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राम जन्मभूमि आंदोलन में खेड़ा बझेड़ा से गए थे 60 राम भक्त
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जैतीपुर। श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन मेें भाग लेने के लिए वर्ष 1990 में पूर्व सांसद सुरेंद्र विक्रम सिंह के गांव खेड़ा बझेड़ा से 60 राम भक्तों का जत्था अयोध्या के लिए रवाना हुआ था। लेकिन अयोध्या कूच करने से पहले पुलिस ने जत्थे को गिरफ्तार कर बरेली जिला कारागार भेज दिया। तब से भाजपा नेताओं ने राम भक्तों की कोई सुध नहीं ली, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले से उनमें खुशी की लहर दौड़ गई है।
अयोध्या कूच करने वाले जत्थे में जैतीपुर समेत क्षेत्र के गांव अगरोली, सूरजपुर, कीरतपुर, महमूदापुर, मरुआ झाला, करतोली, मरेना, रुद्रपुर, भुडिय़ा, बझेड़ा भगवानपुर, खेड़ा रठ, भिटारा आदि एक दर्जन गांवों से राम शंकर मौर्य, राकेश कुमार मिश्रा, अजय पाल शर्मा, ओमपाल शर्मा, सोनपाल मौर्य, हरपाल सिंह, सेवाराम, राजाराम मिश्रा, गिरीश मिश्रा, राजवीर सिंह, गणपति माली आदि राम भक्त शामिल थे। इस जत्थे ने पूर्व सांसद के भतीजे स्व. रवींद्र विक्रम सिंह के साथ अयोध्या जाने की तैयारी की। उन्हें ले जाने के लिए बस जैतीपुर में उपलब्ध कराई गई थी, लेकिन यहां पहुंचने से पहले ही पुलिस ने भनक लगने पर जत्थे के सभी सदस्यों को बहगुल नदी पार के गांव गौहापुर में गिरफ्तार कर लिया।
बता दें कि उस वक्त भी गौहापुर और नदी पार के अन्य गांवों के लोगों का यहां तक आवागमन नाव के सहारे होता था। नाव के जरिए पुलिस राम भक्तों के जत्थे को जैतीपुर थाने लाई। तिलहर मेें मजिस्ट्रेट के सामने इन सभी को पेश किया गया और वहां से सभी को बरेली जिला जेल भेज दिया गया। जेल में राम भक्तों ने 13 से 16 दिन कड़ी मशक्कत मेें बिताए। बाद में मजिस्ट्रेट के आदेश पर तत्कालीन कारागार अधीक्षक रमेश चंद्र शुक्ला ने सभी को रिहा कर दिया। जेल में बंद रहे राम भक्तों को भाजपा ने डाक के जरिए एक-एक प्रमाण पत्र भी भेजा, लेकिन बाद में सरकार उन्हें भूल गई। प्रदेश में कल्याण सिंह, राजनाथ सिंह एवं योगी आदित्यनाथ और केंद्र में अटल बिहारी आजपेयी से लेकर नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा की सरकारें बनने पर भी जेल भुगतने वाले राम भक्तों की उपेक्षा होती रही। शनिवार को मंदिर के पक्ष में फैसला आने पर अयोध्या कूच करने वाले तमाम राम भक्त खुशी से सराबोर हैं। उन्होंने 29 वर्ष पहले किए गए त्याग-तपस्या का फल मिलने पर सुप्रीम कोर्ट को धन्यवाद दिया है।
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जत्थे में शामिल रहे राम भक्तों से बात
जिस जमीन के लिए हम लोग 15 दिन जेल में रहे, उसे सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर के पक्ष में किए जाने फैसला देकर तपस्या सफल कर दी। -राकेश कुमार मिश्रा
देर से ही सही, मेहनत का प्रतिफल मिलने से संतोष हुआ है। स्वर्ग सिधार चुके जत्थे के अन्य साथियों की आत्मा भी फैसले से प्रसन्न होगी। -राम शंकर मौर्य
मंदिर के लिए जो जज्बा वर्ष 1990 में था, वह अभी कायम है। हम सबने परेशानियां उठाईं, लेकिन कोर्ट के फैसले इन्हें भुलाने का काम किया। -ओमपाल शर्मा
उद्देश्य महान हो तो किया गया संघर्ष व्यर्थ नहीं जाता और देर-सवेर प्रतिफल जरूर मिलता है। राम भक्तों की भगवान श्रीराम ने सुन ली। -अजय पाल शर्मा
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अयोध्या कूच करने वाले जत्थे में जैतीपुर समेत क्षेत्र के गांव अगरोली, सूरजपुर, कीरतपुर, महमूदापुर, मरुआ झाला, करतोली, मरेना, रुद्रपुर, भुडिय़ा, बझेड़ा भगवानपुर, खेड़ा रठ, भिटारा आदि एक दर्जन गांवों से राम शंकर मौर्य, राकेश कुमार मिश्रा, अजय पाल शर्मा, ओमपाल शर्मा, सोनपाल मौर्य, हरपाल सिंह, सेवाराम, राजाराम मिश्रा, गिरीश मिश्रा, राजवीर सिंह, गणपति माली आदि राम भक्त शामिल थे। इस जत्थे ने पूर्व सांसद के भतीजे स्व. रवींद्र विक्रम सिंह के साथ अयोध्या जाने की तैयारी की। उन्हें ले जाने के लिए बस जैतीपुर में उपलब्ध कराई गई थी, लेकिन यहां पहुंचने से पहले ही पुलिस ने भनक लगने पर जत्थे के सभी सदस्यों को बहगुल नदी पार के गांव गौहापुर में गिरफ्तार कर लिया।
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बता दें कि उस वक्त भी गौहापुर और नदी पार के अन्य गांवों के लोगों का यहां तक आवागमन नाव के सहारे होता था। नाव के जरिए पुलिस राम भक्तों के जत्थे को जैतीपुर थाने लाई। तिलहर मेें मजिस्ट्रेट के सामने इन सभी को पेश किया गया और वहां से सभी को बरेली जिला जेल भेज दिया गया। जेल में राम भक्तों ने 13 से 16 दिन कड़ी मशक्कत मेें बिताए। बाद में मजिस्ट्रेट के आदेश पर तत्कालीन कारागार अधीक्षक रमेश चंद्र शुक्ला ने सभी को रिहा कर दिया। जेल में बंद रहे राम भक्तों को भाजपा ने डाक के जरिए एक-एक प्रमाण पत्र भी भेजा, लेकिन बाद में सरकार उन्हें भूल गई। प्रदेश में कल्याण सिंह, राजनाथ सिंह एवं योगी आदित्यनाथ और केंद्र में अटल बिहारी आजपेयी से लेकर नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा की सरकारें बनने पर भी जेल भुगतने वाले राम भक्तों की उपेक्षा होती रही। शनिवार को मंदिर के पक्ष में फैसला आने पर अयोध्या कूच करने वाले तमाम राम भक्त खुशी से सराबोर हैं। उन्होंने 29 वर्ष पहले किए गए त्याग-तपस्या का फल मिलने पर सुप्रीम कोर्ट को धन्यवाद दिया है।
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जत्थे में शामिल रहे राम भक्तों से बात
जिस जमीन के लिए हम लोग 15 दिन जेल में रहे, उसे सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर के पक्ष में किए जाने फैसला देकर तपस्या सफल कर दी। -राकेश कुमार मिश्रा
देर से ही सही, मेहनत का प्रतिफल मिलने से संतोष हुआ है। स्वर्ग सिधार चुके जत्थे के अन्य साथियों की आत्मा भी फैसले से प्रसन्न होगी। -राम शंकर मौर्य
मंदिर के लिए जो जज्बा वर्ष 1990 में था, वह अभी कायम है। हम सबने परेशानियां उठाईं, लेकिन कोर्ट के फैसले इन्हें भुलाने का काम किया। -ओमपाल शर्मा
उद्देश्य महान हो तो किया गया संघर्ष व्यर्थ नहीं जाता और देर-सवेर प्रतिफल जरूर मिलता है। राम भक्तों की भगवान श्रीराम ने सुन ली। -अजय पाल शर्मा