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गैर इरादतन हत्या में पिता और दो पुत्रों को सात-सात वर्ष की कैद
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गैर इरादतन हत्या में पिता-दो पुत्रों को सात वर्ष की कैद
शाहजहांपुर। अपर सत्र न्यायाधीश सप्तम एहसाननुल्लाह खां ने गैर इरादतन हत्या के मामले में दोष साबित होने पर बुधवार को ग्रामीण व उसके दो पुत्रों को सात वर्ष की कैद और प्रत्येक को 11 हजार के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
तिलहर क्षेत्र गांव धन्यौरा निवासी रामचंद्र 20 अप्रैल 2014 को सुबह नौ बजे दुकान पर सामान खरीदने जा रहे थे, तभी रास्ते में गांव के ही गंगाराम अपने पुत्रों अशोक, रामजीत व सुशीला देवी के साथ पुरानी रंजिश को लेकर गाली-गलौज करने लगे। रामचंद्र ने जब इसका विरोध किया तो गंगाराम ने पुत्रों के साथ उसे पीटना शुरू कर दिया। शोर-शराबा सुनकर रामचंद्र को बचाने उसके भाई रामभरोसे आए तो हमलावरों ने उन्हें भी पीटना शुरू कर दिया। चीख-पुकार सुनकर आस-पास गांव के तमाम लोग इकट्ठा हो गए। इसके बाद हमलावर भाग गए। रामचंद्र ने मामले की रिपोर्ट उसी दिन दर्ज कराई। पिटाई में दोनों भाइयों को चोटें आईं। जिसमें गंभीर रूप से चोटिल रामभरोसे की इलाज के दौरान मौत हो गई। पुलिस ने मामला गैर इरादतन हत्या में तरमीम कर विवेचना के उपरांत गंगाराम और उसके पुत्रों अशोक व रामजीत के खिलाफ आरोप पत्र कोर्ट भेजा। जबकि सुशीला का नाम विवेचना में बाहर हो गया। कोर्ट में मुकदमे की सुनवाई के दौरान गवाहों के बयान व सरकारी वकील श्रीपाल वर्मा के तर्कों को सुनने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश ने गंगाराम और उसके दोनों पुत्रों को गैर इरादतन हत्या का दोषी पाते हुए तीनों को सात साल की कैद के साथ प्रत्येक को 11 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।
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शाहजहांपुर। अपर सत्र न्यायाधीश सप्तम एहसाननुल्लाह खां ने गैर इरादतन हत्या के मामले में दोष साबित होने पर बुधवार को ग्रामीण व उसके दो पुत्रों को सात वर्ष की कैद और प्रत्येक को 11 हजार के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
तिलहर क्षेत्र गांव धन्यौरा निवासी रामचंद्र 20 अप्रैल 2014 को सुबह नौ बजे दुकान पर सामान खरीदने जा रहे थे, तभी रास्ते में गांव के ही गंगाराम अपने पुत्रों अशोक, रामजीत व सुशीला देवी के साथ पुरानी रंजिश को लेकर गाली-गलौज करने लगे। रामचंद्र ने जब इसका विरोध किया तो गंगाराम ने पुत्रों के साथ उसे पीटना शुरू कर दिया। शोर-शराबा सुनकर रामचंद्र को बचाने उसके भाई रामभरोसे आए तो हमलावरों ने उन्हें भी पीटना शुरू कर दिया। चीख-पुकार सुनकर आस-पास गांव के तमाम लोग इकट्ठा हो गए। इसके बाद हमलावर भाग गए। रामचंद्र ने मामले की रिपोर्ट उसी दिन दर्ज कराई। पिटाई में दोनों भाइयों को चोटें आईं। जिसमें गंभीर रूप से चोटिल रामभरोसे की इलाज के दौरान मौत हो गई। पुलिस ने मामला गैर इरादतन हत्या में तरमीम कर विवेचना के उपरांत गंगाराम और उसके पुत्रों अशोक व रामजीत के खिलाफ आरोप पत्र कोर्ट भेजा। जबकि सुशीला का नाम विवेचना में बाहर हो गया। कोर्ट में मुकदमे की सुनवाई के दौरान गवाहों के बयान व सरकारी वकील श्रीपाल वर्मा के तर्कों को सुनने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश ने गंगाराम और उसके दोनों पुत्रों को गैर इरादतन हत्या का दोषी पाते हुए तीनों को सात साल की कैद के साथ प्रत्येक को 11 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।
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