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आखिरी सफर कराने वाली ट्रेन को लेकर असमंजस

Sun, 25 Jan 2015 12:41 AM IST
शाहजहांपुर।
शाहजहांपुर। Updated Sun, 25 Jan 2015 12:41 AM IST
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6 people died in train accident

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 खन्नौत नदी पर हुई छह लोगों की मौत के मामले में शवों की शिनाख्त तो शुक्रवार को हो गई, लेकिन ये दुर्घटना किस ट्रेन से और कब हुई, अभी तक इसको लेकर असमंजस की स्थिति है। लोगाें में इसी बात को लेकर चर्चा हो रही है कि छह लोगों को जिंदगी का आखिरी सफर कराने वाली ट्रेन कौन सी है?
इस संबंध में निर्मल और पूरन ने बताया कि उन दोनों ने अपने परिवार के छह लोगों को मंगलवार की शाम सात बजे के करीब सरहिंद रेलवे स्टेशन पर छोड़ दिया था। स्टेशन पर उन लोगों को पता चला कि शाहजहांपुर तक जाने वाली किसान एक्सप्रेस करीब दो घंटे लेट हैं। उन लोगों को स्टेशन से करीब 20 किलोमीटर दूर आनंदपुर जाना था, जहां पर वे काम करते थे। इस वजह से पत्नी और बच्चों के कहने पर वे लोग उन्हें स्टेशन पर छोड़कर लौट गए। बताया कि उनका परिवार किस ट्रेन में बैठा, इसकी उन लोगों को कोई जानकारी नहीं है।
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यहां यह बता दें कि किसान एक्सप्रेस दुर्घटना होने के बाद शाहजहांपुर रेलवे स्टेशन से रवाना हुई थी। इसलिए उससे दुर्घटना होने का कोई संबंध नहीं है। वहीं इससे पहले रवाना हुई ट्रेन हावड़ा-पंजाब मेल का सरहिंद में स्टॉपेज नहीं है। इस वजह से दुर्घटना किस ट्रेन से हुई इस बारे में कुछ साफ नहीं है।
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पुलिस ने शवों
को गांव भेजा
थाना सदर बाजार पुलिस ने चंपा और फूलमती के साथ पिकअप गाड़ी में शवों और मृतकों के पास मिले सामान को लादकर गांव भेज दिया। शवों के साथ दो सिपाहियों को भी भेजा गया, जिससे कि शिनाख्त करने वाली महिलाओं को कोई परेशानी न हो। गांव से आ रहे अन्य लोगों को पुलिस ने यह कहकर रोक दिया कि वे शवों को घर भेज देंगे।


छह लाशें देखकर गांव में कोहराम
गांव में शव से लदी गाड़ी पहुंचने पर कोहराम मच गया। गांव में सभी लोगों की आंखें नम थीं। गांव के साथ-साथ आसपास के गांवों के लोग भी शवों को देखने के लिए पहुंच गए। गांव के अधिकांश घरों में सन्नाटा पसर गया। निर्मल की बेटियां और बेटे दहाड़े मार-मारकर रो रहे हैं।



‘कालिया तू बोल काहै नाय रहौ’
शवों की शिनाख्त करने के लिए जब चंपा पोस्टमार्टम हाउस में पहुंची तो सबसे पहले उसे पौत्र कालिया का शव दिखाया गया। जैसे ही उसने देखा तो फफक कर रो पड़ी और कहने लगी कालिया तू बोल काहै नाहीं रहौ। चंपा को कालिया से बेहद लगाव था उससे जुड़ी बातें कहते हुए वह रो रही थी।


एक झोपड़ी में रहता
है निर्मल का परिवार
गांव बलरामपुर में बनी एक झोपड़ी में निर्मल का पूरा परिवार रहता था। झोपड़ी की हालत निर्मल की मुफलिसी बयां करने के लिए काफी है। परिवार को दो वक्त की रोटी मिल सके इसलिए वह अपना गांव और घर छोड़कर दूसरे प्रांत में काम करता था। अभी उसे दो बेटियों के हाथ पीले करने हैं। अभी वह सिर्फ बड़ी बेटी भागवती की शादी कर पाया था।


निर्मल और पूरन के आने
पर होगा अंतिम संस्कार
दुर्घटना में मारे गए लोगों के शवों का अंतिम संस्कार निर्मल और पूरन के आने के बाद रविवार को किया जाएगा। वे दोनों सूचना मिलने के बाद वहां से चल दिए हैं। शाम साढ़े सात बजे के करीब मोबाइल पर बताया कि वे सरहिंद रेलवे स्टेशन पर पहुंचने वाले हैं और उसके बाद वहां से पहली ट्रेन से ही चले आएंगे।



‘काश! मालिक ने
छुट्टी दे दी होती’
खन्नौत नदी पुल पर मारे गए छह लोगों में निर्मल की पत्नी और तीन बच्चे ट्रेन दुर्घटना में शामिल थे। कहा कि उसने मालिक से छुट्टी मांगी थी, लेकिन उसे अवकाश नहीं दिया गया। बोला कि ‘काश! मालिक ने छुट्टी दे दी होती’ तो वह साथ में आता और हादसा टल जाता, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।


तीन ट्रेनों के इंजन में
छिपा हादसे का रहस्य
- पहिए में लगा होगा मानव रक्त, जांच से साफ होगी स्थिति
अमर उजाला ब्यूरो
रोजा। खन्नौत नदी पर मारे छह लोगों की मौत का राज तीन ट्रेनों के इंजन में छिपा हुआ है। इसके लिए पुलिस और रेल अफसरों ने कोई ठोस पहल नहीं की।
इस मामले में दो चालकों का मेडिकल परीक्षण भी हुआ, लेकिन वह पर्याप्त नहीं है। पुलिस को घटना होने से पहले गुजरी नौचंदी एक्सप्रेस, पंजाब मेल और जननायक एक्सप्रेस के इंजन के काऊ कैचर का परीक्षण करते तो हादसा करने वाली ट्रेन के बारे में पता चल जाता।
जननायक एक्सप्रेस के चालक आरडी प्रसाद वर्मा ने हादसे की जानकारी रोजा स्टेशन और और कंट्रोल को दी, जबकि पंजाब मेल के चालक महेंद्र राणा ने हादसे से अनभिज्ञता जताई। वहीं नौचंदी एक्सप्रेस के चालक से कोई पूछताछ ही नहीं की गई।



‘रेल इंजनों केआगे लगा काउ कैचर हादसे की वजह बताने के लिये पर्याप्त है। जिससे हादसा हुआ होगा उस ट्रेन के काउ कैचर और पहिये के दाएं-बाएं खून जरूर लगा होगा। इससे घटना का पता लगाया जा सकता है।’
- जेपी सिंह, डिप्टी यार्ड मास्टर, रोजा
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