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आत्मा के लीन होने तक करें परमात्मा का चिंतन

Sat, 02 Dec 2017 07:21 PM IST
Updated Sat, 02 Dec 2017 07:21 PM IST
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आत्मा के लीन होने तक करें परमात्मा का चिंतन
शाहजहांपुर। आर्य महिला महाविद्यालय में चल रहे आर्य समाज के वार्षिकोत्सव के दूसरे दिन वैदिक यज्ञ के साथ प्रवचन हुए। इस अवसर पर छात्राओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए।
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इस अवसर पर स्वामी विजय देव नैष्ठिक ने कहा कि हमें परमात्मा का चिंतन इस प्रकार करना चाहिए कि जिससे हमारी आत्मा उसमें लीन हो गई हो। उसका हम सच्चे मन से चिंतन करें, मनन करें और उसी में खो जाएं। वह सृष्टि का उत्पत्तिकर्ता है और हमारे शरीर की रचना भी वही करता है। उन्होंने कहा कि हमें अपने उत्पत्तिकर्ता का ध्यान अवश्य करना चाहिए, जिससे हम अपने दुर्गुणों, दुराचारों, दुर्व्यवहारों और दुष्प्रवृत्तियों को दूर कर सकें। हमें ईश्वर का ध्यान करते समय अपनी समस्त इंद्रियों का नियंत्रित कर शक्ति के अनुसार प्रार्थना करनी चाहिए।
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इस अवसर पर शिव नारायण, संत कुमार, मीनाक्षी के अलावा संगीत विभाग की छात्राओं हिमांशी, श्वेता सक्सेना, आकृति श्रीवास्तव, साधना, सपना, संध्या, निशा शर्मा, अंशिका गुप्ता आदि ने भजन प्रस्तुत किए। आयोजन में प्रबंधक अमितेश अमित, रामआसरे मिश्र, शरद वाजपेयी, हृदय नारायण मिश्र, राम निवास अग्निहोत्री, प्राचार्य डॉ. कनकरानी, कैलाश सक्सेना, सुजीत कश्यप, अंशुल सैनी, विकास मिश्र, राधारमन मिश्र, दीक्षा गोयल, चित्रांशी कश्यप, डॉ. विजय गुप्ता आदि मौजूद रहे।
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