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Shahjahanpur News: परशुराम मंदिर के ध्वस्त परिसर में जयंती मनाना होगी चुनौती
Sat, 12 Apr 2025 12:43 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
Updated Sat, 12 Apr 2025 12:43 AM IST
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जलालाबाद में नर्मदेश्वर भगवान के मंदिर का टूटा पड़ा चबूतरा। संवाद
- फोटो : संवाद
जलालाबाद। भगवान परशुराम की जन्मस्थली के सुंदरीकरण के लिए करीब छह माह पहले मंदिर का अधिकांश परिसर ध्वस्त किया जा चुका है। इसके बाद से परिसर उसी हाल में पड़ा है। आगामी तीस अप्रैल को अक्षय तृतीया पर भगवान परशुराम का जन्मोत्सव मनाया जाना है।
मंदिर प्रांगण में इस दिन भक्तों की भारी भीड़ जुटेगी। वहां कई तरह के धार्मिक अनुष्ठान कराना आयोजकों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं होगा। करीब एक साल पहले केंद्रीय राज्य मंत्री जितिन प्रसाद के प्रयास से प्रदेश सरकार ने इस कार्य को मुख्यमंत्री संवर्धन योजना में शामिल कर 19 करोड़ की धनराशि स्वीकृत कर पहली किस्त के पांच करोड़ रुपये जारी किए थे।
कार्यदायी संस्था यूपीपीसीएल ने ठेके की प्रक्रिया पूरी करने के बाद मेरठ की एक कंपनी को काम सौंपा था। बीते वर्ष 19 अक्तूबर से काम शुरू कर दिया गया। पहले चरण में वहां दो पुरानी धर्मशाला और दो मंदिरों के काफी विस्तृत क्षेत्र वाले दो चबूतरों को ध्वस्त कर दिया गया। इसी दौरान प्रस्तावित कार्य के मानचित्र को लेकर पेच फंस गया। इसके बाद काम रोक दिया गया। बाद में केंद्रीय राज्यमंत्री जितिन प्रसाद के साथ यहां पहुंचे कार्यदायी संस्था के अधिकारियों ने मार्च में होली के बाद काम शुरू करा देने का आश्वासन दिया था, लेकिन अभी तक कार्य शुरू नहीं हो सका।
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जयंती पर कई तरह के होते हैं अनुष्ठान
भगवान परशुराम की जन्मस्थली की व्यापक मान्यता के कारण अक्षय तृतीया को मंदिर पर वर्षों से विभिन्न धार्मिक आयोजन होते रहे हैं। इन अनुष्ठानों में भगवान का जलाभिषेक, परशुराम नगरी की परिक्रमा, सात दिवसीय कथा, शोभायात्रा व भंडारा आदि मुख्य रूप से शामिल हैं। सात दिवसीय इन आयोजनों के दौरान अंतिम दो दिन नगर के अलावा दूरदराज के गांवों से आने वाले हजारों श्रद्धालुुओं की भीड़ रहती है।
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अधर में लटका रामताल का सुंदरीकरण
-मंदिर प्रांगण में विभिन्न निर्माण कार्यों के साथ प्रदेश सरकार ने करीब एक साल पहले मंदिर के सामने 12 एकड़ से ज्यादा रकबे में फैले रामताल का सुंदरीकरण कराने का निर्णय लिया था। इसके लिए रामताल को अमृत योजना में शामिल कर उसके कायाकल्प के लिए 11 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए। जल निगम के प्रबंध निदेशक सहित अन्य विभागीय अधिकारी कई बार यहां का दौरा कर चुके हैं। तालाब की नापजोख और सर्वे आदि हो चुका है। दो माह पहले रामताल से जलकुंभी निकालने का काम भी चार दिन तक चलता रहा। रामताल में नगर पालिका के जाने वाले पांच नालों का रुख मोड़कर उन्हें अन्य जगह से निकालने को लेकर भी कई बार सर्वे किया गया, लेकिन वहां भी कोई काम शुरू नहीं हुआ।
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मानचित्र में कई बार परिवर्तन किया गया है। नया मानचित्र दिल्ली के एक आर्किटेक्ट से तैयार कराया गया है। इसको पर्यटन विभाग को अनुमोदन के लिए भेजा जा रहा है। निर्माण कार्य अप्रैल में ही शुरू कराने का प्रयास किया जा रहा है।
-बजरंग प्रसाद, परियोजना प्रबंधक, यूपी पीसीएल
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मंदिर प्रांगण में इस दिन भक्तों की भारी भीड़ जुटेगी। वहां कई तरह के धार्मिक अनुष्ठान कराना आयोजकों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं होगा। करीब एक साल पहले केंद्रीय राज्य मंत्री जितिन प्रसाद के प्रयास से प्रदेश सरकार ने इस कार्य को मुख्यमंत्री संवर्धन योजना में शामिल कर 19 करोड़ की धनराशि स्वीकृत कर पहली किस्त के पांच करोड़ रुपये जारी किए थे।
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कार्यदायी संस्था यूपीपीसीएल ने ठेके की प्रक्रिया पूरी करने के बाद मेरठ की एक कंपनी को काम सौंपा था। बीते वर्ष 19 अक्तूबर से काम शुरू कर दिया गया। पहले चरण में वहां दो पुरानी धर्मशाला और दो मंदिरों के काफी विस्तृत क्षेत्र वाले दो चबूतरों को ध्वस्त कर दिया गया। इसी दौरान प्रस्तावित कार्य के मानचित्र को लेकर पेच फंस गया। इसके बाद काम रोक दिया गया। बाद में केंद्रीय राज्यमंत्री जितिन प्रसाद के साथ यहां पहुंचे कार्यदायी संस्था के अधिकारियों ने मार्च में होली के बाद काम शुरू करा देने का आश्वासन दिया था, लेकिन अभी तक कार्य शुरू नहीं हो सका।
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जयंती पर कई तरह के होते हैं अनुष्ठान
भगवान परशुराम की जन्मस्थली की व्यापक मान्यता के कारण अक्षय तृतीया को मंदिर पर वर्षों से विभिन्न धार्मिक आयोजन होते रहे हैं। इन अनुष्ठानों में भगवान का जलाभिषेक, परशुराम नगरी की परिक्रमा, सात दिवसीय कथा, शोभायात्रा व भंडारा आदि मुख्य रूप से शामिल हैं। सात दिवसीय इन आयोजनों के दौरान अंतिम दो दिन नगर के अलावा दूरदराज के गांवों से आने वाले हजारों श्रद्धालुुओं की भीड़ रहती है।
अधर में लटका रामताल का सुंदरीकरण
-मंदिर प्रांगण में विभिन्न निर्माण कार्यों के साथ प्रदेश सरकार ने करीब एक साल पहले मंदिर के सामने 12 एकड़ से ज्यादा रकबे में फैले रामताल का सुंदरीकरण कराने का निर्णय लिया था। इसके लिए रामताल को अमृत योजना में शामिल कर उसके कायाकल्प के लिए 11 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए। जल निगम के प्रबंध निदेशक सहित अन्य विभागीय अधिकारी कई बार यहां का दौरा कर चुके हैं। तालाब की नापजोख और सर्वे आदि हो चुका है। दो माह पहले रामताल से जलकुंभी निकालने का काम भी चार दिन तक चलता रहा। रामताल में नगर पालिका के जाने वाले पांच नालों का रुख मोड़कर उन्हें अन्य जगह से निकालने को लेकर भी कई बार सर्वे किया गया, लेकिन वहां भी कोई काम शुरू नहीं हुआ।
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मानचित्र में कई बार परिवर्तन किया गया है। नया मानचित्र दिल्ली के एक आर्किटेक्ट से तैयार कराया गया है। इसको पर्यटन विभाग को अनुमोदन के लिए भेजा जा रहा है। निर्माण कार्य अप्रैल में ही शुरू कराने का प्रयास किया जा रहा है।
-बजरंग प्रसाद, परियोजना प्रबंधक, यूपी पीसीएल