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Shahjahanpur News: सरकारी जमीन पर निर्माण न रुकवाने का आरोप...धरने पर बैठे अधिवक्ता
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पुवायां। खुटार कसबे में करोड़ों की कीमत वाली सरकारी भूमि पर शनिवार को फिर से निर्माण शुरू होने पर अधिवक्ता एसडीएम कार्यालय के सामने धरने पर बैठ गए। उनका आरोप है कि राजस्वकर्मियों की सांठगांठ से सरकारी भूमि पर दुकानें बनवाई जा रही हैं।
खुटार कस्बे में एक स्थान पर दुकानों के लिए नींव खोदे जाने पर लोगों ने सरकारी भूमि पर कब्जे का आरोप लगाते हुए शिकायत की थी। नायब तहसीलदार ने मौका मुआयना कर निर्माण रुकवा दिया था। कई दिन तक निर्माण कार्य बंद रहा लेकिन बाद में निर्माण कार्य फिर से शुरू हो गया था।
दुकान का निर्माण करा रहे लोगों का कहना था कि लेखपाल ने पैमाइश की थी, जिसमें जमीन सरकारी नहीं पाई गई है। नौ जून को एसडीएम चित्रा निर्वाल ने निर्माण कार्य पर फिर रोक लगा दी थी। शनिवार को अधिवक्ता भूपेंद्र सिंह कई लोगों के साथ एसडीएम कार्यालय के सामने धरने पर बैठ गए।
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उनका कहना है कि जिस जमीन पर निर्माण हो रहा है, वहां नगर पंचायत की डेढ़ एकड़ जमीन है। जहां निर्माण हो रहा है, उसके दोनाें ओर सरकारी जमीन बताते हुए कब्जा करने वालों पर पूर्व में ही रिपोर्ट दर्ज है। ऐसे में पहले सरकारी जमीन खाली कराई जाए।
फिर जिसकी निजी जमीन है, उनको निर्माण की अनुमति दी जाए। देर शाम तक धरना-प्रदर्शन जारी था। उधर, निर्माण कराने वालों का कहना है कि वह अपनी जमीन पर निर्माण करा रहे हैं। कुछ लोग निजी स्वार्थवश विरोध कर रहे हैं।
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ईओ सहित 22 लोगों पर दर्ज हुई थी रिपोर्ट
-2018 में इसी जमीन के पास दुकानों का निर्माण कराने का प्रयास किया गया था। तब तत्कालीन डीएम के आदेश पर नगर पंचायत के तत्कालीन ईओ सहित 22 लोगों पर सरकारी भूमि पर कब्जा करने के आरोप में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। यह मामला कोर्ट में विचाराधीन है। अब पास में ही निर्माण कार्य रोकने में प्रशासन की नाकामी को लेकर खूब चर्चा है।
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-पूर्व में एडीएम के आदेश पर निर्माण पर रोक लगाई गई थी। पैमाइश के बाद जमीन निजी पाई गई, जिस कारण जमीन स्वामी निर्माण करा रहे होंगे। वकीलों के धरने पर बैठने की जानकारी नहीं है।
चित्रा निर्वाल, एसडीएम पुवायां
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खुटार कस्बे में एक स्थान पर दुकानों के लिए नींव खोदे जाने पर लोगों ने सरकारी भूमि पर कब्जे का आरोप लगाते हुए शिकायत की थी। नायब तहसीलदार ने मौका मुआयना कर निर्माण रुकवा दिया था। कई दिन तक निर्माण कार्य बंद रहा लेकिन बाद में निर्माण कार्य फिर से शुरू हो गया था।
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दुकान का निर्माण करा रहे लोगों का कहना था कि लेखपाल ने पैमाइश की थी, जिसमें जमीन सरकारी नहीं पाई गई है। नौ जून को एसडीएम चित्रा निर्वाल ने निर्माण कार्य पर फिर रोक लगा दी थी। शनिवार को अधिवक्ता भूपेंद्र सिंह कई लोगों के साथ एसडीएम कार्यालय के सामने धरने पर बैठ गए।
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उनका कहना है कि जिस जमीन पर निर्माण हो रहा है, वहां नगर पंचायत की डेढ़ एकड़ जमीन है। जहां निर्माण हो रहा है, उसके दोनाें ओर सरकारी जमीन बताते हुए कब्जा करने वालों पर पूर्व में ही रिपोर्ट दर्ज है। ऐसे में पहले सरकारी जमीन खाली कराई जाए।
फिर जिसकी निजी जमीन है, उनको निर्माण की अनुमति दी जाए। देर शाम तक धरना-प्रदर्शन जारी था। उधर, निर्माण कराने वालों का कहना है कि वह अपनी जमीन पर निर्माण करा रहे हैं। कुछ लोग निजी स्वार्थवश विरोध कर रहे हैं।
ईओ सहित 22 लोगों पर दर्ज हुई थी रिपोर्ट
-2018 में इसी जमीन के पास दुकानों का निर्माण कराने का प्रयास किया गया था। तब तत्कालीन डीएम के आदेश पर नगर पंचायत के तत्कालीन ईओ सहित 22 लोगों पर सरकारी भूमि पर कब्जा करने के आरोप में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। यह मामला कोर्ट में विचाराधीन है। अब पास में ही निर्माण कार्य रोकने में प्रशासन की नाकामी को लेकर खूब चर्चा है।
-पूर्व में एडीएम के आदेश पर निर्माण पर रोक लगाई गई थी। पैमाइश के बाद जमीन निजी पाई गई, जिस कारण जमीन स्वामी निर्माण करा रहे होंगे। वकीलों के धरने पर बैठने की जानकारी नहीं है।
चित्रा निर्वाल, एसडीएम पुवायां