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अर्थदंड से बचने को समय से दाखिल करें आईटीआर
Updated Wed, 29 Aug 2018 12:14 AM IST
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अर्थदंड से बचने को समय से दाखिल करें आईटीआर
कर सलाहकार अक्षत सक्सेना ने करदाताओं को दिए उपयोगी सुझाव
फोटो- 11 में
अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर। आयकर रिटर्न दाखिल करने की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। सरकार द्वारा निर्धारित अंतिम तिथि 31 अगस्त तक आईटीआर नहीं भरने पर पांच हजार रुपये तक अर्थदंड देना पड़ सकता है।
इस संबंध में कर सलाहकार अक्षत सक्सेना ने बताया कि नौकरीपेशा, व्यापारी वर्ग और अन्य स्रोतों से आय करने वाले व्यक्ति 31 अगस्त तक प्रत्येक दशा में आयकर रिटर्न दाखिल करना सुनिश्चित कर लें, अन्यथा उन्हें एक हजार से पांच हजार रुपये तक का अर्थदंड भरना पड़ सकता है। अक्षत ने बताया कि आयकर विवरणी प्रारूप बेहद सरल और स्पष्ट है, कोई भी आयकर दाता अपनी आय के अनुसार विवरणी का चयन कर सकता है। उन्होंने बताया कि वेतनभोगियों को आटीआर-1, छोटे और मध्यम व्यापारियों को, जिनका धारा-44 एबी में टैक्स आडिट नहीं होगा, वह आईटीआर-4 का उपयोग कर सकते हैं।
कर सलाहकार अक्षत सक्सेना बताते हैं कि विवरणी भरते समय व्यापारियों को जीएसटीएन का उल्लेख भी करना चाहिए। आय की सही घोषणा करके आगे की कार्रवाई से बचा जा सकता है। उन्होंने कहा कि करदाताओं को अंतिम तिथि की प्रतीक्षा नहीं करनी चाहिए। असुविधा से बचने के लिए जितना जल्दी हो उतना पहले आईटीआर भर देना चाहिए।
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कर सलाहकार अक्षत सक्सेना ने करदाताओं को दिए उपयोगी सुझाव
फोटो- 11 में
अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर। आयकर रिटर्न दाखिल करने की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। सरकार द्वारा निर्धारित अंतिम तिथि 31 अगस्त तक आईटीआर नहीं भरने पर पांच हजार रुपये तक अर्थदंड देना पड़ सकता है।
इस संबंध में कर सलाहकार अक्षत सक्सेना ने बताया कि नौकरीपेशा, व्यापारी वर्ग और अन्य स्रोतों से आय करने वाले व्यक्ति 31 अगस्त तक प्रत्येक दशा में आयकर रिटर्न दाखिल करना सुनिश्चित कर लें, अन्यथा उन्हें एक हजार से पांच हजार रुपये तक का अर्थदंड भरना पड़ सकता है। अक्षत ने बताया कि आयकर विवरणी प्रारूप बेहद सरल और स्पष्ट है, कोई भी आयकर दाता अपनी आय के अनुसार विवरणी का चयन कर सकता है। उन्होंने बताया कि वेतनभोगियों को आटीआर-1, छोटे और मध्यम व्यापारियों को, जिनका धारा-44 एबी में टैक्स आडिट नहीं होगा, वह आईटीआर-4 का उपयोग कर सकते हैं।
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कर सलाहकार अक्षत सक्सेना बताते हैं कि विवरणी भरते समय व्यापारियों को जीएसटीएन का उल्लेख भी करना चाहिए। आय की सही घोषणा करके आगे की कार्रवाई से बचा जा सकता है। उन्होंने कहा कि करदाताओं को अंतिम तिथि की प्रतीक्षा नहीं करनी चाहिए। असुविधा से बचने के लिए जितना जल्दी हो उतना पहले आईटीआर भर देना चाहिए।
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