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धान खरीद घोटाला: दस दिन में 2.52 लाख टन कहां से खरीद डाला, शुरू हुई जांच
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शाहजहांपुर। किसानों के नाम से धान की फर्जी खरीद में पांच क्रय केंद्र प्रभारियों के खिलाफ एफआईआर होने के बाद इस घोटाले की परतें उधड़नी शुरू हो गई हैं। दिवाली से पहले तक 12160.14 टन धान की खरीद हुई, लेकिन अवकाश के बाद दस दिन के अंदर खरीद का आंकड़ा बढ़कर 264899.90 टन हो गया। वहीं, दूसरी ओर किसान अपने धान बेचने को परेशान दिखे। इसके बावजूद केंद्र प्रभारी इतने कम समय में 2.52 लाख क्विंटल धान कहां से ले आए, इस पर एडीएम ने जांच शुरू कर दी है। अब अधिकारी उन क्रय केंद्रों का डाटा जुटाने में लगे हैं, जिन पर अचानक हुई खरीद से यह ग्राफ बढ़ गया था। अधिकारियों का कहना है कि जांच में फर्जी खरीद में शामिल कई सफेदपोश माफिया भी बेनकाब होंगे।
दरअसल दिवाली के अवकाश के दौरान चार दिन तक क्रय केंद्रों पर धान खरीद बंद रही। इसके बाद क्रय केंद्र खुले तो धान की आवक कम रही, लेकिन दस दिन में ही खरीद का ग्राफ 58 प्रतिशत बढ़ गया। वहीं, क्रय केंद्र से बार-बार लौटाने से परेशान किसानों ने अपना धान आढ़तों पर बेच दिया। मगर उनके मोबाइल पर धान बिक्री और भुगतान के मेसेज पहुंचे तो इस पूरे खेल का खुलासा हो गया। अब रिपोर्ट दर्ज होने के बाद एडीएम फाइनेंस गिरिजेश चौधरी ने मामले की जांच शुरू कर दी है। मंगलवार को उन्होंने डिप्टी आरएमओ अभिलाष चंद्र सागरवाल को बुलाकर अचानक खरीद बढ़ाने वाले केंद्रों का ब्योरा तलब किया है। साथ ही उन किसानों का सत्यापन कराने के भी निर्देश दिए हैं, जिनके नाम से फर्जी खरीद हुई।
रात में खरीद का हुआ था विरोध
तिलहर मंडी मेें खोले गए विभिन्न क्रय एजेंसियों के सेंटरों पर दिन भर सन्नाटा पसरा रहता था, लेकिन रात मेें इन सेंटरों पर आढ़तों का धान तौला जाता था। भारतीय कृषक दल के राष्ट्रीय महासचिव एवं जिला पंचायत सदस्य प्रमोद यादव ने इसके विरोध में तिलहर मंडी गेट पर कार्यकर्ताओं के साथ बेमियादी धरना शुरू किया तो प्रशासन बैकफुट पर आया और रात मेें तौल बंद कराई गई। मगर रात में तौल के पीछे चल रहे खेल की जांच न करके अफसरों ने मामला रफा-दफा कर दिया।
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धान क्रय केंद्र प्रभारियों पर एफआईआर होने के बाद अब संबंधित केंद्रों पर धान सप्लाई करने वाले उन किसानों का सत्यापन किया जा रहा है, जिनके नाम से खरीद दर्शाई गई है। जांच में इस बिंदु पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है कि यदि किसानों ने सेंटरों पर धान नहीं बेचा तो उनके बैंक एकाउंट नंबर, आईएफएससी कोड, खसरा-खतौनी आदि प्रपत्र क्रय केंद्रों तक पहुंचाने वाले लोग कौन हैं। जांच में दोषी पाए गए लोगों पर कड़ी कार्रवाई होगी। - गिरिजेश कुमार चौधरी, एडीएम फाइनेंस
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दरअसल दिवाली के अवकाश के दौरान चार दिन तक क्रय केंद्रों पर धान खरीद बंद रही। इसके बाद क्रय केंद्र खुले तो धान की आवक कम रही, लेकिन दस दिन में ही खरीद का ग्राफ 58 प्रतिशत बढ़ गया। वहीं, क्रय केंद्र से बार-बार लौटाने से परेशान किसानों ने अपना धान आढ़तों पर बेच दिया। मगर उनके मोबाइल पर धान बिक्री और भुगतान के मेसेज पहुंचे तो इस पूरे खेल का खुलासा हो गया। अब रिपोर्ट दर्ज होने के बाद एडीएम फाइनेंस गिरिजेश चौधरी ने मामले की जांच शुरू कर दी है। मंगलवार को उन्होंने डिप्टी आरएमओ अभिलाष चंद्र सागरवाल को बुलाकर अचानक खरीद बढ़ाने वाले केंद्रों का ब्योरा तलब किया है। साथ ही उन किसानों का सत्यापन कराने के भी निर्देश दिए हैं, जिनके नाम से फर्जी खरीद हुई।
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रात में खरीद का हुआ था विरोध
तिलहर मंडी मेें खोले गए विभिन्न क्रय एजेंसियों के सेंटरों पर दिन भर सन्नाटा पसरा रहता था, लेकिन रात मेें इन सेंटरों पर आढ़तों का धान तौला जाता था। भारतीय कृषक दल के राष्ट्रीय महासचिव एवं जिला पंचायत सदस्य प्रमोद यादव ने इसके विरोध में तिलहर मंडी गेट पर कार्यकर्ताओं के साथ बेमियादी धरना शुरू किया तो प्रशासन बैकफुट पर आया और रात मेें तौल बंद कराई गई। मगर रात में तौल के पीछे चल रहे खेल की जांच न करके अफसरों ने मामला रफा-दफा कर दिया।
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धान क्रय केंद्र प्रभारियों पर एफआईआर होने के बाद अब संबंधित केंद्रों पर धान सप्लाई करने वाले उन किसानों का सत्यापन किया जा रहा है, जिनके नाम से खरीद दर्शाई गई है। जांच में इस बिंदु पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है कि यदि किसानों ने सेंटरों पर धान नहीं बेचा तो उनके बैंक एकाउंट नंबर, आईएफएससी कोड, खसरा-खतौनी आदि प्रपत्र क्रय केंद्रों तक पहुंचाने वाले लोग कौन हैं। जांच में दोषी पाए गए लोगों पर कड़ी कार्रवाई होगी। - गिरिजेश कुमार चौधरी, एडीएम फाइनेंस