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बारिश और बाढ़ ने बर्बाद कर दीं फसलें
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शाहजहांपुर के सिधौली में खन्नौत नदी की बाढ़ का पानी खेत भरने के बाद धान की फसल निकालते किसान। संव?
- फोटो : SHAHJAHANPUR
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शाहजहांपुर। दो दिन लगातार हुई भारी वर्षा से धान समेत खरीफ की कई फसलें बर्बाद होने से अन्नदाता बेहद परेशान हैं। किसानों का कहना है कि यदि फसलों को हुए नुकसान की तुलना में सरकार से पर्याप्त मुआवजा जल्द नहीं मिला तो रबी फसलों की बुआई करना भी मुश्किल हो जाएगा।
मिर्जापुर क्षेत्र में गंगा के किनारे स्थित ग्राम पंचायत पैलानी उत्तर के मजरा आजादनगर निवासी इशहाक और इस्लामनगर के हाफिज मासूम अली का कहना है कि तमाम ऐसे किसान हैं, जिनकी पूरी फसल बाढ़ और वर्षा से चौपट हो चुकी है। जलालाबाद-ढाईघाट रोड पर बसे गांव चौंरा निवासी कश्मीर सिंह भी बारिश के बाद बाढ़ से फसलों की सुरक्षा को लेकर परेशान हैं।
जैतीपुर। सैकड़ों किसानों ने रकम पेशगी देकर ठेके पर खेत लिए थे। किसी ने ब्याज पर रकम लेकर लागत लगाई थी, लेकिन वह भी पानी में डूब गई। इन खेतों मे भारी वर्षा से भरा पानी जल्द सूखने वाला नहीं है।
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बारिश से आलू को भारी नुकसान, धान उठाने में भी समस्या
पुवायां (शाहजहांपुर)। एक एकड़ खेत में आलू लगाने में बीज सहित करीब 50 हजार का खर्चा आता है, और फसल तैयार होने पर करीब एक लाख रुपये का आलू निकलता है। सबसे ज्यादा लागत आलू की लगवाई में होती है। पुवायां में खेती का काम काफी आगे रहता है। यहां करीब 50 प्रतिशत धान काटे जाने के बाद आलू रखा जा चुका है। आलू का बीज सड़ जाने से किसानों को भारी नुकसान की आशंका है। पुवायां क्षेत्र में एक-एक किसान ने पांच से 25 एकड़ तक आलू बोया है। नुकसान से बचने के लिए किसानों ने खेतों में जेसीबी से गड्ढे खुदवाए हैं। गहरे गड्ढे खोद कर उनको सोख्ता का रूप दिया गया है। सोख्ता में पानी जमीन के अंदर चला जाएगा और खेत में पानी भरा नहीं रहेगा। पुवायां क्षेत्र में आलू की बुवाई के लिए किसान पहले ही तैयारी कर लेते हैं और स्टाक कर लेते हैं। किसान आलू की बुवाई कर चुके हैं, लेकिन बारिश से बीज सड़ने पर किसान के सामने बीज की व्यवस्था करने चुनौती होगी। अच्छी किस्म का बीज महंगा होने के कारण भी लागत बढ़ेगी।
मुआवजा पाने को नुकसान का ब्योरा दें किसान
उप कृषि निदेशक का कहना है कि जिन किसानों की बीमित फसलें नष्ट हुई हैं, वह प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ पाने के लिए कृषि विभाग से अनुबंधित बीमा कंपनी इफ्को टोकियो जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के टोल फ्री नम्बर 1800 103 5490 पर अथवा बीमा कंपनी प्रतिनिधि विनीत पाण्डेय से संपर्क कर अपनी क्षतिग्रस्त फसल की सूचना दर्ज करा दें। उन्होंने बताया कि डीएम के आदेश पर राजस्व और कृषि विभाग के कर्मचारियों की टीमेें फसली क्षति का आकलन कर रही हैं। इसलिए गैर बीमित किसान अपनी फसल में हुये नुकसान की सूचना अपने क्षेत्रीय लेखपाल अथवा कृषि विभाग के क्षेत्रीय कर्मचारी को उपलब्ध कराएं।
किसानों की बर्बाद हुई फसल का मुआवजा देना चाहिए। इस बारिश से मेरी धान की फसल पूरी तरह चौपट हो गई है अन्य फसलों पर भी बुरा प्रभाव पड़ा है। - श्याम पाल वर्मा, ग्राम प्रधान, नवदिया धूसर (तिलहर)
मेरी धान, तिल, बाजरा, सरसों की बुवाई की फसल बर्बाद हो गई है। सरकार को किसानों को फसल का मुआवजा देना चाहिए। यदि सरकार ध्यान नहीं देगी तब उसे आगामी चुनाव में इसका परिणाम भुगतना होगा।
- अनिल कुमार वर्मा, ग्राम प्रधान, रुद्रपुर (तिलहर)
पराली जलाने पर शस्त्र लाइसेंस निलंबित करने की धमकी देने वाले अधिकारी बारिश से हुए नुकसान का संज्ञान लेकर सरकार से मदद दिलाएंगे क्या ? किसान का भारी नुकसान हुआ है। - गुरुसेवक सिंह, खुटार
आलू में किसानों को बहुत नुकसान हुआ है। एक एकड़ में लगभग 50 हजार रुपये की लागत आती है, जो सब डूब गई है। यह बारिश किसानो के लिए आफत है। - अमनदीप सिंह लवी, बरौना फार्म पुवायां
एक ओर धान की फसल के रेट सही नहीं मिलने के कारण किसान पहले ही टूटा था। बारिश में आलू की फसल बर्बाद हो गई है। लाखों का नुकसान हुआ है। - सुखदेव सिंह लाडी, गुटैया पुवायां
मेरा 11 एकड़ आलू था, जो भारी बारिश के कारण पानी में डूब गया। आलू की बीज सड़ने की आशंका है। सरकार को नुकसान का आकलन कर मुआवजा देना चाहिए। - विजय कुमार, रामपुरकलां खुटार
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मिर्जापुर क्षेत्र में गंगा के किनारे स्थित ग्राम पंचायत पैलानी उत्तर के मजरा आजादनगर निवासी इशहाक और इस्लामनगर के हाफिज मासूम अली का कहना है कि तमाम ऐसे किसान हैं, जिनकी पूरी फसल बाढ़ और वर्षा से चौपट हो चुकी है। जलालाबाद-ढाईघाट रोड पर बसे गांव चौंरा निवासी कश्मीर सिंह भी बारिश के बाद बाढ़ से फसलों की सुरक्षा को लेकर परेशान हैं।
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जैतीपुर। सैकड़ों किसानों ने रकम पेशगी देकर ठेके पर खेत लिए थे। किसी ने ब्याज पर रकम लेकर लागत लगाई थी, लेकिन वह भी पानी में डूब गई। इन खेतों मे भारी वर्षा से भरा पानी जल्द सूखने वाला नहीं है।
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बारिश से आलू को भारी नुकसान, धान उठाने में भी समस्या
पुवायां (शाहजहांपुर)। एक एकड़ खेत में आलू लगाने में बीज सहित करीब 50 हजार का खर्चा आता है, और फसल तैयार होने पर करीब एक लाख रुपये का आलू निकलता है। सबसे ज्यादा लागत आलू की लगवाई में होती है। पुवायां में खेती का काम काफी आगे रहता है। यहां करीब 50 प्रतिशत धान काटे जाने के बाद आलू रखा जा चुका है। आलू का बीज सड़ जाने से किसानों को भारी नुकसान की आशंका है। पुवायां क्षेत्र में एक-एक किसान ने पांच से 25 एकड़ तक आलू बोया है। नुकसान से बचने के लिए किसानों ने खेतों में जेसीबी से गड्ढे खुदवाए हैं। गहरे गड्ढे खोद कर उनको सोख्ता का रूप दिया गया है। सोख्ता में पानी जमीन के अंदर चला जाएगा और खेत में पानी भरा नहीं रहेगा। पुवायां क्षेत्र में आलू की बुवाई के लिए किसान पहले ही तैयारी कर लेते हैं और स्टाक कर लेते हैं। किसान आलू की बुवाई कर चुके हैं, लेकिन बारिश से बीज सड़ने पर किसान के सामने बीज की व्यवस्था करने चुनौती होगी। अच्छी किस्म का बीज महंगा होने के कारण भी लागत बढ़ेगी।
मुआवजा पाने को नुकसान का ब्योरा दें किसान
उप कृषि निदेशक का कहना है कि जिन किसानों की बीमित फसलें नष्ट हुई हैं, वह प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ पाने के लिए कृषि विभाग से अनुबंधित बीमा कंपनी इफ्को टोकियो जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के टोल फ्री नम्बर 1800 103 5490 पर अथवा बीमा कंपनी प्रतिनिधि विनीत पाण्डेय से संपर्क कर अपनी क्षतिग्रस्त फसल की सूचना दर्ज करा दें। उन्होंने बताया कि डीएम के आदेश पर राजस्व और कृषि विभाग के कर्मचारियों की टीमेें फसली क्षति का आकलन कर रही हैं। इसलिए गैर बीमित किसान अपनी फसल में हुये नुकसान की सूचना अपने क्षेत्रीय लेखपाल अथवा कृषि विभाग के क्षेत्रीय कर्मचारी को उपलब्ध कराएं।
किसानों की बर्बाद हुई फसल का मुआवजा देना चाहिए। इस बारिश से मेरी धान की फसल पूरी तरह चौपट हो गई है अन्य फसलों पर भी बुरा प्रभाव पड़ा है। - श्याम पाल वर्मा, ग्राम प्रधान, नवदिया धूसर (तिलहर)
मेरी धान, तिल, बाजरा, सरसों की बुवाई की फसल बर्बाद हो गई है। सरकार को किसानों को फसल का मुआवजा देना चाहिए। यदि सरकार ध्यान नहीं देगी तब उसे आगामी चुनाव में इसका परिणाम भुगतना होगा।
- अनिल कुमार वर्मा, ग्राम प्रधान, रुद्रपुर (तिलहर)
पराली जलाने पर शस्त्र लाइसेंस निलंबित करने की धमकी देने वाले अधिकारी बारिश से हुए नुकसान का संज्ञान लेकर सरकार से मदद दिलाएंगे क्या ? किसान का भारी नुकसान हुआ है। - गुरुसेवक सिंह, खुटार
आलू में किसानों को बहुत नुकसान हुआ है। एक एकड़ में लगभग 50 हजार रुपये की लागत आती है, जो सब डूब गई है। यह बारिश किसानो के लिए आफत है। - अमनदीप सिंह लवी, बरौना फार्म पुवायां
एक ओर धान की फसल के रेट सही नहीं मिलने के कारण किसान पहले ही टूटा था। बारिश में आलू की फसल बर्बाद हो गई है। लाखों का नुकसान हुआ है। - सुखदेव सिंह लाडी, गुटैया पुवायां
मेरा 11 एकड़ आलू था, जो भारी बारिश के कारण पानी में डूब गया। आलू की बीज सड़ने की आशंका है। सरकार को नुकसान का आकलन कर मुआवजा देना चाहिए। - विजय कुमार, रामपुरकलां खुटार