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प्रभु नाम भजने से पापी भी तर जाते हैं: नैष्ठिक
Updated Sun, 03 Dec 2017 11:37 PM IST
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आर्य महिला महाविद्यालय में आर्य समाज के वार्षिकोत्सव
- फोटो : अमर उजाला
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शाहजहांपुर। आर्य महिला महाविद्यालय में चल रहे आर्य समाज और आर्य स्त्री समाज के तीन दिवसीय वार्षिकोत्सव का रविवार को समापन हो गया।
अंतिम सत्र में स्वामी विजय देव नैष्ठिक ने प्रवचन करते हुए कहा कि कलियुग में भगवत भजन नाम की महिमा है। इस युग में प्रभु का नाम जपते हुए मृत्युलोक छोड़ने वाले पापी भी पुण्यलोक में जाते हैं। उन्होंने बताया कि नारद ने भक्ति के दो सहज मंत्र बताए हैं, जिसमें पहला श्रवण और दूसरा संकीर्तन करना है। प्रभु नाम श्रवण करना सबसे आसान मार्ग है। उन्होंने कहा कि हमें हमेशा दीन-दुखियों की मदद करनी चाहिए और संतों का साथ करना चाहिए। सद्कर्म ही हमारे साथ जाएंगे। दान जीवन की वह संचित निधि है, जो लोक-परलोक दोनों में फलित होती है।
स्वामी नैष्ठिक ने कहा कि भगवान का भजन कभी निरर्थक नहीं जाता। यदि देशवासी ऋषियों द्वारा बताए वैदिक मार्ग का अनुसरण करते हैं, तो देश में कोई दुराचार, पापाचार नहीं होगा। इससे पूर्व कृपाल सिंह आर्य, शिव नारायण, संत कुमार आदि ने भजन प्रस्तुत किए। महाविद्यालय छात्राओं ने भी भजन प्रस्तुत कर वाहवाही लूटी। समापन पर प्रबंधक अमितेश अमित ने शिक्षिका डॉ. नमिता किशोर, मीनाक्षी समेत सभी प्रतिभागी छात्राओं को पुरस्कृत किया।
इससे पूर्व सुबह के सत्र में यज्ञ हुआ, जिसके राम निवास अग्निहोत्री, संतोष दीक्षित, नरेंद्र मिड्ढा सपत्नीक मुख्य यजमान रहे। आयोजन में राम आसरे मिश्र, शरद वाजपेयी, कैलाश सक्सेना, डॉ. गुलशन रस्तोगी, अर्चना मिश्रा, जितेंद्र मिड्ढा, चंद्रकांता सिंह, त्रिलोकी नाथ पांडेय, श्रीनिवास मिश्रा, मधु वाजपेयी, नमिता किशोर, डॉ. मृदुल शुक्ला, डॉ. विजय गुप्ता, दीक्षा गोयल आदि का योगदान रहा।
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अंतिम सत्र में स्वामी विजय देव नैष्ठिक ने प्रवचन करते हुए कहा कि कलियुग में भगवत भजन नाम की महिमा है। इस युग में प्रभु का नाम जपते हुए मृत्युलोक छोड़ने वाले पापी भी पुण्यलोक में जाते हैं। उन्होंने बताया कि नारद ने भक्ति के दो सहज मंत्र बताए हैं, जिसमें पहला श्रवण और दूसरा संकीर्तन करना है। प्रभु नाम श्रवण करना सबसे आसान मार्ग है। उन्होंने कहा कि हमें हमेशा दीन-दुखियों की मदद करनी चाहिए और संतों का साथ करना चाहिए। सद्कर्म ही हमारे साथ जाएंगे। दान जीवन की वह संचित निधि है, जो लोक-परलोक दोनों में फलित होती है।
स्वामी नैष्ठिक ने कहा कि भगवान का भजन कभी निरर्थक नहीं जाता। यदि देशवासी ऋषियों द्वारा बताए वैदिक मार्ग का अनुसरण करते हैं, तो देश में कोई दुराचार, पापाचार नहीं होगा। इससे पूर्व कृपाल सिंह आर्य, शिव नारायण, संत कुमार आदि ने भजन प्रस्तुत किए। महाविद्यालय छात्राओं ने भी भजन प्रस्तुत कर वाहवाही लूटी। समापन पर प्रबंधक अमितेश अमित ने शिक्षिका डॉ. नमिता किशोर, मीनाक्षी समेत सभी प्रतिभागी छात्राओं को पुरस्कृत किया।
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इससे पूर्व सुबह के सत्र में यज्ञ हुआ, जिसके राम निवास अग्निहोत्री, संतोष दीक्षित, नरेंद्र मिड्ढा सपत्नीक मुख्य यजमान रहे। आयोजन में राम आसरे मिश्र, शरद वाजपेयी, कैलाश सक्सेना, डॉ. गुलशन रस्तोगी, अर्चना मिश्रा, जितेंद्र मिड्ढा, चंद्रकांता सिंह, त्रिलोकी नाथ पांडेय, श्रीनिवास मिश्रा, मधु वाजपेयी, नमिता किशोर, डॉ. मृदुल शुक्ला, डॉ. विजय गुप्ता, दीक्षा गोयल आदि का योगदान रहा।
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