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आर्थिक तंगी से जूझ रहीं समितियों में भी हो रहे घोटाले!

Fri, 22 Feb 2019 12:10 AM IST
pawan chandra पवन चंद्रा
Updated Fri, 22 Feb 2019 12:10 AM IST
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आर्थिक तंगी से जूझ रहीं समितियों में भी हो रहे घोटाले!
शाहजहांपुर। जिले की ज्यादातर सहकारी समितियां आर्थिक तंगी से जूझ रही हैं। कुछ समितियों की कार्यप्रणाली जांच के घेरे में है। इस बीच आंकिक नरेश गंगवार की खुदकुशी और जेब से मिले सुसाइड नोट को लेकर भी तमाम सवाल उठ रहे हैं। दरअसल, आंकिक ने समिति पर घोटालों का आरोप लगाया है। यह भी लिखा है कि उस पर भी घोटालों के लिए दबाव बनाया जा रहा था। घोटालों में साथ न देने पर नौकरी लेने का डर दिखाया जा रहा था।
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जिले की सहकारी समितियों की स्थिति यह है कि 90 फीसदी कर्मचारियों को समय से वेतन नहीं मिल पाता है। किसान ऋण मॉफी योजना की वजह से कुछ समितियों की आर्थिक स्थिति और भी खराब हो गई है। आंकिक किस कदर परेशान था यह उसका सुसाइड नोट बयां करता है। एसपी के नाम लिखे गए सुसाइड नोट में आंकिक ने सचिव और एक रिटायर्ड आंकिक के खिलाफ हत्या की धाराओं में कार्रवाई की मांग की है। गौर करने वाली बात यह है कि जो समितियां आर्थिक तंगी का शिकार है और घाटे में चल रही हैं वहां भी घोटाले हो रहे हैं। सहकारी समितियों के कर्मचारियों को समय से वेतन न मिलने की बात खुद एआर कोऑपरेटिव पीके शुक्ला भी स्वीकार कर रहे हैं। उनका कहना है कि आंकिक ने जो आरोप लगाए हैं उनकी जांच कमेटी बनाकर की जाएगी। अगर कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराकर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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अधिकारी से त्रस्त हो पहले भी एक कर्मचारी ने कर ली थी खुदकुशी
शाहजहांपुर। सहकारी समिति के आंकिक द्वारा ट्रेन के आगे कूदकर जान देने के बाद एक फिर से व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। इसी तरह से कृषि विभाग में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी रामबहादुर ने भी जिला कृषि उपनिदेशक डॉ. प्रभाकर सिंह की कथित प्रताड़ना से तंग आकर रोजा क्षेत्र में 18 दिसंबर को ट्रेन से कटकर जान दे दी थी। मामले में उपनिदेशक के खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज कराई गई थी, लेकिन पुलिस जांच के नाम पर अभी भी मामले को लटकाए हुए हैं। शुरूआती दौर में पुलिस ने उपनिदेशक की गिरफ्तारी के लिए उनके घर जौनपुर टीम भेजी, लेकिन नतीजा सिफर रहा। मामले की विवेचना कर रहे सीओ सदर बल्देव सिंह खनेड़ा पर मृतका की पत्नी पर मामले में समझौता करने का दबाव बनाने का भी आरोप लगा, लेकिन अब सीओ सदर का स्थानांतरण हो जाने से मामला फिर से खटाई में पड़ गया है।
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