फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Shahjahanpur News ›   बाढ़ प्रभावित कटरी क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल

बाढ़ प्रभावित कटरी क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल

Tue, 22 Aug 2017 06:47 PM IST
Updated Tue, 22 Aug 2017 06:47 PM IST
विज्ञापन
बाढ़ प्रभावित कटरी क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल
मिर्जापुर/परौर (शाहजहांपुर) बाढ़ प्रभावित कटरी क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हैं। आलम यह है कि मिर्जापुर क्षेत्र की तीन पीएचसी स्टॉफ के अभाव में बंद है। बाढ़ का प्रकोप कम होने के बाद इलाके में बीमारियां फैलने लगी हैं। खांसी, बुखार, जुकाम और त्वचा रोगियाें की संख्या लगातार बढ़ रही है। इलाज न मिल पाने से मरीज परेशान है। उधर, परौर पीएचसी पर सात साल से डॉक्टर नहीं है। फार्मासिस्ट और चतुर्थ श्रेणी कर्मी ही मरीजों को दवा दे रहे हैं। इन दिनों क्षेत्र के कई गांवों में बुखार फैला है लेकिन अस्पताल में डॉक्टर न होने से रोगियों का इलाज नहीं हो पा रहा है। हैरत की बात तो यह है कि गंगा, रामगंगा, बहगुल और सोत नदियों से घिरे इस क्षेत्र में अक्सर संक्रामक रोग दस्तक देते रहते हैं। ऐसे में बाढ़ से घिरे लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं कैसे मिलेंगी इस ओर किसी का ध्यान नहीं हैं। पेश है क्षेत्र के कुछ अस्पतालों का आंखों देखा हाल-
विज्ञापन

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मिर्जापुर
यह केंद्र करीब दो साल से बंद है। ग्रामीणों के अनुसार यहां दो साल से स्टाफ नहीं की है। इधर, पृथ्वीपुर-ढाई और शेरपुर कुर्रिया के स्वास्थ्य केंद्र भी डॉक्टर और स्टाफ के अभाव में बंद पड़े हैं। हैरत की बात तो यह है कि इस क्षेत्र की आबादी करीब 20 हजार की है लेकिन पीएचसी बंद होने से मरीजों को सीएचसी पर जाना पड़ता हैं।
विज्ञापन

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जरीनपुर
क्षेत्र में खांसी, बुखार, जुकाम और खाज खुजली के रोगियाें की संख्या बढ़ रही है। मंगलवार को ओपीडी में रोगी देख रहे डॉ. सुमित कश्यप ने बताया कि प्रतिदिन औसतन 350 से 400 मरीज आ रहे हैं। इनमें अधिकांश मरीज बाढ़ग्रस्त गांवों के हैं। इनमें ज्यादातर बुखार, जुकाम, खांसी और त्वचा रोगों से पीड़ित होते हैं। यहां स्टाफ कम है। एलोपैथी के डॉ. नवीन भारती तैनात हैं और संविदा पर आयुष डॉक्टर शनीष सक्सेना के अलावा स्कूल हेल्थ प्रोग्राम के दंत चिकित्सक सुमित कश्यप तैनात हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

नहीं लगा ऐंटी रैबीज इंजेक्शन
मिर्जापुर सीएचसी के स्टाफ के समय से पहले चले जाने से गांव सरैया निवासी ओमपाल की एक वर्षीय पुत्री परवीना और इसी गांव के रामकिशोर के पांच वर्षीय पुत्र अंकुल को एंटी रैबीज वैक्सीन नहीं लग सकी। इन दोनों को बंदर ने काट लिया था। गुर्दे के दर्द से छटपटा रहीं कलान की विमला पत्नी किशनलाल शर्मा को भी बिना दवा के ही लौटना पड़ा।
पीएचसी पर नहीं हैं बच्चों की दवाएं
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र परौर पर बच्चों की दवाइयां नहीं हैं। डॉक्टर की तैनाती नहीं होने से मरीजों को फार्मासिस्ट और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी दवाएं देकर टरका देता है। गंभीर मरीजों को जिला मुख्यालय रेफर कर दिया जाता है। मंगलवार को बुखार की चपेट में आई रेखा, उषा देवी, रेखा, रामलली, नरसिंह आदि मरीज अस्पताल पहुंचे। इनमें नरसिंह को भर्ती कर ड्रिप चढ़ाई गई। अन्य मरीजों को दवा देकर घर भेज दिया गया। फार्मसिस्ट जगजीवनराम ने बताया कि प्रतिदिन करीब 80 मरीज बुखार, खांसी, जुखाम के आ रहे है। यहां बच्चों की दवाएं नहीं है। मालूम हो कि वर्ष 2010 में डॉ. वीपी सिंह के सेवानिवृत्त होने के बाद से कोई डॉक्टर यहां तैनात नहीं हुआ है। प्रसव के लिए गर्भवती महिलाओं को जिला मुख्यालय जाना पड़ता है।
एंबुलेंस और जनरेटर भी गायब
किसी समय सीएचसी पर जनरेटर था और एंबुलेंस भी खड़ी रहती थी लेकिन कई माह से न तो एंबुलेंस यहां दिख रही है और न ही जनरेटर। पूछने पर फार्मासिस्ट ने बताया कि उसे इसकी जानकारी नहीं है।


जिन स्वास्थ्य केंद्रों पर स्टाफ की कमी है, वहां व्यवस्था करने के प्रयास किए जा रहे हैं। डॉक्टरों के आने के बाद ही तैनाती हो सकेगी। यदि कहीं अधिक दिक्कत आ रही है तो जिला मुख्यालय से टीम भेज कर कैंप कराया जा रहा है।
- डॉ. आरपी रावत, सीएमओ
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed