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डीसीएम-टेंपो की भिड़ंत में नानी-नातिन सहित तीन की मौत की खबर में साइड स्टोरी----
Updated Sat, 02 Sep 2017 07:03 PM IST
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शाहजहांपुर/ कांट। गांव रावतपुर निवासी नूरजहां बकरीद पर मुरादाबाद से शौहर के आने का बेसब्री से इंतजार कर रही थी। आठ वर्षीय इसराना को भी अबू का इंतजार था, लेकिन तड़के चार बजे वो तो नहीं आए बल्कि पुलिस के जरिये उनकी मौत की खबर आई। इस खबर से सभी सन्न रह गए।ईद की खुशियां पल भर में काफूर हो गईं। मासूम इसराना छटपटाने लगी। उसकी जुबान पर यही अल्फाज था कि हाय! अब्बू तुम कहां चले गए।
इकरार उर्फ नन्हा मुरादाबाद में फेरी लगाता था। वह कभी गली-गली घूमकर महिलाओं को चूड़ी पहनाता तो कभी कपड़े बेच कर दो वक्त की रोटी के लिए साधन जुटाता था। यही उसका व्यापार था। लगभग डेढ़ माह बाद वह बकरीद के मौके पर घर लौट रहा था। पत्नी नूरजहां को अपने शौहर और उसकी बेटियों को अब्बू के आने का इंतजार था। नूरजहां ने सबसे बड़ी बेटी आठ वर्षीय इसराना, पांच वर्षीय रुखसाना और तीन वर्षीय बेटी हिना को अब्बू के आने पर कपड़े दिलाने का वादा किया था। गोद में तीन माह की जन्नत को भी उसे कपड़े दिलाने थे। शनिवार तड़के लगभग चार बजे जब उसे पति के हादसे की खबर मिली तो वह सदमा ग्रस्त हो गई। जेठ नन्हा के बड़े भाई लाला व परिवार के अन्य लोग जब तक गांववालों के साथ मौके पर पहुंचे तब तक सभी लोग जिला अस्पताल पहुंच चुके थे। लाला ने नूरजहां को उसके पति की मौत की खबर दी तो वह गश खाकर गिर गई। मासूम बच्चे भी मां को बिलखते देख रोने लगे। आठ वर्षीय इसराना बार-बार अब्बू को याद कर रोते हुए कह रही थी कि हाय! अब्बू तुम कहां चले गए। मासूम बच्चियों और नूरजहां के करुण क्रंदन से हर किसी की आंखें नम थीं।
खुशियां मांगने गईं, गम लेकर लौटीं
मांगने गईं थीं दुआ, घर लौटे शव
गांव रहमतपुर निवासी नजीरन अपनी बेटी गुड़िया और गुड़िया के मासूम बच्चों सनाया व अनम और परिवार के कल्लू की पत्नी गुड्डी को भी मंगलवार को देवा शरीफ बाराबंकी में परिवार की खुशियों के लिए दुआ मांगने गईं थीं। गुड्डी का साथ में उनका पौत्र शमशाद भी था। शुक्रवार रात वापस लौटते समय जमौर के पास हादसा हुआ तो टेंपो में सवार नजीरन नातिन सनाया की मौत हो गई। दूसरी नातिन अनम की भी हालत नाजुक है। गुड्डी को उसकी बेटियों के बारे में दोपहर तक कुछ नहीं बताया गया था। हादसे में नजीरन की मौत की खबर उनके पति गुड्डू को चंडीगढ़ फोन पर दी गई। वह चंडीगढ़ में प्राइवेट काम करते हैं।
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इकरार उर्फ नन्हा मुरादाबाद में फेरी लगाता था। वह कभी गली-गली घूमकर महिलाओं को चूड़ी पहनाता तो कभी कपड़े बेच कर दो वक्त की रोटी के लिए साधन जुटाता था। यही उसका व्यापार था। लगभग डेढ़ माह बाद वह बकरीद के मौके पर घर लौट रहा था। पत्नी नूरजहां को अपने शौहर और उसकी बेटियों को अब्बू के आने का इंतजार था। नूरजहां ने सबसे बड़ी बेटी आठ वर्षीय इसराना, पांच वर्षीय रुखसाना और तीन वर्षीय बेटी हिना को अब्बू के आने पर कपड़े दिलाने का वादा किया था। गोद में तीन माह की जन्नत को भी उसे कपड़े दिलाने थे। शनिवार तड़के लगभग चार बजे जब उसे पति के हादसे की खबर मिली तो वह सदमा ग्रस्त हो गई। जेठ नन्हा के बड़े भाई लाला व परिवार के अन्य लोग जब तक गांववालों के साथ मौके पर पहुंचे तब तक सभी लोग जिला अस्पताल पहुंच चुके थे। लाला ने नूरजहां को उसके पति की मौत की खबर दी तो वह गश खाकर गिर गई। मासूम बच्चे भी मां को बिलखते देख रोने लगे। आठ वर्षीय इसराना बार-बार अब्बू को याद कर रोते हुए कह रही थी कि हाय! अब्बू तुम कहां चले गए। मासूम बच्चियों और नूरजहां के करुण क्रंदन से हर किसी की आंखें नम थीं।
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खुशियां मांगने गईं, गम लेकर लौटीं
मांगने गईं थीं दुआ, घर लौटे शव
गांव रहमतपुर निवासी नजीरन अपनी बेटी गुड़िया और गुड़िया के मासूम बच्चों सनाया व अनम और परिवार के कल्लू की पत्नी गुड्डी को भी मंगलवार को देवा शरीफ बाराबंकी में परिवार की खुशियों के लिए दुआ मांगने गईं थीं। गुड्डी का साथ में उनका पौत्र शमशाद भी था। शुक्रवार रात वापस लौटते समय जमौर के पास हादसा हुआ तो टेंपो में सवार नजीरन नातिन सनाया की मौत हो गई। दूसरी नातिन अनम की भी हालत नाजुक है। गुड्डी को उसकी बेटियों के बारे में दोपहर तक कुछ नहीं बताया गया था। हादसे में नजीरन की मौत की खबर उनके पति गुड्डू को चंडीगढ़ फोन पर दी गई। वह चंडीगढ़ में प्राइवेट काम करते हैं।
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