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मेडिकल कमीशन बिल के विरोध में आईएमए का प्रदर्शन
Updated Sun, 29 Jul 2018 12:10 AM IST
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फोटो-05,06
मेडिकल कमीशन बिल के विरोध में सड़क पर उतरे डॉक्टर
कलक्ट्रेट पर प्रदर्शन कर आईएमए ने एसडीएम को सौंपा ज्ञापन, देश व्यापी आंदोलन की चेतावनी
ओपीडी बंद कर धिक्कार दिवस के रूप में रहे हड़ताल पर
अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर।
नेशनल मेडिकल कमीशन बिल के विरोध में शनिवार को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन से जुड़े डॉक्टर हड़ताल पर रहे। सुबह छह बजे से धिक्कार दिवस के रूप में शुरू हुई हड़ताल रात आठ बजे तक जारी रही। इस दौरान इन चिकित्सकों के यहां से मायूस हुए मरीजों ने मजबूरन जिला अस्पताल पहुंचकर उपचार लिया। वहीं एसोसिएशन अध्यक्ष डॉ. सिद्धार्थ बहल के नेतृत्व में डॉक्टर कलक्ट्रेट पहुंचे। यहां डॉक्टरों ने नारेबाजी कर प्रदर्शन किया और बिल के विरोध में एसडीएम सदर को ज्ञापन सौंपा।
इस दौरान एसोसिएशन अध्यक्ष डॉ. सिद्धार्थ बहल और सचिव डॉ. रूपेश सेठ ने कहा कि नेशनल मेडिकल कमीशन बिल पूर्णत: अलोकतांत्रिक, गरीबों के विरुद्ध, संघीय विरोधी और अमीरों को रास आने वाला तैयार किया गया है। बिल के माध्यम से समस्त अधिकारों को केंद्रीयकृत करने का भारत सरकार का इरादा स्पष्ट दिखाई देता है। लोकतांत्रिक तरीके से चुने हुए एमसीआई को समाप्त कर राष्ट्र चिकित्सा आयोग का गठन पूर्णतया अलोकतांत्रिक है, इससे राज्य चिकित्सा का प्रतिनिधित्व हाशिए पर आ गया है।
चिकित्सक द्वय ने कहा कि यदि मनमानी करते हुए यह बिल पास होता है, तो आईएमए देशव्यापी विरोध प्रदर्शन के लिए बाध्य होगी और समस्त चिकित्सक पूरे देश में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे।
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इस अवसर पर डॉ. बृजेंद्र सक्सेना, डॉ. संजीव कनौजिया, डॉ. विकास टंडन, डॉ. पीके अग्रवाल, डॉ. राकेश मेहरोत्रा, डॉ. नीना सिंह, डॉ. हिकमत उल्ला सिद्दीकी, डॉ. पीएन रस्तोगी, डॉ. मुनीश चंद्रा, डॉ. जेएम सक्सेना, डॉ. यूडी कपूर, डॉ. आनंद अग्रवाल, डॉ. परविंदर सिंह मौजूद थे।
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बोले मरीज---
...अब तो जिला अस्पताल का ही भरोसा
फोटो-30,कनका देवी
अल्हागंज निवासी कनका देवी ने बताया कि उन्हें कई दिनों से खांसी, जुकाम, बुखार की शिकायत है। बीमार पड़ने पर डॉक्टर गेरा की दवा ही उन्हें फायदा करती है। शनिवार को बीमार होने पर वह डॉ. गेरा को दिखाने आई तो यहां मना कर दिया गया, बता रहे हैं हड़ताल है। मजबूरन उसे अब जिला अस्पताल जाना पड़ेगा।
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फोटो-31,ज्ञानेंद्र मिश्रा
लोधीपुर निवासी ज्ञानेंद्र मिश्रा ने बताया कि उन्हें कई दिन से बुखार आ रहा है, मेडिकल स्टोर से दवा ली, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। शनिवार को सोचा किसी अच्छे प्राइवेट डॉक्टर को दिखा लूं, लेकिन यहां तो डॉक्टर हड़ताल पर हैं। मजबूरन उसे जिला अस्पताल आना पड़ा। अब यहां से ली गई दवा खाने के बाद फायदा पता चलेगा।
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जिला अस्पताल में देखे गए 800 मरीज
नर्सिंग होम बंद होने की वजह से शनिवार को वह मरीज भी जिला अस्पताल पहुंचे, जो केवल प्राइवेट डॉक्टर से की दवा लेना उचित समझते हैं। शनिवार को रोजाना की अपेक्षा जिला अस्पताल में भीड़ बढ़ने की उम्मीद थी, लेकिन बरसात के कारण मरीजों की संख्या बहुत ज्यादा नहीं बढ़ी। शनिवार को ओपीडी में 800 मरीज देखे गए।
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प्राइवेट डॉक्टरों की हड़ताल को देखते हुए, जिला अस्पताल में ओपीडी करने वाले डॉक्टरों को अलर्ट कर दिया गया था, उन्हें बता दिया गया था कि सभी अपने-अपने कक्ष में रहे, ताकि आने वाले मरीजों को किसी प्रकार की दिक्कतें न हों। हालांकि सुबह बरसात होने की वजह से मरीज उतने नहीं आए, जितने आने की उम्मीद थी।
डॉ. एमपी गंगवार, सीएमएस
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मेडिकल कमीशन बिल के विरोध में सड़क पर उतरे डॉक्टर
कलक्ट्रेट पर प्रदर्शन कर आईएमए ने एसडीएम को सौंपा ज्ञापन, देश व्यापी आंदोलन की चेतावनी
ओपीडी बंद कर धिक्कार दिवस के रूप में रहे हड़ताल पर
अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर।
नेशनल मेडिकल कमीशन बिल के विरोध में शनिवार को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन से जुड़े डॉक्टर हड़ताल पर रहे। सुबह छह बजे से धिक्कार दिवस के रूप में शुरू हुई हड़ताल रात आठ बजे तक जारी रही। इस दौरान इन चिकित्सकों के यहां से मायूस हुए मरीजों ने मजबूरन जिला अस्पताल पहुंचकर उपचार लिया। वहीं एसोसिएशन अध्यक्ष डॉ. सिद्धार्थ बहल के नेतृत्व में डॉक्टर कलक्ट्रेट पहुंचे। यहां डॉक्टरों ने नारेबाजी कर प्रदर्शन किया और बिल के विरोध में एसडीएम सदर को ज्ञापन सौंपा।
इस दौरान एसोसिएशन अध्यक्ष डॉ. सिद्धार्थ बहल और सचिव डॉ. रूपेश सेठ ने कहा कि नेशनल मेडिकल कमीशन बिल पूर्णत: अलोकतांत्रिक, गरीबों के विरुद्ध, संघीय विरोधी और अमीरों को रास आने वाला तैयार किया गया है। बिल के माध्यम से समस्त अधिकारों को केंद्रीयकृत करने का भारत सरकार का इरादा स्पष्ट दिखाई देता है। लोकतांत्रिक तरीके से चुने हुए एमसीआई को समाप्त कर राष्ट्र चिकित्सा आयोग का गठन पूर्णतया अलोकतांत्रिक है, इससे राज्य चिकित्सा का प्रतिनिधित्व हाशिए पर आ गया है।
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चिकित्सक द्वय ने कहा कि यदि मनमानी करते हुए यह बिल पास होता है, तो आईएमए देशव्यापी विरोध प्रदर्शन के लिए बाध्य होगी और समस्त चिकित्सक पूरे देश में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे।
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इस अवसर पर डॉ. बृजेंद्र सक्सेना, डॉ. संजीव कनौजिया, डॉ. विकास टंडन, डॉ. पीके अग्रवाल, डॉ. राकेश मेहरोत्रा, डॉ. नीना सिंह, डॉ. हिकमत उल्ला सिद्दीकी, डॉ. पीएन रस्तोगी, डॉ. मुनीश चंद्रा, डॉ. जेएम सक्सेना, डॉ. यूडी कपूर, डॉ. आनंद अग्रवाल, डॉ. परविंदर सिंह मौजूद थे।
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बोले मरीज---
...अब तो जिला अस्पताल का ही भरोसा
फोटो-30,कनका देवी
अल्हागंज निवासी कनका देवी ने बताया कि उन्हें कई दिनों से खांसी, जुकाम, बुखार की शिकायत है। बीमार पड़ने पर डॉक्टर गेरा की दवा ही उन्हें फायदा करती है। शनिवार को बीमार होने पर वह डॉ. गेरा को दिखाने आई तो यहां मना कर दिया गया, बता रहे हैं हड़ताल है। मजबूरन उसे अब जिला अस्पताल जाना पड़ेगा।
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फोटो-31,ज्ञानेंद्र मिश्रा
लोधीपुर निवासी ज्ञानेंद्र मिश्रा ने बताया कि उन्हें कई दिन से बुखार आ रहा है, मेडिकल स्टोर से दवा ली, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। शनिवार को सोचा किसी अच्छे प्राइवेट डॉक्टर को दिखा लूं, लेकिन यहां तो डॉक्टर हड़ताल पर हैं। मजबूरन उसे जिला अस्पताल आना पड़ा। अब यहां से ली गई दवा खाने के बाद फायदा पता चलेगा।
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जिला अस्पताल में देखे गए 800 मरीज
नर्सिंग होम बंद होने की वजह से शनिवार को वह मरीज भी जिला अस्पताल पहुंचे, जो केवल प्राइवेट डॉक्टर से की दवा लेना उचित समझते हैं। शनिवार को रोजाना की अपेक्षा जिला अस्पताल में भीड़ बढ़ने की उम्मीद थी, लेकिन बरसात के कारण मरीजों की संख्या बहुत ज्यादा नहीं बढ़ी। शनिवार को ओपीडी में 800 मरीज देखे गए।
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प्राइवेट डॉक्टरों की हड़ताल को देखते हुए, जिला अस्पताल में ओपीडी करने वाले डॉक्टरों को अलर्ट कर दिया गया था, उन्हें बता दिया गया था कि सभी अपने-अपने कक्ष में रहे, ताकि आने वाले मरीजों को किसी प्रकार की दिक्कतें न हों। हालांकि सुबह बरसात होने की वजह से मरीज उतने नहीं आए, जितने आने की उम्मीद थी।
डॉ. एमपी गंगवार, सीएमएस