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Shahjahanpur News: दुष्कर्म के आरोपी को कोर्ट ने किया दोषमुक्त
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शाहजहांपुर। बंडा थाना क्षेत्र में वर्ष 2018 में महिला से दुष्कर्म और जान से मारने की धमकी देने के मामले में त्वरित न्यायालय प्रथम प्रियंका सिंह-प्रथम ने आरोपी सुखजिंदर पाल सिंह को दोषमुक्त कर दिया। अदालत ने अभियोजन की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद माना कि आरोप संदेह से परे साबित नहीं हो सके। पीड़िता के बयानों में विरोधाभास मिला।
महिला ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी कि 12 जुलाई 2018 की सुबह करीब सात बजे वह बाथरूम में स्नान करने गई थी। इस दौरान सुखजिंदर पाल सिंह बाथरूम में घुस आया और उसके साथ दुष्कर्म किया। विरोध करने पर जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया था।
महिला ने घटना की जानकारी बाद में परिजनों को दी। इसके बाद 14 जुलाई को बंडा थाने में सुखजिंदर के खिलाफ दुष्कर्म और धमकाने की धारा में रिपोर्ट दर्ज हुई। पुलिस ने विवेचना के बाद आरोपी के खिलाफ आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया।
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सुनवाई के दौरान पीड़िता समेत पांच गवाह पेश किए गए। पीड़िता ने मुख्य परीक्षा में अभियोजन की कहानी का समर्थन किया, लेकिन जिरह के दौरान उसने आरोपी पर दुष्कर्म का आरोप लगाने से इन्कार कर दिया। अदालत में आरोपी पर लगाए गए आरोप साबित नहीं हुए। अदालत ने सुखजिंदर पाल सिंह को आरोपों से दोषमुक्त कर दिया। साथ ही पीड़िता के खिलाफ धारा 344 दंड प्रक्रिया संहिता के तहत संक्षिप्त विचारण के लिए प्रकीर्ण वाद दर्ज करने का आदेश दिया।
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महिला ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी कि 12 जुलाई 2018 की सुबह करीब सात बजे वह बाथरूम में स्नान करने गई थी। इस दौरान सुखजिंदर पाल सिंह बाथरूम में घुस आया और उसके साथ दुष्कर्म किया। विरोध करने पर जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया था।
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महिला ने घटना की जानकारी बाद में परिजनों को दी। इसके बाद 14 जुलाई को बंडा थाने में सुखजिंदर के खिलाफ दुष्कर्म और धमकाने की धारा में रिपोर्ट दर्ज हुई। पुलिस ने विवेचना के बाद आरोपी के खिलाफ आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया।
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सुनवाई के दौरान पीड़िता समेत पांच गवाह पेश किए गए। पीड़िता ने मुख्य परीक्षा में अभियोजन की कहानी का समर्थन किया, लेकिन जिरह के दौरान उसने आरोपी पर दुष्कर्म का आरोप लगाने से इन्कार कर दिया। अदालत में आरोपी पर लगाए गए आरोप साबित नहीं हुए। अदालत ने सुखजिंदर पाल सिंह को आरोपों से दोषमुक्त कर दिया। साथ ही पीड़िता के खिलाफ धारा 344 दंड प्रक्रिया संहिता के तहत संक्षिप्त विचारण के लिए प्रकीर्ण वाद दर्ज करने का आदेश दिया।