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ज्ञान वैराग्य नेत्र खुलने से होता है मानव कल्याण
Updated Tue, 06 Jun 2017 06:19 PM IST
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कुर्रिया कलां (शाहजहांपुर)। गांव के शिवमंदिर पर चल रही भागवत कथा में बुलंदशहर से आयीं भगवताचार्य मंशा भारती ने कहा कि ज्ञान और वैराग्य रूपी नेत्रों के खुलने के बाद मनुष्य का कल्याण निश्चित है।
उन्होंने कहा कि ज्ञान और वैराग्य रूपी नेत्रों के अभाव में ही धृतराष्ट्र जैसे लोग महाभारत युद्ध का कारण बने। निर्बल, असहाय और परेशान की मदद करना धर्म है। इसलिए इस धर्म का पालन सभी को करना चाहिए। यदि हम किसी को सुख पहुंचाने में सक्षम नही हैं, तो दुख देने के भी हकदार नहीं। कहा कि मनुष्य में वाणी का नही अपितु हृदय का व्यवहार होना चाहिए। आरती और प्रसाद वितरण के साथ कथा को विश्राम दिया गया। कथा श्रवण में छत्रपा मिश्र, ओमप्रकाश, पांडे सतीश, बृजेश मिश्र, अचल पांडे आदि मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि ज्ञान और वैराग्य रूपी नेत्रों के अभाव में ही धृतराष्ट्र जैसे लोग महाभारत युद्ध का कारण बने। निर्बल, असहाय और परेशान की मदद करना धर्म है। इसलिए इस धर्म का पालन सभी को करना चाहिए। यदि हम किसी को सुख पहुंचाने में सक्षम नही हैं, तो दुख देने के भी हकदार नहीं। कहा कि मनुष्य में वाणी का नही अपितु हृदय का व्यवहार होना चाहिए। आरती और प्रसाद वितरण के साथ कथा को विश्राम दिया गया। कथा श्रवण में छत्रपा मिश्र, ओमप्रकाश, पांडे सतीश, बृजेश मिश्र, अचल पांडे आदि मौजूद रहे।
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