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Shahjahanpur News: प्रतीक्षारत याचक की भांति देखने से सहज प्राप्त होती है गुरु कृपा

Sun, 26 Oct 2025 12:57 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 26 Oct 2025 12:57 AM IST
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By looking like a waiting beggar, Guru's grace is easily obtained.
एसएस कॉलेज में आयोजित रामाश्रम सत्संग में मौजूद संत। स्रोत: आयोजक
शाहजहांपुर। आध्यात्मिक संस्था रामाश्रम सत्संग के संस्थापक समर्थ गुरु परम संत डाॅ. चतुर्भुज सहाय के अवतरण पर्व के उपलक्ष्य में तीन दिवसीय आंतरिक सत्संग समारोह शनिवार से स्वामी शुकदेवानंद स्नातकोत्तर महाविद्यालय के क्रीड़ा मैदान पर श्रद्धाभाव के साथ आरंभ हो गया। उद्घाटन सत्र को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए आचार्य बृजेश कुमार गुप्ता ने कहा कि गुरु की निकटता और कृपा प्राप्त करने के लिए हमें प्रतीक्षारत याचक की तरह उनकी ओर दृष्टि जमाए रखनी होगी।
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उन्होंने कहा कि गुरु से भिक्षा पाने की भावना रखने का तात्पर्य है कि हम अपने मन से अहंकार को पूरी तरह तिरोहित कर गुरुदेव के सम्मुख जाएं। साथ ही मन में यह आशा भी बनाए रखें कि गुरुकृपा की भीख अवश्य मिलेगी। उन्होंने बताया कि जनपद में यह आयोजन गुरु महाराज के अवतरण पर्व पर उन्हीं के ज्येष्ठ पुत्र संत हृदय डाॅ. बृजेंद्र कुमार द्वारा नियत तिथियों में गत 55 वर्ष से हो रहा है।
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उन्हाेंने गुरुदेव को शहंशाहों का शहंशाह बताते हुए एक संस्मरण का उल्लेख किया। बताया कि एक बार भंडारे के समय तेज बारिश होने लगी। साधक विचलित हो गए, किंतु गुरु महाराज ने निर्विकार भाव बनाए रखा। भंडारा शुरू होने से पहले ही बारिश थमने पर गुरुदेव ने कहा कि हमें किसी भी परिस्थिति में विचलित हुए बिना गुरुदेव की शरण लेनी चाहिए।
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ध्यान क्रिया के बाद द्वितीय सत्र में पीलीभीत से आए आचार्य राम प्रकाश अवस्थी ने सत्संग साधना के आयोजन को आत्मा का भोजन बताया। लखनऊ से आए आचार्य राजदेव सिंह ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि 92 वर्ष की आयु में भी इस आयोजन की व्यवस्थाएं संभालने में किसी प्रकार की थकान और शारीरिक शिथिलता का अनुभव नहीं होता। अंत में साधना के अभ्यासियों को प्रसाद वितरित किया गया। इसके बाद प्रसादार्पण के साथ समापन हुआ।
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