पर शक जाहिर कर रहे हैं कि घटना में शामिल बदमाश पास के नहीं हैं। इस कारण कई सवाल उठ खड़े हुए हैं। दूसरे जिले आदि से आकर बिना किसी क्षेत्रीय मदद के लूट जैसी घटनाओं को अंजाम देना समझ से परे हैं। बदमाशों को रास्तों की जानकारी, रुकने का स्थान और असलहे भी स्थानीय सहायता के बिना उपलब्ध होना नामुमकिन है, क्योंकि गैर जनपद से यहां तक असलहे लाने का काम भारी खतरे का है। क्षेत्र के कुछ नव धनाढ्य लोगों की भूमिका भी काफी संदिग्ध हैं क्योंकि बिना संसाधन लाखों में खेल रहे लोग यह पैसा कहां से लाते हैं यह सोचने वाली बात हैं।
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प्रबंधक ने दर्ज कराई रिपोर्ट में बताया कि पांच अज्ञात बदमाश बैंक में घुस आए और असलहों के बल पर बैंक के दो लाख 34 हजार नौ सौ रुपये लूट लिए। बदमाश उनके सहित बैंककर्मियों के तीन मोबाइल, सीसीटीवी कैमरे का कंप्यूटर आदि भी उठा ले गए। उधर, पुलिस और क्राइम ब्रांच की टीम ने बीती रात कुछ लोगों को हिरासत में लिया है। उनसेपूछताछ की जा रही है। सीओ उमेश शर्मा शनिवार सुबह ही खुटार थाने पहुंच गए और पुलिस टीमों की प्रगति की समीक्षा कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। एएसपी श्रीकृष्ण श्रीवास्तव भी थाने पहुंचे और अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी ली। सीओ ने बताया कि पुलिस डकैतों की सरगर्मी से तलाश कर रही है। जल्द ही नतीजे सामने होंगे।
घटना के 24 घंटे बीत जाने के बाद भी पुलिस के पास डकैतों के सुराग के नाम पर कोई सफलता हाथ नहीं लगी है। पुलिस पुराने अपराधियों पर निगाह रखकर आगे बढ़ रही है।
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गंठा डकैत है मास्टर माइंड
चांदपुर/खुटार। बैंक डकैती की घटना में शामिल सभी बदमाश युवा थे। चार बदमाश हट्टे कट्टे थे, तो एक नाटा था। नाटे के पास पिस्टल थी और वह सभी को निर्देश दे रहा था। उसे बैंक के अंदर की लोकेशन की जानकारी थी। उसके ही निर्देश पर दूसरे बदमाशों ने कैशियर के पास रखी रकम बैग में भरी और तिजोरी से भी रुपए लूट लिए। ग्राहकों को भी वही चुप रहने और आंखें बंद रखने की चेतावनी भी दे रहा था। इससे लगता है कि नाटा बदमाश ही गिरोह का सरगना था और शेष बदमाश उसके इशारे पर काम कर रहे थे।
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चांदपुर में की पुलिस ने पूछताछ
चांदपुर/खुटार। एसओ राजेश सिंह ने गांच चांदपुर के चौराहे पर पहुंचकर दुकानदारों से पूछताछ की। कुछ दुकानदारों ने बताया कि डकैतों की इनोवा कार मैलानी की ओर से आई थी, लेकिन वापस किधर गई इसकी जानकारी उन्हें नहीं। एसओ ने हरनहाई और चांदपुर से पूरनपुर, पीलीभीत आदि जाने वाले रास्तों के बारे में भी जानकारी ली।
क्षेत्र में ही मौजूद हैं लुटेरों के शरणदाता!
बिना किसी स्थानीय सहायता के बदमाशों के बाहर से आकर क्षेत्र में लूट की घटनाओं को अंजाम देना किसी के भी गले नहीं उतर रहा। आशंका है कि क्षेत्र में कहीं न कहीं बदमाशों के शरणदाता मौजूद हैं, जिन्होंने बैंक लूट में अप्रत्यक्ष मदद की है।
पुवायां और पूरनपुर तहसील सिक्ख बाहुल्य क्षेत्र हैं। आतंकवाद के समय में यहां के कुछ लोगों से आतंकियों के संबंध भी उजागर हुए थे। उसके बाद मामला धीरे-धीरे शांत होता चला गया।
पांच जुलाई 2007 को खुटार के गांव मुरादपुर में बॉब की शाखा में लूट हुई थी। लूट कर भाग रहे पंजाब के तीन लुटेरों को पुलिस और पब्लिक ने धर दबोचा था। इसके बाद 18 मई 2011 को पुवायां में एसबीआई शाखा से डकैतों ने 44 लाख की राशि लूट ली थी। उक्त घटनाओं में पंजाब के बदमाशों के शामिल होने का खुलासा हुआ था। उनके स्थानीय कनेक्शन भी जाहिर हुए थे। इसके बाद 17 जनवरी 13 को पुवायां की बड़ौदा ग्रामीण बैंक में हुई डकैती में मुरादाबाद, बुलंदशहर आदि के डकैत पकड़े गए थे। गांव नाहिल का एक युवक बदमाशों का शरणदाता होने के आरोप में जेल भेजा गया था।
हरनहाई बैंक डकैती के प्रत्यक्षदर्शी भी बदमाशों की हुलिया और बोल भाषा के आधार पर शक जाहिर कर रहे हैं कि घटना में शामिल बदमाश पास के नहीं हैं। इस कारण कई सवाल उठ खड़े हुए हैं। दूसरे जिले आदि से आकर बिना किसी क्षेत्रीय मदद के लूट जैसी घटनाओं को अंजाम देना समझ से परे हैं। बदमाशों को रास्तों की जानकारी, रुकने का स्थान और असलहे भी स्थानीय सहायता के बिना उपलब्ध होना नामुमकिन है, क्योंकि गैर जनपद से यहां तक असलहे लाने का काम भारी खतरे का है। क्षेत्र के कुछ नव धनाढ्य लोगों की भूमिका भी काफी संदिग्ध हैं क्योंकि बिना संसाधन लाखों में खेल रहे लोग यह पैसा कहां से लाते हैं यह सोचने वाली बात हैं।