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फाइल नंबर एक से भेजी गई खबर की संशोधित फाइल--
Updated Wed, 21 Feb 2018 10:00 AM IST
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फाइल नंबर एक से भेजी गई खबर की संशोधित फाइल--
पिता और तीन पुत्रों को उम्रकैद
तिलहर के गोपालपुर नगरिया में वर्ष 2005 में राजपाल की कर दी गई थी हत्या
ताश के खेल के विवाद में दिन दहाड़े दिया गया था घटना को अंजाम
पंचम अपर सत्र न्यायाधीश ने 13-13 हजार रुपये के जुर्माने से भी किया दंडित
अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर। तिलहर क्षेत्र के गांव गोपालपुर नगरिया में वर्ष 2005 में दिनदहाड़े हुई हत्या और हत्या के प्रयास के मामले में पिता और उसके तीन पुत्रों को पंचम अपर सत्र न्यायाधीश क्षितिज कुमार श्रीवास्तव ने आरोप सिद्ध होने पर आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 13-13 हजार रुपये के जुर्माने की सजा से भी दंडित किया है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार वादी मेवाराम के बेटे राजपाल और गांव के ही अजुद्धी के बेटे वीरेंद्र से दो नवंबर 2005 को ताश के पत्तों के खेल में कहासुनी हो गई थी। इसी बात पर वीरेंद्र रंजिश मान गया। अगले दिन तीन नवंबर 2005 को दिन के दस बजे गांव के अजुद्धी हाथ में तमंचा लिए अपने पुत्रों कालीचरन, वीरेंद्र, और जितेंद्र के साथ मेवाराम के घर के सामने आ गए। कालीचरन के हाथ में नाजायज बंदूक और वीरेंद्र के हाथ में अपने पिता की दोनाली लाइसेंसी बंदूक, जितेंद्र के हाथ में तमंचा था। इन लोगों ने मेवाराम के घर के सामने पहुंचकर ललकारते हुए फायरिंग शुरू कर दी। वीरेंद्र के हाथ में थमी बंदूक से निकली गोली राजपाल के पेट में लगी। इससे उसकी मौत हो गई। कालीचरन की बंदूक से हुए फायर से गांव का रामवीर घायल हो गया। फायर की आवाज सुनकर आसपास के लोग आ गए और हमलावरों को ललकारा तो वह लोग हवा में असलाह लहराते हुए यह कहकर भाग गए कि जो भी सामने आया तो गोली मार देंगे। मेवाराम की तहरीर के आधार पर पुलिस ने अजुद्धी और उसके तीन पुत्रों कालीचरन, वीरेंद्र, जितेंद्र के खिलाफ धारा 302, 307 के तहत रिपोर्ट दर्ज की। पुलिस ने नौ नवंबर 2005 को आरोपी कालीचरन से बंदूक, जितेंद्र से 315 बोर तमंचा बरामद कर लिया। 12 नवंबर को अजुद्धी से बिना लाइसेंसी बंदूक भी बरामद कर ली। कोर्ट में मुकदमा चलने के दौरान सरकारी वकील अमित वर्मा की ओर से पेश किए गए गवाहों के बयान सुनने और मामले के तथ्यों को दृष्टिगत रखते हुए अपर सत्र न्यायाधीश ने आरोपी अजुद्धी, कालीचरन, वीरेंद्र, जितेंद्र को हत्या और हत्या के प्रयास करने का दोषी पाते हुए उन्हें आजीवन कारावास की सजा और 13-13 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। इसके साथ ही अजुद्धी, जितेंद्र, कालीचरन को आर्म्स एक्ट के तहत दोषी पाते हुए उन्हें तीन-तीन वर्ष के कारावास व तीन-तीन हजार रुपये जुर्माने की सजा अलग से सुनाई।
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पिता और तीन पुत्रों को उम्रकैद
तिलहर के गोपालपुर नगरिया में वर्ष 2005 में राजपाल की कर दी गई थी हत्या
ताश के खेल के विवाद में दिन दहाड़े दिया गया था घटना को अंजाम
पंचम अपर सत्र न्यायाधीश ने 13-13 हजार रुपये के जुर्माने से भी किया दंडित
अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर। तिलहर क्षेत्र के गांव गोपालपुर नगरिया में वर्ष 2005 में दिनदहाड़े हुई हत्या और हत्या के प्रयास के मामले में पिता और उसके तीन पुत्रों को पंचम अपर सत्र न्यायाधीश क्षितिज कुमार श्रीवास्तव ने आरोप सिद्ध होने पर आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 13-13 हजार रुपये के जुर्माने की सजा से भी दंडित किया है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार वादी मेवाराम के बेटे राजपाल और गांव के ही अजुद्धी के बेटे वीरेंद्र से दो नवंबर 2005 को ताश के पत्तों के खेल में कहासुनी हो गई थी। इसी बात पर वीरेंद्र रंजिश मान गया। अगले दिन तीन नवंबर 2005 को दिन के दस बजे गांव के अजुद्धी हाथ में तमंचा लिए अपने पुत्रों कालीचरन, वीरेंद्र, और जितेंद्र के साथ मेवाराम के घर के सामने आ गए। कालीचरन के हाथ में नाजायज बंदूक और वीरेंद्र के हाथ में अपने पिता की दोनाली लाइसेंसी बंदूक, जितेंद्र के हाथ में तमंचा था। इन लोगों ने मेवाराम के घर के सामने पहुंचकर ललकारते हुए फायरिंग शुरू कर दी। वीरेंद्र के हाथ में थमी बंदूक से निकली गोली राजपाल के पेट में लगी। इससे उसकी मौत हो गई। कालीचरन की बंदूक से हुए फायर से गांव का रामवीर घायल हो गया। फायर की आवाज सुनकर आसपास के लोग आ गए और हमलावरों को ललकारा तो वह लोग हवा में असलाह लहराते हुए यह कहकर भाग गए कि जो भी सामने आया तो गोली मार देंगे। मेवाराम की तहरीर के आधार पर पुलिस ने अजुद्धी और उसके तीन पुत्रों कालीचरन, वीरेंद्र, जितेंद्र के खिलाफ धारा 302, 307 के तहत रिपोर्ट दर्ज की। पुलिस ने नौ नवंबर 2005 को आरोपी कालीचरन से बंदूक, जितेंद्र से 315 बोर तमंचा बरामद कर लिया। 12 नवंबर को अजुद्धी से बिना लाइसेंसी बंदूक भी बरामद कर ली। कोर्ट में मुकदमा चलने के दौरान सरकारी वकील अमित वर्मा की ओर से पेश किए गए गवाहों के बयान सुनने और मामले के तथ्यों को दृष्टिगत रखते हुए अपर सत्र न्यायाधीश ने आरोपी अजुद्धी, कालीचरन, वीरेंद्र, जितेंद्र को हत्या और हत्या के प्रयास करने का दोषी पाते हुए उन्हें आजीवन कारावास की सजा और 13-13 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। इसके साथ ही अजुद्धी, जितेंद्र, कालीचरन को आर्म्स एक्ट के तहत दोषी पाते हुए उन्हें तीन-तीन वर्ष के कारावास व तीन-तीन हजार रुपये जुर्माने की सजा अलग से सुनाई।
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