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Shahjahanpur News: कूड़े के ढेर में दबे दावे... गड्ढों में दबाई जा रही खाद
Tue, 15 Apr 2025 01:21 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
Updated Tue, 15 Apr 2025 01:21 AM IST
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ककरा स्थित एफआरएफ सेंटर के पास बन गए कूड़े के पहाड़। संवाद
शाहजहांपुर। नगर निगम की ओर से ककरा में बने मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (एमआरएफ) सेंटर में कूड़े का निस्तारण नहीं हो पा रहा है। एमआरएफ सेंटर शुरू होने पर नगर निगम के अधिकारियों ने दावा किया था कि संयंत्र से तैयार होने वाली खाद की बिक्री की जाएगी। इससे नगर निगम की आय बढ़ेगी। खाद तैयार हुई, उसको पहले नगर निगम के कई पार्कों के पौधों में डाला गया। खाद मानक के अनुरूप न होने के कारण पौधे झुलस गए।
कुछ लोगों ने शुरुआत में खाद खरीदी भी, लेकिन पौधे खराब होने के बाद लोगों ने लेना बंद कर दी। अब हालात ये हो गए हैं कि खाद को एमआरएफ सेंटर के आसपास गड्ढों में दबाया जा रहा है। कोई भी खाद खरीदने वाला नहीं है।वहीं, कूड़ा जलाकर ही निस्तारित किया जा रहा है। हालांकि, निगम के अधिकारी कूड़े के ढेर में शरारती तत्वों द्वारा आग लगाने की बात करते हैं।
नगर निगम की ओर से शहर के ककरा क्षेत्र में एमआरएफ सेंटर का निर्माण मार्च 2021 में 63 लाख रुपये की लागत से कराया गया था। इसमें ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए कूड़े को अलग-अलग करके निस्तारित किया जाना था। शहर में रोजाना 140 टन कूड़ा निकलता है। यह कूड़ा ककरा स्थित एमआरएफ सेंटर पहुंचाया जाता है।
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नगर निगम क्षेत्र में कूड़ा कलेक्शन के लिए 60 से अधिक ई-रिक्शा में गीला और सूखा कूड़ा अलग ले जाने की व्यवस्था की गई है। हालांकि यह व्यवस्था फेल हो गई। एमआरएफ सेंटर पर गीला और सूखा कूड़ा एक साथ पहुंचता है। कूड़े से प्लास्टिक और गीला और सूखा कचरा अलग किया जाता है। इसके बाद इसमें केमिकल डाला जाता है।
करीब 45 दिन के बाद कूड़े को मशीन में डाला जाता है। इसके बाद खाद तैयार होती है। वर्तमान में एमआरएफ सेंटर पूरी क्षमता से काम नहीं कर रहा है। केवल कूड़े से प्लास्टिक, लोहा व अन्य कबाड़ का सामान अलग कर बेचा जा रहा है। ककरा क्षेत्र में कूड़े के पहाड़ बन गए हैं।
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जलाया जा रहा कूड़ा
कूड़ा तय प्रक्रिया से निस्तारित करने की जगह जलाया जा रहा है। नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि कई बार रासायनिक प्रक्रिया के कारण खुद आग लग जाती है तो कई बार अराजकतत्व कूड़े में आग लगा देते हैं। वहीं, ककरा में जगह-जगह कूड़े के ढेर सुलगते नजर आते हैं। इससे लगता है कि जानबूझकर कूड़े में आग लगा दी जाती है। आसपास के लोगों का भी कहना है कि कूड़ा से उठता धुआं उनके लिए परेशानी पैदा करता है। धुएं से बीमारी फैलने की आशंका बनी रहती है।
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निस्तारण न होने से कूड़े का बढ़ रहा ढेर
एमआरएफ सेंटर से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक प्लास्टिक और पॉलीथिन के कचरे को भट्ठा समेत अन्य कारखानों में बिक्री करना था, लेकिन एमआरएफ सेंटर बनने के बाद अभी तक किसी ने भी कचरा नहीं खरीदा। इसकी वजह से एमआरफ सेंटर के आसपास डंपिंग ग्राउंड पहाड़ों का रूप लेता जा रहा है। एमआरएफ सेंटर पर सिर्फ कूड़ा एकत्र होने का ही काम हो पा रहा है। एमआरएफ प्लांट अधिकतर समय बंद रहता है।
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दो कंपनियों को दिया गया ठेका
नगर निगम ने हिंद इंजीनियरिंग कंपनी को कूड़ा से शीशा, गत्ता, प्लास्टिक आदि सामान निकालने का ठेका दिया है। निगम ने कंपनी से एक लाख रुपये सिक्योरिटी के रूप में जमा कराया है। यह कंपनी सूखे कूड़े को अपने कर्मचारियों से अलग-अलग कराती है। इसके बाद कबाड़ियों के हाथ बेच देती है। दूसरी मेरठ की एक कंपनी है। यह प्लांट चलाकर खाद का निर्माण करती है। खाद से होने वाली आय को कंपनी को नगर निगम को भी हिस्सा देना होता है, लेकिन प्लांट में सुपर फास्फेट का इस्तेमाल नहीं होता है। इसलिए खाद गुणवत्तापूर्ण नहीं निकल पाती है। अधिकारियों के मुताबिक इसके लिए दूसरे प्लांट की जरूरत है।
ककरा में चल रहा एमआरएफ सेंटर शहर के कूड़े का भार नहीं झेल पा रहा है। ददरौल के खिलौली क्षेत्र में 15 करोड़ की कीमत से नए एमआरएफ सेंटर का निर्माण हो रहा है। इसके बनने के बाद कूड़े के निस्तारण की समस्या का समाधान हो जाएगा।
- डॉ. बिपिन कुमार मिश्र, नगर आयुक्त
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कुछ लोगों ने शुरुआत में खाद खरीदी भी, लेकिन पौधे खराब होने के बाद लोगों ने लेना बंद कर दी। अब हालात ये हो गए हैं कि खाद को एमआरएफ सेंटर के आसपास गड्ढों में दबाया जा रहा है। कोई भी खाद खरीदने वाला नहीं है।वहीं, कूड़ा जलाकर ही निस्तारित किया जा रहा है। हालांकि, निगम के अधिकारी कूड़े के ढेर में शरारती तत्वों द्वारा आग लगाने की बात करते हैं।
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नगर निगम की ओर से शहर के ककरा क्षेत्र में एमआरएफ सेंटर का निर्माण मार्च 2021 में 63 लाख रुपये की लागत से कराया गया था। इसमें ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए कूड़े को अलग-अलग करके निस्तारित किया जाना था। शहर में रोजाना 140 टन कूड़ा निकलता है। यह कूड़ा ककरा स्थित एमआरएफ सेंटर पहुंचाया जाता है।
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नगर निगम क्षेत्र में कूड़ा कलेक्शन के लिए 60 से अधिक ई-रिक्शा में गीला और सूखा कूड़ा अलग ले जाने की व्यवस्था की गई है। हालांकि यह व्यवस्था फेल हो गई। एमआरएफ सेंटर पर गीला और सूखा कूड़ा एक साथ पहुंचता है। कूड़े से प्लास्टिक और गीला और सूखा कचरा अलग किया जाता है। इसके बाद इसमें केमिकल डाला जाता है।
करीब 45 दिन के बाद कूड़े को मशीन में डाला जाता है। इसके बाद खाद तैयार होती है। वर्तमान में एमआरएफ सेंटर पूरी क्षमता से काम नहीं कर रहा है। केवल कूड़े से प्लास्टिक, लोहा व अन्य कबाड़ का सामान अलग कर बेचा जा रहा है। ककरा क्षेत्र में कूड़े के पहाड़ बन गए हैं।
जलाया जा रहा कूड़ा
कूड़ा तय प्रक्रिया से निस्तारित करने की जगह जलाया जा रहा है। नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि कई बार रासायनिक प्रक्रिया के कारण खुद आग लग जाती है तो कई बार अराजकतत्व कूड़े में आग लगा देते हैं। वहीं, ककरा में जगह-जगह कूड़े के ढेर सुलगते नजर आते हैं। इससे लगता है कि जानबूझकर कूड़े में आग लगा दी जाती है। आसपास के लोगों का भी कहना है कि कूड़ा से उठता धुआं उनके लिए परेशानी पैदा करता है। धुएं से बीमारी फैलने की आशंका बनी रहती है।
निस्तारण न होने से कूड़े का बढ़ रहा ढेर
एमआरएफ सेंटर से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक प्लास्टिक और पॉलीथिन के कचरे को भट्ठा समेत अन्य कारखानों में बिक्री करना था, लेकिन एमआरएफ सेंटर बनने के बाद अभी तक किसी ने भी कचरा नहीं खरीदा। इसकी वजह से एमआरफ सेंटर के आसपास डंपिंग ग्राउंड पहाड़ों का रूप लेता जा रहा है। एमआरएफ सेंटर पर सिर्फ कूड़ा एकत्र होने का ही काम हो पा रहा है। एमआरएफ प्लांट अधिकतर समय बंद रहता है।
दो कंपनियों को दिया गया ठेका
नगर निगम ने हिंद इंजीनियरिंग कंपनी को कूड़ा से शीशा, गत्ता, प्लास्टिक आदि सामान निकालने का ठेका दिया है। निगम ने कंपनी से एक लाख रुपये सिक्योरिटी के रूप में जमा कराया है। यह कंपनी सूखे कूड़े को अपने कर्मचारियों से अलग-अलग कराती है। इसके बाद कबाड़ियों के हाथ बेच देती है। दूसरी मेरठ की एक कंपनी है। यह प्लांट चलाकर खाद का निर्माण करती है। खाद से होने वाली आय को कंपनी को नगर निगम को भी हिस्सा देना होता है, लेकिन प्लांट में सुपर फास्फेट का इस्तेमाल नहीं होता है। इसलिए खाद गुणवत्तापूर्ण नहीं निकल पाती है। अधिकारियों के मुताबिक इसके लिए दूसरे प्लांट की जरूरत है।
ककरा में चल रहा एमआरएफ सेंटर शहर के कूड़े का भार नहीं झेल पा रहा है। ददरौल के खिलौली क्षेत्र में 15 करोड़ की कीमत से नए एमआरएफ सेंटर का निर्माण हो रहा है। इसके बनने के बाद कूड़े के निस्तारण की समस्या का समाधान हो जाएगा।
- डॉ. बिपिन कुमार मिश्र, नगर आयुक्त