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मांटेसरी स्कूलों की मनमानी से अभिभावक परेशान
Shahjahanpur
Updated Sun, 26 May 2013 05:30 AM IST
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समय पूर्व परीक्षाफल घोषित करने से खड़ी हुई समस्या
- विभाग ने 31 से पहले टीसी जारी करने पर लगाई रोक
अजय अवस्थी
शाहजहांपुर। मांटेसरी स्कूलों की मनमानी बेसिक शिक्षा विभाग और अभिभावकों के लिए सिर दर्द बनती जा रही है। बावजूद इसके विभाग स्कूल संचालकों पर लगाम कसने को तैयार नहीं। जिसका खामियाजा अभिभावकों को भरना पड़ रहा है।
अपनी ढपली अलग बजाने में माहिर मांटेसरी स्कूलों में विभागीय नियम-कानून नहीं चलते, जबकि उन्हें इसी शर्त पर मान्यता दी जाती है कि वह बेसिक शिक्षा परिषद के नियमोें के अनुसार ही विद्यालय का संचालन करेंगे। मान्यता मिलने के बाद स्कूल संचालक मनमानी पर उतर आते हैं, उनके अपने कानून अभिभावकों के लिए मुसीबत बन जाते हैं। अब स्कूल अवधि की बात करें तो बता दें कि इस बार परिषद के सचिव ने समस्त स्कूल 31 मई तक खोलने और परीक्षाफल 30 मई को घोषित करने का फरमान दिया है, लेकिन मांटेसरी स्कूलों ने अपनी सुविधानुसार परीक्षाफल घोषित कर दिया। खास बात रही कि इन स्कूलों में किसी एक तिथि को रिजल्ट नहीं बांटा गया, हर स्कूल ने अलग-अलग तारीखों में रिजल्ट बांटा। अब पेंच फंसा है छात्र-छात्राओं की टीसी (स्थानांतरण प्रमाण पत्र) प्रति हस्ताक्षरित यानी काउंटर साइन करने के लिए। जो अभिभावक मांटेसरी स्कूलों से आजिज आ चुके हैं या किसी अन्य कारण से बच्चे का नाम अच्छे स्कूल में लिखवाना चाहते हैं, उनकी टीसी काउंटर साइन नहीं हो रही है।
इस मामले में विभाग तर्क दे रहा है कि परिषद का शैक्षिक सत्र 31 मई को खत्म हो रहा है और परीक्षाफल 30 मई को घोषित होना है, इसलिए इससे पहले न तो बच्चों का प्रमोशन हो सकता है और न ही टीसी जारी हो सकती है। ऐसे में अभिभावकों का परेशान होना लाजिमी है। इस भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप में अभिभावक टीसी लिए कभी नए तो कभी पुराने स्कूल और कभी विभागीय कार्यालय के चक्कर काटते घूम रहे हैं, लेकिन समस्या का समाधान होता कहीं से नहीं दिखाई दे रहा है।
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मांटेसरी स्कूलों को परिषद
के नियम तो मानने ही होंगे
‘मांटेसरी स्कूलों को परिषद के नियम मानने चाहिए। सचिव बेसिक शिक्षा परिषद ने लिखित रूप से आदेश भेजा है कि सत्र 31 मई तक चलाया जाएगा और परीक्षाफल 30 मई को घोषित किया जाएगा, तो फिर इन स्कूलों को पहले रिजल्ट घोषित ही नहीं करना चाहिए था। मान्यता की पहली शर्त ही परिषद के नियम-कानून मानने की होती है। स्कूलों की मनमानी से बच्चों का कॅरियर प्रभावित होता है, यह बात स्कूल संचालकों को सोचनी चाहिए’।
- सुशील बाबू मिश्रा, प्रभारी बीएसए
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- विभाग ने 31 से पहले टीसी जारी करने पर लगाई रोक
अजय अवस्थी
शाहजहांपुर। मांटेसरी स्कूलों की मनमानी बेसिक शिक्षा विभाग और अभिभावकों के लिए सिर दर्द बनती जा रही है। बावजूद इसके विभाग स्कूल संचालकों पर लगाम कसने को तैयार नहीं। जिसका खामियाजा अभिभावकों को भरना पड़ रहा है।
अपनी ढपली अलग बजाने में माहिर मांटेसरी स्कूलों में विभागीय नियम-कानून नहीं चलते, जबकि उन्हें इसी शर्त पर मान्यता दी जाती है कि वह बेसिक शिक्षा परिषद के नियमोें के अनुसार ही विद्यालय का संचालन करेंगे। मान्यता मिलने के बाद स्कूल संचालक मनमानी पर उतर आते हैं, उनके अपने कानून अभिभावकों के लिए मुसीबत बन जाते हैं। अब स्कूल अवधि की बात करें तो बता दें कि इस बार परिषद के सचिव ने समस्त स्कूल 31 मई तक खोलने और परीक्षाफल 30 मई को घोषित करने का फरमान दिया है, लेकिन मांटेसरी स्कूलों ने अपनी सुविधानुसार परीक्षाफल घोषित कर दिया। खास बात रही कि इन स्कूलों में किसी एक तिथि को रिजल्ट नहीं बांटा गया, हर स्कूल ने अलग-अलग तारीखों में रिजल्ट बांटा। अब पेंच फंसा है छात्र-छात्राओं की टीसी (स्थानांतरण प्रमाण पत्र) प्रति हस्ताक्षरित यानी काउंटर साइन करने के लिए। जो अभिभावक मांटेसरी स्कूलों से आजिज आ चुके हैं या किसी अन्य कारण से बच्चे का नाम अच्छे स्कूल में लिखवाना चाहते हैं, उनकी टीसी काउंटर साइन नहीं हो रही है।
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इस मामले में विभाग तर्क दे रहा है कि परिषद का शैक्षिक सत्र 31 मई को खत्म हो रहा है और परीक्षाफल 30 मई को घोषित होना है, इसलिए इससे पहले न तो बच्चों का प्रमोशन हो सकता है और न ही टीसी जारी हो सकती है। ऐसे में अभिभावकों का परेशान होना लाजिमी है। इस भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप में अभिभावक टीसी लिए कभी नए तो कभी पुराने स्कूल और कभी विभागीय कार्यालय के चक्कर काटते घूम रहे हैं, लेकिन समस्या का समाधान होता कहीं से नहीं दिखाई दे रहा है।
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मांटेसरी स्कूलों को परिषद
के नियम तो मानने ही होंगे
‘मांटेसरी स्कूलों को परिषद के नियम मानने चाहिए। सचिव बेसिक शिक्षा परिषद ने लिखित रूप से आदेश भेजा है कि सत्र 31 मई तक चलाया जाएगा और परीक्षाफल 30 मई को घोषित किया जाएगा, तो फिर इन स्कूलों को पहले रिजल्ट घोषित ही नहीं करना चाहिए था। मान्यता की पहली शर्त ही परिषद के नियम-कानून मानने की होती है। स्कूलों की मनमानी से बच्चों का कॅरियर प्रभावित होता है, यह बात स्कूल संचालकों को सोचनी चाहिए’।
- सुशील बाबू मिश्रा, प्रभारी बीएसए