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रामनाम मुद्रिका मुख में रखकर कर सकते भवसागर पार : योगेश
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मदनापुर के ढुकरीकलां गांव में हनुमंत कथा सुनाते योगेश दीक्षित। संवाद
शाहजहांपुर। मदनापुर क्षेत्र के गांव ढुकरीकलां में चल रही हनुमत कथा के आठवें दिन कथा व्यास योगेश दीक्षित ने चित्रकूट महिमा एवं सुंदरकांड की मनोहारी कथा का वर्णन किया।
व्यास ने बताया कि जिस प्रकार हनुमान जी मुद्रिका को मुख में रखकर सौ योजन का समुद्र लांघ गए, उसी तरह सभी रामनाम रूपी मुद्रिका को मुख में रखकर भवसागर को पार कर सकते हैं। हनुमान जी ने लंका में प्रवेश करते ही सबसे पहले लंकिनी की रजोगुणी वृत्ति का सुधार किया। हनुमान और लंकिनी के बीच सत्संग चर्चा हुई लंका में जाकर हनुमान जी ने प्रत्येक महल में सीता जी को खोजा लेकिन कहीं पर भी पता नहीं लगा।
विभीषण के द्वारा युक्ति बताने पर हनुमान जी अशोक वाटिका में गए और अशोक वृक्ष के ऊपर बैठकर सीता जी से रामचंद्र के गुणों का बखान किया। इससे सीता जी के दुख का निवारण हुआ। हनुमान जी ने सीता जी को अपना पर्वताकार रूप दिखाया और सीता जी ने हनुमान को रामप्रिय होने का आशीर्वाद दिया।
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कथाव्यास ने बताया कि जिसने साधना के बल पर परमात्मा को प्राप्त कर लिया, वही संत है। जो साधना के पथ पर चल रहा है, वही साधु है। कथा श्रवण के दौरान आयोजक हरवेंद्र सिंह चौहान, गंगेश चौहान, सुमन चौहान, अश्विनी चौहान, प्रधान राजवीर सिंह चौहान, शिवम, दुर्गेश, शरदवीर चौहान आदि उपस्थित रहे। संवाद
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व्यास ने बताया कि जिस प्रकार हनुमान जी मुद्रिका को मुख में रखकर सौ योजन का समुद्र लांघ गए, उसी तरह सभी रामनाम रूपी मुद्रिका को मुख में रखकर भवसागर को पार कर सकते हैं। हनुमान जी ने लंका में प्रवेश करते ही सबसे पहले लंकिनी की रजोगुणी वृत्ति का सुधार किया। हनुमान और लंकिनी के बीच सत्संग चर्चा हुई लंका में जाकर हनुमान जी ने प्रत्येक महल में सीता जी को खोजा लेकिन कहीं पर भी पता नहीं लगा।
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विभीषण के द्वारा युक्ति बताने पर हनुमान जी अशोक वाटिका में गए और अशोक वृक्ष के ऊपर बैठकर सीता जी से रामचंद्र के गुणों का बखान किया। इससे सीता जी के दुख का निवारण हुआ। हनुमान जी ने सीता जी को अपना पर्वताकार रूप दिखाया और सीता जी ने हनुमान को रामप्रिय होने का आशीर्वाद दिया।
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कथाव्यास ने बताया कि जिसने साधना के बल पर परमात्मा को प्राप्त कर लिया, वही संत है। जो साधना के पथ पर चल रहा है, वही साधु है। कथा श्रवण के दौरान आयोजक हरवेंद्र सिंह चौहान, गंगेश चौहान, सुमन चौहान, अश्विनी चौहान, प्रधान राजवीर सिंह चौहान, शिवम, दुर्गेश, शरदवीर चौहान आदि उपस्थित रहे। संवाद