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बगावत के बीच त्रिकोणीय मुकाबजे में जीते मनेंद्र गुप्ता
Updated Sat, 02 Dec 2017 10:02 AM IST
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शाहजहांपुर। नगर पालिका जलालाबाद सीट पर पार्टी में बगावत के बीच भाजपा के मनेंद्र गुप्ता त्रिकोणीय मुकाबले में 474 वोट से जीत दर्ज करने में कामयाब रहे। यहां सपा प्रत्याशी और निवर्तमान चेयरमैन संजय पाठक को 5033 वोट मिले। वह तीसरे नंबर पर रहे। सपा से बगावत कर निर्दलीय चुनाव लड़े शकील अहमद 5775 वोट पाकर दूसरे स्थान पर रहे। इसके अलावा कांग्रेस के सादिक अली खां को 365 और बसपा के आदर्श गुप्ता को 180 वोट ही मिले।
भाजपा ने जलालाबाद नगर पालिका अध्यक्ष पद से मनेंद्र गुप्ता को प्रत्याशी घोषित किया तो एक धड़े ने बगावत कर दी थी। विरोध में नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना के आवास का घेराव भी किया गया था। इसके बाद माना जा रहा था कि जलालाबाद में भाजपा की जीत आसान नहीं होगी। यहां मुकाबला भी टक्कर का और त्रिकोणीय रहा। सपा से बगावत कर निर्दलीय चुनाव लड़े शकील अहमद और सपा के संजय पाठक ने भाजपा को कड़ी टक्कर दी। बहुजन मुक्ति पार्टी से चुनाव लड़ने वाले अल्लाहनूर को 38, निर्दलीय प्रत्याशी दानिश को 71, जावेद खां को 442 और बृजकिशोर को कुल 67 वोट मिले। यहां 690 मतो को निरस्त कर दिया गया और 45 मतदाताओं ने नोटा का इस्तेमाल किया।
17 साल बाद भाजपा के खाते में आई जलालाबाद सीट
शाहजहांपुर। नगर पालिका जलालाबाद में अध्यक्ष पद पर 17 साल के बाद भाजपा प्रत्याशी ने जीत दर्ज की है। 1995 में भाजपा प्रत्याशी के रूप में संजय पाठक यहां से चेयरमैन चुने गए थे। 2000 में महिला सीट होने पर संजय पाठक ने अपनी पत्नी ममता पाठक को चुनाव लड़ाया। इस बार भी भाजपा का कब्जा बरकरार रहा। इसके बाद हुए चुनाव में परिस्थितियां बदलीं और फिर से भाजपा प्रत्याशी जलालाबाद नगर पालिका अध्यक्ष सीट पर काबिज नहीं हो सका। 17 साल के बाद एक बार फिर से मनेंद्र गुप्ता ने भाजपा प्रत्याशी के रूप में जीत दर्ज कर यहां भाजपा का परचम फहराया है।
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निर्दलीय शकील ने बिगाड़ा सपा का खेल
शाहजहांपुर। जलालाबाद नगर पालिका सीट पर संजय पाठक और उनके परिवार का लंबे समय तक कब्जा रहा है। भाजपा और बसपा समर्थित प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीतने के साथ वह निर्दलीय चुनाव भी जीत चुके हैं। इस बार संजय पाठक सपा का झंडा लेकर चुनाव मैदान में उतरे थे। वहीं टिकट न मिलने से नाराज सपा नेता शकील अहमद ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में ताल ठोंक दी। सपा के संजय पाठक का इससे खेल बिगड़ गया। शकील अहमद ने यहां सपा के संजय पाठक से ज्यादा 5775 वोट हासिल किए। वहीं सपा के संजय पाठक 5033 वोट हासिल करके तीसरे नंबर पर रहे। जलालाबाद में सपा से मुस्लिम वोट बैंक छिटक गया। इसका खामियाजा पार्टी को हार के रूप में भुगतना पड़ा।
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भाजपा ने जलालाबाद नगर पालिका अध्यक्ष पद से मनेंद्र गुप्ता को प्रत्याशी घोषित किया तो एक धड़े ने बगावत कर दी थी। विरोध में नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना के आवास का घेराव भी किया गया था। इसके बाद माना जा रहा था कि जलालाबाद में भाजपा की जीत आसान नहीं होगी। यहां मुकाबला भी टक्कर का और त्रिकोणीय रहा। सपा से बगावत कर निर्दलीय चुनाव लड़े शकील अहमद और सपा के संजय पाठक ने भाजपा को कड़ी टक्कर दी। बहुजन मुक्ति पार्टी से चुनाव लड़ने वाले अल्लाहनूर को 38, निर्दलीय प्रत्याशी दानिश को 71, जावेद खां को 442 और बृजकिशोर को कुल 67 वोट मिले। यहां 690 मतो को निरस्त कर दिया गया और 45 मतदाताओं ने नोटा का इस्तेमाल किया।
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17 साल बाद भाजपा के खाते में आई जलालाबाद सीट
शाहजहांपुर। नगर पालिका जलालाबाद में अध्यक्ष पद पर 17 साल के बाद भाजपा प्रत्याशी ने जीत दर्ज की है। 1995 में भाजपा प्रत्याशी के रूप में संजय पाठक यहां से चेयरमैन चुने गए थे। 2000 में महिला सीट होने पर संजय पाठक ने अपनी पत्नी ममता पाठक को चुनाव लड़ाया। इस बार भी भाजपा का कब्जा बरकरार रहा। इसके बाद हुए चुनाव में परिस्थितियां बदलीं और फिर से भाजपा प्रत्याशी जलालाबाद नगर पालिका अध्यक्ष सीट पर काबिज नहीं हो सका। 17 साल के बाद एक बार फिर से मनेंद्र गुप्ता ने भाजपा प्रत्याशी के रूप में जीत दर्ज कर यहां भाजपा का परचम फहराया है।
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निर्दलीय शकील ने बिगाड़ा सपा का खेल
शाहजहांपुर। जलालाबाद नगर पालिका सीट पर संजय पाठक और उनके परिवार का लंबे समय तक कब्जा रहा है। भाजपा और बसपा समर्थित प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीतने के साथ वह निर्दलीय चुनाव भी जीत चुके हैं। इस बार संजय पाठक सपा का झंडा लेकर चुनाव मैदान में उतरे थे। वहीं टिकट न मिलने से नाराज सपा नेता शकील अहमद ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में ताल ठोंक दी। सपा के संजय पाठक का इससे खेल बिगड़ गया। शकील अहमद ने यहां सपा के संजय पाठक से ज्यादा 5775 वोट हासिल किए। वहीं सपा के संजय पाठक 5033 वोट हासिल करके तीसरे नंबर पर रहे। जलालाबाद में सपा से मुस्लिम वोट बैंक छिटक गया। इसका खामियाजा पार्टी को हार के रूप में भुगतना पड़ा।