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Shahjahanpur News: शर्तें उलझाऊ, मुआवजा मिलना भी आसान नहीं... ऐसे बीमा से क्या फायदा

Sat, 25 Mar 2023 12:55 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर Updated Sat, 25 Mar 2023 12:55 AM IST
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Complicated terms it is not easy to get compensation what is the use of such insurance
गुरुदेव यादव किसान।संवाद
शाहजहांपुर। पहले खरीफ सीजन में सूखा के हालात, फिर बाढ़ और अब रबी की फसलें पकने के दौरान बेमौसम बारिश और तेज हवा से फसलोंं को हुए नुकसान ने किसानों की कमर तोड़ दी है। कई प्राकृतिक आपदाएं झेलने के बावजूद जिले के अधिसंख्य किसान प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से मुंह मोड़े हुए हैं। जिले के 4.50 लाख किसानों में से केवल 10200 ने ही रबी की फसलों का बीमा कराया है।
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अधिकारियों के अनुसार ऋणी किसानों के लिए जब से बीमा कराने की अनिवार्यता हटी है, बैंक शाखा के कर्मचारी भी उनके खातों से प्रीमियम की कटौती करने के झंझट से बचने की कोशिश करते रहते हैं। दूसरी ओर किसानों का कहना है कि प्राकृतिक आपदा से फसल में हुई क्षति का वास्तविक आकलन करने के बजाय बीमा कंपनी क्लेम देने से बचने के लिए नुकसान को बहुत कम आकती हैं। इसके बाद मुआवजा देने में भी आनाकानी करती हैं। कई बार तो चप्पलें घिस जाती हैं पर मुआवजा नहीं मिल पाता, ऐसे बीमा से क्या फायदा।
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सूखा और अतिवृष्टि से नुकसान की नहीं हुई भरपाई
गत वर्ष खरीफ सीजन में अगस्त से नवंबर के बीच पहले सूखा फिर भारी वर्षा और बाढ़ से करीब 2.60 लाख हेक्टेयर में बोई गई धान, मसूर, बाजरा, सरसों आदि की फसलों को व्यापक क्षति हुई थी। सूखा के सर्वे में प्रशासन ने सिर्फ 60 किसानों की 8.39 फीसदी फसलों को क्षति स्वीकार की, लेकिन उन्हें मुआवजा देने लायक नहीं समझा क्योंकि उनकी फसली क्षति 33 प्रतिशत से कम आकी गई। बाद में बाढ़ और बारिश से हुए नुकसान के सर्वे में भी केवल 9.25 प्रतिशत फसलें प्रभावित बताई गईं। इस श्रेणी में 158 किसान मुआवजा के पात्र पाए गए, उन्हें बमुश्किल छह लाख रुपये मुआवजा मिल सका।
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कृषि विभाग गा दावा : 999 किसानों को मिल चुका 84 लाख का बीमा क्लेम
कृषि विभाग के अनुसार गत वर्ष खरीफ फसलों का बीमा कराने वाले 224 किसानों को लगभग 24 लाख रुपये मुआवजा बीमा कंपनी की ओर से दिलाया गया। इससे पहले, पिछले रबी सीजन में 777 किसानों को उनकी बीमित फसलों के नुकसान के एवज में करीब 68 लाख रुपये भुगतान किया जा चुका है।
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बीमित फसलों का मुआवजा पाने में कई पेच
फसलों के नुकसान पर बीमा कंपनी से मुआवजा पाने में किसानों को कई दुश्वारियोंं का सामना करना पड़ता है। बीमा कंपनी यूनिवर्सल जनरल सोंपो इंश्योरेस लिमिटेड ने योजना में शामिल फसलों की मुआवजा दरें अलग-अलग तय की हैं। किसी भी प्राकृतिक आपदा में प्रभावित गेहूं फसल पर प्रति हेक्टेयर 76120 रुपये, आलू पर 1.25 लाख रुपये, मसूर पर 51485 रुपये और सरसों पर 50144 रुपये देने का प्रावधान है, लेकिन मुआवजा पाने की शर्त है कि फसलों को कम से कम 50 प्रतिशत क्षति हुई हो। सर्वे में 33 से 49 प्रतिशत नुकसान होने पर मुआवजा दर आधी रह जाती है जबकि 25 प्रतिशत से कम नुकसान पर कोई मुआवजा देय नहीं है। यही नहीं, यदि फसल गैर बीमित है तो 33 प्रतिशत से कम नुकसान पर भी मुआवजा नहीं दिया जाता।
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किसानों की व्यथा... कैसे होगी नुकसान की भरपाई
तीन एकड़ गेहूं की फसल की है, लेकिन सारी फसल बारिश और तेज हवा से गिर गई। मई में बेटी की शादी है, लेकिन जेब खाली होने से सिर पर चिंता सवार है। बैंक में फसली बीमा के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई। - गुरुदेव यादव, गोगेपुर
दो महीने बाद बेटे की शादी है। पांच एकड़ गेहूं बारिश से खेत में गिर जाने से करीब दो लाख रुपये का नुकसान होने की आशंका है। इससे घर की व्यवस्था गड़बड़ा गई है। बीमा कराने पर भी क्षति की तुलना में मुआवजा नहीं मिल पाता है। - गिरीश पाल शर्मा, खेड़ा बझेड़ा
मई में बेटी की शादी तय है। 15 बीघा सरसों से शादी के खर्चे निकलने की उम्मीद थी। फसल खेत में कटी पड़ी थी, लेकिन बारिश में भीग जाने से बहुत नुकसान हो गया। फसल बीमा का प्रचार करने गांव में कोई नहीं आया। - सोहन लाल, बझेड़ा भगवानपुर
हमारे खेत में बरसात आफत बनकर बरस गई। दो एकड़ गेहूं की फसल की भीगकर खेत में गिर जाने खराब हो गई। मई में बेटे की शादी है, लेकिन उससे पहले नुकसान हो गया। बैंक अधिकारी खाते से कटौती कर लेते हैं, लेकिन मुआवजा पूरा नहीं मिलता। - मुन्ना लाल, गोगेपुर


बीमा योजना में गन्ना शामिल नहीं है, लेकिन तमाम किसान गन्ना पर ऋण लेकर गेहूं आदि अन्य फसलें बोते हैं। इसीलिए सर्वे में गेहूं को नुकसान होने पर भी बीमा कंपनी मुआवजा नहीं देती। तमाम ऐसे किसान भी हैं जो बीमा कराना चाहते हैं, लेकिन बैंक शाखाओं के कर्मचारी उनके खाते से प्रीमियम धनराशि की कटौती कर उसे पोर्टल पर दर्ज करने के अतिरिक्त काम से बचने के लिए विभाग को आख्या भेज देते हैं कि उसे किसान ने प्रीमियम देने से मना कर दिया है। बैंक अधिकारियों के साथ लगातार बैठकें करने पर भी उनसे विभाग और किसानों को अपेक्षित सहयोग नहीं मिल रहा। - धीरेंद्र सिंह, उप कृषि निदेशक

गुरुदेव यादव किसान।संवाद

गुरुदेव यादव किसान।संवाद

गुरुदेव यादव किसान।संवाद

गुरुदेव यादव किसान।संवाद

गुरुदेव यादव किसान।संवाद

गुरुदेव यादव किसान।संवाद

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