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लाउड स्पीकर अनुमति को जल्द करें आवेदन, वरना होगी जेल और जुर्माना
Updated Thu, 11 Jan 2018 06:53 PM IST
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लाउड स्पीकर अनुमति को जल्द करें आवेदन, वरना जेल और जुर्माना
शासन ने नियत की 15 जनवरी अंतिम तिथि, बाद मेें जारी होंगे नोटिस
धार्मिक स्थलों के थाना वार सर्वे का काम पूरा, चिन्हित हुए लाउडस्पीकर
अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर।
मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा, दरगाह आदि धार्मिक स्थलों पर लाउड स्पीकर के प्रयोग को वहां की प्रबंध समितियों के संचालकों को नियत प्रारूप पर आवेदन करने के लिए शासन ने 15 जनवरी तक मोहलत दी है। इसी अवधि में द्वितीय शनिवार और रविवार को राजपत्रित अवकाश होने के कारण आवेदन को सिर्फ दो कार्य दिवस शेष बचे हैं। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार उन सभी धार्मिक स्थलों का पुलिस स्तर से थाना वार सर्वे करा लिया गया है, जहां ध्वनि विस्तारक यंत्रों का इस्तेमाल हो रहा है। नियत अवधि तक आवेदन प्राप्त नहीं होने की दशा में धर्म स्थलों की प्रबंध समितियों को नोटिस जारी करके सजा दिलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
भारत सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की ओर से 14 फरवरी 2000 को जारी अधिसूचना में ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम विस्तार से अधिसूचित किए गए हैं। अधिसूचना के नियम-5 के अंतर्गत प्राविधान किया गया है कि लाउड स्पीकर अथवा लोक संबोधन प्रणाली का प्रयोग केवल तभी किया जाएगा, जब सक्षम प्राधिकारी से इसकी लिखित अनुज्ञा प्राप्त की गई हो। खास यह है कि सक्षम प्राधिकारी की लिखित अनुज्ञा रात दस बजे से सुबह छह बजे तक की अवधि के मान्य इसके विपरीत शहर से लेकर जिले के अन्य कसबों-गांवों के अधिकांश धर्म स्थलों पर बगैर अनुमति के लाउड स्पीकर इस्तेमाल किए जा रहे हैं।
हालांकि, दुर्गा जागरण, साईं संध्या, सिख गुरुओं के प्रकाश पर्व, सालाना उर्स आदि के मौकों पर संबंधितों समेत धर्म स्थलों की प्रबंध समितियों द्वारा इसके लिए अनुमति लेने की प्रक्रिया पूरी की जाती है, लेकिन भजन-कीर्तन, अजान आदि की आवाज चारों दिशाओं में पहुंचाने के लिए तमाम मंदिरों-मस्जिदों के शिखरों पर कई लाउड स्पीकर स्थायी रूप से लगा दिए गए हैं। यही नहीं, अधिसूचना में रात दस बजे के बाद ध्वनि उत्पन्न करने वाले कोई भी उपकरण (लाउड स्पीकर, डीजे, अन्य लोक संबोधन प्रणाली) रात में दस बजे के बाद बंद कमरे में बजाने के निर्देश हैं, लेकिन इस व्यवस्था का भी सरासर उल्लंघन हो रहा है। इसी प्रवृत्ति पर रोक लगाने के लिए शासन ने अधिसूचना का संदर्भ लेते हुए धर्म स्थलों पर शोर-शराबा नियंत्रित करने की पहल की है।
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एक लाख रुपये अर्थदंड समेत पांच वर्ष की होगी जेल
बगैर अनुमति लाउडस्पीकर बजते पाए जाने पर ध्वनि नियम-2000 की संशोधित नियमावली के अनुसार संबंधितों को पर्यावरण संरक्षण अधिनियम की सुसंगत धाराओं के तहत पांच वर्ष का कारावास अथवा एक लाख रुपये जुर्माना भुगतना पड़ेगा। विशेष परिस्थितियों में दोनों सजाएं एक साथ लागू की जाएंगी। यही नहीं, उल्लंघन के प्रत्येक दिवस के लिए पांच हजार रुपये प्रतिदिन अर्थदंड देना होगा।
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फोटो 18 में।
लाउड स्पीकर की अनुमति लेने के लिए अभी कई दिन शेष हैं। इसे देखते अभी नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई है। शासन के निर्देशानुसार 15 जनवरी के बाद संबंधितों को नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। यदि शासन स्तर से आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाई जाती है तो नोटिस भी नियत तिथि पूरे होने के बाद जारी होंगे।
-जितेंद्र कुमार शर्मा, एडीएम प्रशासन
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शासन ने नियत की 15 जनवरी अंतिम तिथि, बाद मेें जारी होंगे नोटिस
धार्मिक स्थलों के थाना वार सर्वे का काम पूरा, चिन्हित हुए लाउडस्पीकर
अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर।
मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा, दरगाह आदि धार्मिक स्थलों पर लाउड स्पीकर के प्रयोग को वहां की प्रबंध समितियों के संचालकों को नियत प्रारूप पर आवेदन करने के लिए शासन ने 15 जनवरी तक मोहलत दी है। इसी अवधि में द्वितीय शनिवार और रविवार को राजपत्रित अवकाश होने के कारण आवेदन को सिर्फ दो कार्य दिवस शेष बचे हैं। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार उन सभी धार्मिक स्थलों का पुलिस स्तर से थाना वार सर्वे करा लिया गया है, जहां ध्वनि विस्तारक यंत्रों का इस्तेमाल हो रहा है। नियत अवधि तक आवेदन प्राप्त नहीं होने की दशा में धर्म स्थलों की प्रबंध समितियों को नोटिस जारी करके सजा दिलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
भारत सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की ओर से 14 फरवरी 2000 को जारी अधिसूचना में ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम विस्तार से अधिसूचित किए गए हैं। अधिसूचना के नियम-5 के अंतर्गत प्राविधान किया गया है कि लाउड स्पीकर अथवा लोक संबोधन प्रणाली का प्रयोग केवल तभी किया जाएगा, जब सक्षम प्राधिकारी से इसकी लिखित अनुज्ञा प्राप्त की गई हो। खास यह है कि सक्षम प्राधिकारी की लिखित अनुज्ञा रात दस बजे से सुबह छह बजे तक की अवधि के मान्य इसके विपरीत शहर से लेकर जिले के अन्य कसबों-गांवों के अधिकांश धर्म स्थलों पर बगैर अनुमति के लाउड स्पीकर इस्तेमाल किए जा रहे हैं।
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हालांकि, दुर्गा जागरण, साईं संध्या, सिख गुरुओं के प्रकाश पर्व, सालाना उर्स आदि के मौकों पर संबंधितों समेत धर्म स्थलों की प्रबंध समितियों द्वारा इसके लिए अनुमति लेने की प्रक्रिया पूरी की जाती है, लेकिन भजन-कीर्तन, अजान आदि की आवाज चारों दिशाओं में पहुंचाने के लिए तमाम मंदिरों-मस्जिदों के शिखरों पर कई लाउड स्पीकर स्थायी रूप से लगा दिए गए हैं। यही नहीं, अधिसूचना में रात दस बजे के बाद ध्वनि उत्पन्न करने वाले कोई भी उपकरण (लाउड स्पीकर, डीजे, अन्य लोक संबोधन प्रणाली) रात में दस बजे के बाद बंद कमरे में बजाने के निर्देश हैं, लेकिन इस व्यवस्था का भी सरासर उल्लंघन हो रहा है। इसी प्रवृत्ति पर रोक लगाने के लिए शासन ने अधिसूचना का संदर्भ लेते हुए धर्म स्थलों पर शोर-शराबा नियंत्रित करने की पहल की है।
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एक लाख रुपये अर्थदंड समेत पांच वर्ष की होगी जेल
बगैर अनुमति लाउडस्पीकर बजते पाए जाने पर ध्वनि नियम-2000 की संशोधित नियमावली के अनुसार संबंधितों को पर्यावरण संरक्षण अधिनियम की सुसंगत धाराओं के तहत पांच वर्ष का कारावास अथवा एक लाख रुपये जुर्माना भुगतना पड़ेगा। विशेष परिस्थितियों में दोनों सजाएं एक साथ लागू की जाएंगी। यही नहीं, उल्लंघन के प्रत्येक दिवस के लिए पांच हजार रुपये प्रतिदिन अर्थदंड देना होगा।
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फोटो 18 में।
लाउड स्पीकर की अनुमति लेने के लिए अभी कई दिन शेष हैं। इसे देखते अभी नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई है। शासन के निर्देशानुसार 15 जनवरी के बाद संबंधितों को नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। यदि शासन स्तर से आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाई जाती है तो नोटिस भी नियत तिथि पूरे होने के बाद जारी होंगे।
-जितेंद्र कुमार शर्मा, एडीएम प्रशासन