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Shahjahanpur News: कोलाघाट पुल का 85 फीसदी निर्माण पूरा... अब बारिश से काम बाधित
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जलालाबाद में कोलाघाट पर निर्माणाधीन पुल। संवाद
लगातार हो रही वर्षा से गर्डर को पिलर्स पर रखने का काम हो रहा प्रभावित
जलालाबाद। रामगंगा और बहगुल नदियों पर बन रहे कोलाघाट के नए पुल का निर्माण कार्य 16 माह में 85 प्रतिशत से अधिक हो चुका है। गत छह जुलाई को गर्डर रखने के दौरान क्रेन का हाइड्रोलिक टैंक फटने के बाद निर्माण में जुटे अभियंताओं ने क्रेन में आई खराबी ठीक कर ली है, लेकिन तब से लगातार हो रही बारिश के कारण पुल पर गर्डर रखे जाने सहित शेष कार्य प्रभावित हो रहे हैं। हालांकि, निर्माण कंपनी के अधिकारी पुल पर निर्माण कार्य लगातार चालू होने का दावा कर रहे हैं।
कोलाघाट पर 1802 मीटर लंबे पुल को बनाने के लिए 46 पिलर्स पर 135 गर्डर रखे जाने हैं। पुल में प्रयोग होने वाला एक गर्डर 40 मीटर लंबा और 90 टन वजनी बनाया गया है। इस कारण पिलर पर गर्डर रखने का काम शुरू से ही चुनौतीपूर्ण रहा है। अब रुक-रुक कर लगातार हो रही बारिश से शेष कार्यों में ठहराव आ गया है।
पुल के ऊपर पिलर पर अब तक 125 गर्डर रखे जा चुके हैं। पिलर संख्या 17 व 18 के बीच एक, पिलर 18 व 19, 23 व 24 और 24 व 25 पर तीन-तीन गर्डर रखे जाने हैं। इस तरह पुल पर अभी दस गर्डर रखे जाने बाकी हैं। पुल निर्माण में प्रयोग की जा रही नई पाइल फाउंडेशन तकनीक में गर्डर जमीन पर बनाने के बाद उन्हें क्रेन की मदद से दो पिलर के फासले के बीच रखा जाता है।
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पुरानी तकनीक में गर्डर का निर्माण पुल के ऊपर पिलर के बीच ही किया जाता था। कोलाघाट के पुराने पुल में एक पिलर से दूसरे पिलर के बीच की दूरी 30 मीटर थी, जबकि नए पुल में यह फासला 40 मीटर रखा गया है। निर्माण कंपनी के साइट इंजीनियर राजू सोनकर के मुताबिक पिलर के ऊपर गर्डर बनाने में लगभग छह दिन लगते थे, जबकि जमीन पर कंक्रीट का गर्डर तीन दिन में तैयार हो जाता है। उन्होंने बताया कि पुल पर रेलिंग बनाने और रखे जा चुके गर्डर को जोड़ने का काम चल रहा है। संवाद
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मार्च 2025 में शुरू हुआ था पुल का निर्माण कार्य
शासन ने 166. 83 करोड़ रुपये की लागत वाले कोलाघाट के नए पुल के निर्माण की सितंबर 2024 को मंजूरी दी थी। सेतु निगम ने इसके निर्माण का ठेका बरेली की एएन इंस्ट्रक्चर जेवी कंपनी को दिया। कंपनी ने मार्च 2025 में निर्माण का काम शुरू दिया। सरकार ने 24 महीने में इसका निर्माण पूरा करने की समयावधि तय की थी। पुल में 45 पिलर होंगे, जबकि इतनी ही लंबाई के पुराने पुल में 59 पिलर बनाए गए थे।
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कोलाघाट पुल का निर्माण तेजी से हुआ है। पिछले तीन दिन से बारिश होने के कारण कार्य में बाधा आई है। निर्धारित अवधि से पूर्व पुल का निर्माण पूरा कर लिया जाएगा।
-बिजेंद्र मौर्य, परियोजना प्रबंधक, उप्र राज्य सेतु निर्माण निगम
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जलालाबाद। रामगंगा और बहगुल नदियों पर बन रहे कोलाघाट के नए पुल का निर्माण कार्य 16 माह में 85 प्रतिशत से अधिक हो चुका है। गत छह जुलाई को गर्डर रखने के दौरान क्रेन का हाइड्रोलिक टैंक फटने के बाद निर्माण में जुटे अभियंताओं ने क्रेन में आई खराबी ठीक कर ली है, लेकिन तब से लगातार हो रही बारिश के कारण पुल पर गर्डर रखे जाने सहित शेष कार्य प्रभावित हो रहे हैं। हालांकि, निर्माण कंपनी के अधिकारी पुल पर निर्माण कार्य लगातार चालू होने का दावा कर रहे हैं।
कोलाघाट पर 1802 मीटर लंबे पुल को बनाने के लिए 46 पिलर्स पर 135 गर्डर रखे जाने हैं। पुल में प्रयोग होने वाला एक गर्डर 40 मीटर लंबा और 90 टन वजनी बनाया गया है। इस कारण पिलर पर गर्डर रखने का काम शुरू से ही चुनौतीपूर्ण रहा है। अब रुक-रुक कर लगातार हो रही बारिश से शेष कार्यों में ठहराव आ गया है।
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पुल के ऊपर पिलर पर अब तक 125 गर्डर रखे जा चुके हैं। पिलर संख्या 17 व 18 के बीच एक, पिलर 18 व 19, 23 व 24 और 24 व 25 पर तीन-तीन गर्डर रखे जाने हैं। इस तरह पुल पर अभी दस गर्डर रखे जाने बाकी हैं। पुल निर्माण में प्रयोग की जा रही नई पाइल फाउंडेशन तकनीक में गर्डर जमीन पर बनाने के बाद उन्हें क्रेन की मदद से दो पिलर के फासले के बीच रखा जाता है।
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पुरानी तकनीक में गर्डर का निर्माण पुल के ऊपर पिलर के बीच ही किया जाता था। कोलाघाट के पुराने पुल में एक पिलर से दूसरे पिलर के बीच की दूरी 30 मीटर थी, जबकि नए पुल में यह फासला 40 मीटर रखा गया है। निर्माण कंपनी के साइट इंजीनियर राजू सोनकर के मुताबिक पिलर के ऊपर गर्डर बनाने में लगभग छह दिन लगते थे, जबकि जमीन पर कंक्रीट का गर्डर तीन दिन में तैयार हो जाता है। उन्होंने बताया कि पुल पर रेलिंग बनाने और रखे जा चुके गर्डर को जोड़ने का काम चल रहा है। संवाद
मार्च 2025 में शुरू हुआ था पुल का निर्माण कार्य
शासन ने 166. 83 करोड़ रुपये की लागत वाले कोलाघाट के नए पुल के निर्माण की सितंबर 2024 को मंजूरी दी थी। सेतु निगम ने इसके निर्माण का ठेका बरेली की एएन इंस्ट्रक्चर जेवी कंपनी को दिया। कंपनी ने मार्च 2025 में निर्माण का काम शुरू दिया। सरकार ने 24 महीने में इसका निर्माण पूरा करने की समयावधि तय की थी। पुल में 45 पिलर होंगे, जबकि इतनी ही लंबाई के पुराने पुल में 59 पिलर बनाए गए थे।
कोलाघाट पुल का निर्माण तेजी से हुआ है। पिछले तीन दिन से बारिश होने के कारण कार्य में बाधा आई है। निर्धारित अवधि से पूर्व पुल का निर्माण पूरा कर लिया जाएगा।
-बिजेंद्र मौर्य, परियोजना प्रबंधक, उप्र राज्य सेतु निर्माण निगम