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जिला अस्पताल में जाने से रोका तो एंबुलेंस चालकों ने मेडिकल कॉलेज गेट पर काटा हंगामा
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शाहजहांपुर। राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य ने सरकारी एंबुलेंसों को कॉलेज से संबंद्ध जिला अस्पताल परिसर में जाने से रोक दिया। इसके बाद एक-एक कर जिला अस्पताल गेट पर इकट्ठा हुए चालकों ने हंगामा शुरू कर दिया। इस दौरान चालकों की प्राचार्य की तीखी नोकझोंक हुई। चालकों ने प्राचार्य पर अभद्रता व मारपीट किए जाने का भी आरोप लगाया है। बाद में पुलिस ने जैसे-तैसे समझाकर मामले को शांत कराया। एंबुलेंस चालकों की ओर से प्राचार्य के खिलाफ पुलिस चौकी एवं विभागीय वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत की गई है।
मंगलवार को मेडिकल कॉलेज से संबंद्ध जिला अस्पताल के स्त्री एवं प्रसूति रोग वार्ड से एक मरीज को 102 नंबर एंबुलेंस लेने आई थी। आरोप है कि तभी वहां कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अभय सिन्हा आ गए और गाड़ी की एमटी सीमा पाल से गेट के बाहर मरीज बैठाने के लिए कहने लगे। एमटी का आरोप है कि इसे लेकर प्राचार्य अभद्रता करने लगे और गाड़ी के आगे खड़े हो गए। उन्होंने गार्डों को बुलाकर सभी सरकारी एंबुलेंस को बाहर करवाने के लिए कह दिया। साथी कर्मचारी के साथ हुई अभद्रता से 108, 102, एएलएस एंबुलेंस चालकों में आक्रोश फैल गया। देखते-देखते कई एंबुलेंस चालक एकत्रित हो गए और प्राचार्य से तीखी नोकझोंक होने लगी। एंबुलेंस चालकों का कहना था कि प्राचार्य अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हैं। यदि सरकारी एंबुलेंस कॉलेज परिसर के अंदर खड़ी नहीं होंगी तो कहां जाएंगी। मामला बिगड़ता देख प्राचार्य मौके से खिसक लिए। हंगामे की सूचना पर 108 नंबर एंबुलेंस के जिला प्रभारी प्रवीन कुमार भी मौके पर आ गए। उन्होंने जब प्राचार्य के कक्ष में उनसे बात करनी चाही तो प्राचार्य ने मिलने से भी इनकार कर दिया। इसे लेकर मामला और बिगड़ गया। सभी एंबुलेंस चालकों ने नारेबाजी शुरू कर दी। सूचना पर चौक कोतवाली पुलिस मौके पर आ गई। पुलिस ने जैसे-तैसे एंबुलेंस चालकों को शांत कराकर मामले को सुलझाया। बाद में कुल सात एंबुलेंस कॉलेज परिसर के अंदर खड़ी किए जाने पर सहमति बन गई। जिला प्रभारी प्रवीन कुमार के मुताबिक उन्होंने मामले की शिकायत चौकी पुलिस तथा ईएमई व पीएम 108, 102 एएलएस एंबुलेंस शाहजहांपुर से की है।
एंबुलेंस चालक को प्राचार्य मार चुके हैं थप्पड़
सीएचसी कांट में तैनात ईएमटी रामलखन करीब डेढ़ माह पूर्व मेडिकल कॉलेज में एंबुलेंस लेकर आए थे। आरोप है कि प्राचार्य ने उनसे एंबुलेंस गेट के बाहर ले जाने के लिए कहा था। उन्होंने जब थोड़ी देर बाद एंबुलेंस ले जाने की बात कही तो प्राचार्य आग बबूला हो गए और थप्पड़ जड़ दिया। हालांकि इस दौरान साथी कर्मचारियों के समझाने पर मामला शांत हो गया था। मंगलवार को रामलखन ने मामले को लेकर पुलिस चौकी में तहरीर दी है।
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33 सेकंड में देना होता है रिस्पांस
108, 102 एएलएस एंबुलेंस के जिला प्रभारी प्रवीण कुमार के मुताबिक कॉल आने पर 33 सेकेंड के भीतर मूवमेंट करना आवश्यक होता है। यदि इससे अधिक समय लग जाता है तो एमटी से जवाब तलब हो जाता है। ऐसे में यदि अस्पताल परिसर के बाहर एंबुलेंस खड़ी कराई जाएंगी तो रिस्पांस टाइम में पहुंचना बेहद मुश्किल होगा।
मरीजों को झेलनी पड़ी मुसीबत
प्राचार्य और एंबुलेंस चालकों के बीच हुए विवाद में मरीज मुसीबत में पड़ गए। एंबुलेंस चालकों ने मेडिकल कॉलेज में लाए मरीजों को एंबुलेंस से नीचे उतारा ही नहीं। वहीं गेट के अंदर एंबुलेंस न घुस पाने की दशा में तीमारदार जैसे तैसे खुद ही मरीजों को अंदर लेकर आए। करीब दो घंटे तक चले विवाद में मरीजों को भारी समस्या का सामना करना पड़ा। एक तरफ जहां एंबुलेंस चालकों ने हड़ताल कर दी थी तो दूसरी तरफ मेडिकल कॉलेज का स्टाफ भी एक ही जगह एकत्रित हो गया था। बता दें कि अक्सर विवाद की स्थिति बनी रहती है। जिसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ता है।
एंबुलेंस चालकों से अपने क्षेत्र की पीएचसी एवं सीएससी पर गाड़ियां खड़ी करने के लिए कहा गया था। चालकों के द्वारा अनावश्यक तौर पर हंगामा काटा गया है। अभद्रता के आरोप निराधार हैं। केवल सात गाड़ियों को ही कॉलेज परिसर के अंदर खड़े होने की अनुमति दी गई है। - डॉ. अभय सिन्हा, प्राचार्य राजकीय मेडिकल कॉलेज
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मंगलवार को मेडिकल कॉलेज से संबंद्ध जिला अस्पताल के स्त्री एवं प्रसूति रोग वार्ड से एक मरीज को 102 नंबर एंबुलेंस लेने आई थी। आरोप है कि तभी वहां कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अभय सिन्हा आ गए और गाड़ी की एमटी सीमा पाल से गेट के बाहर मरीज बैठाने के लिए कहने लगे। एमटी का आरोप है कि इसे लेकर प्राचार्य अभद्रता करने लगे और गाड़ी के आगे खड़े हो गए। उन्होंने गार्डों को बुलाकर सभी सरकारी एंबुलेंस को बाहर करवाने के लिए कह दिया। साथी कर्मचारी के साथ हुई अभद्रता से 108, 102, एएलएस एंबुलेंस चालकों में आक्रोश फैल गया। देखते-देखते कई एंबुलेंस चालक एकत्रित हो गए और प्राचार्य से तीखी नोकझोंक होने लगी। एंबुलेंस चालकों का कहना था कि प्राचार्य अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हैं। यदि सरकारी एंबुलेंस कॉलेज परिसर के अंदर खड़ी नहीं होंगी तो कहां जाएंगी। मामला बिगड़ता देख प्राचार्य मौके से खिसक लिए। हंगामे की सूचना पर 108 नंबर एंबुलेंस के जिला प्रभारी प्रवीन कुमार भी मौके पर आ गए। उन्होंने जब प्राचार्य के कक्ष में उनसे बात करनी चाही तो प्राचार्य ने मिलने से भी इनकार कर दिया। इसे लेकर मामला और बिगड़ गया। सभी एंबुलेंस चालकों ने नारेबाजी शुरू कर दी। सूचना पर चौक कोतवाली पुलिस मौके पर आ गई। पुलिस ने जैसे-तैसे एंबुलेंस चालकों को शांत कराकर मामले को सुलझाया। बाद में कुल सात एंबुलेंस कॉलेज परिसर के अंदर खड़ी किए जाने पर सहमति बन गई। जिला प्रभारी प्रवीन कुमार के मुताबिक उन्होंने मामले की शिकायत चौकी पुलिस तथा ईएमई व पीएम 108, 102 एएलएस एंबुलेंस शाहजहांपुर से की है।
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एंबुलेंस चालक को प्राचार्य मार चुके हैं थप्पड़
सीएचसी कांट में तैनात ईएमटी रामलखन करीब डेढ़ माह पूर्व मेडिकल कॉलेज में एंबुलेंस लेकर आए थे। आरोप है कि प्राचार्य ने उनसे एंबुलेंस गेट के बाहर ले जाने के लिए कहा था। उन्होंने जब थोड़ी देर बाद एंबुलेंस ले जाने की बात कही तो प्राचार्य आग बबूला हो गए और थप्पड़ जड़ दिया। हालांकि इस दौरान साथी कर्मचारियों के समझाने पर मामला शांत हो गया था। मंगलवार को रामलखन ने मामले को लेकर पुलिस चौकी में तहरीर दी है।
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33 सेकंड में देना होता है रिस्पांस
108, 102 एएलएस एंबुलेंस के जिला प्रभारी प्रवीण कुमार के मुताबिक कॉल आने पर 33 सेकेंड के भीतर मूवमेंट करना आवश्यक होता है। यदि इससे अधिक समय लग जाता है तो एमटी से जवाब तलब हो जाता है। ऐसे में यदि अस्पताल परिसर के बाहर एंबुलेंस खड़ी कराई जाएंगी तो रिस्पांस टाइम में पहुंचना बेहद मुश्किल होगा।
मरीजों को झेलनी पड़ी मुसीबत
प्राचार्य और एंबुलेंस चालकों के बीच हुए विवाद में मरीज मुसीबत में पड़ गए। एंबुलेंस चालकों ने मेडिकल कॉलेज में लाए मरीजों को एंबुलेंस से नीचे उतारा ही नहीं। वहीं गेट के अंदर एंबुलेंस न घुस पाने की दशा में तीमारदार जैसे तैसे खुद ही मरीजों को अंदर लेकर आए। करीब दो घंटे तक चले विवाद में मरीजों को भारी समस्या का सामना करना पड़ा। एक तरफ जहां एंबुलेंस चालकों ने हड़ताल कर दी थी तो दूसरी तरफ मेडिकल कॉलेज का स्टाफ भी एक ही जगह एकत्रित हो गया था। बता दें कि अक्सर विवाद की स्थिति बनी रहती है। जिसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ता है।
एंबुलेंस चालकों से अपने क्षेत्र की पीएचसी एवं सीएससी पर गाड़ियां खड़ी करने के लिए कहा गया था। चालकों के द्वारा अनावश्यक तौर पर हंगामा काटा गया है। अभद्रता के आरोप निराधार हैं। केवल सात गाड़ियों को ही कॉलेज परिसर के अंदर खड़े होने की अनुमति दी गई है। - डॉ. अभय सिन्हा, प्राचार्य राजकीय मेडिकल कॉलेज