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Shahjahanpur News: 1200 फाइलें स्वीकृत, 454 लाख से स्थापित होंगी उद्योग इकाइयां
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शाहजहांपुर। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना में अप्रैल से अब तक करीब 1200 से ज्यादा फाइलें स्वीकृत करते हुए 1150 आवेदकों को 454 लाख रुपये का ऋण वितरण किया गया। इससे लोगों ने अपने कारोबार स्थापित किए हैं। योजना में आवेदन करने वाले करीब दो हजार लोगों के आवेदन त्रुटि होने के कारण निरस्त भी किए गए हैं।
मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से शुरू की गई थी। इसमें पांच लाख तक का गारंटी-मुक्त और ब्याज-मुक्त ऋण मिलता है। परियोजना लागत पर दस प्रतिशत का अनुदान भी दिया जाता है। योजना के तहत जनपद में 1700 आवेदकों को लाभ देने के उद्देश्य से लक्ष्य मिला था। इसके ऑनलाइन आवेदन शुरू किए गए।
योजना में करीब पांच हजार लोगों ने आवेदन किए थे। प्रारंभिक जांच में कमियां मिलने पर बड़ी संख्या में आवेदन निरस्त कर दिए गए। उपायुक्त उद्योग अनुराग यादव ने बताया कि अब तक करीब 1200 से ज्यादा फाइलें स्वीकृत हो चुकीं हैं। इसमें 1150 आवेदकों को 454 लाख रुपये का लाभ दिया गया है। बताया कि वित्तीय वर्ष तक लक्ष्य को पूरा कर लेंगे।
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भ्रम के चलते निरस्त हुईं फाइलें
योजना के तहत आवेदन करने के दौरान आवेदकों को पूरी बात नहीं पता चल सकी। लोगों को उम्मीद थी कि सीधे लाभ मिलेगा। नियम के अनुसार, आवेदकों को दस से 15 प्रतिशत पूंजी खुद लगानी थी। कुछ आवेदक पूरी तरह से योजना के धन पर आश्रित थे। ऐसे में उनकी फाइलों को निरस्त कर दिया गया।
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मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से शुरू की गई थी। इसमें पांच लाख तक का गारंटी-मुक्त और ब्याज-मुक्त ऋण मिलता है। परियोजना लागत पर दस प्रतिशत का अनुदान भी दिया जाता है। योजना के तहत जनपद में 1700 आवेदकों को लाभ देने के उद्देश्य से लक्ष्य मिला था। इसके ऑनलाइन आवेदन शुरू किए गए।
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योजना में करीब पांच हजार लोगों ने आवेदन किए थे। प्रारंभिक जांच में कमियां मिलने पर बड़ी संख्या में आवेदन निरस्त कर दिए गए। उपायुक्त उद्योग अनुराग यादव ने बताया कि अब तक करीब 1200 से ज्यादा फाइलें स्वीकृत हो चुकीं हैं। इसमें 1150 आवेदकों को 454 लाख रुपये का लाभ दिया गया है। बताया कि वित्तीय वर्ष तक लक्ष्य को पूरा कर लेंगे।
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भ्रम के चलते निरस्त हुईं फाइलें
योजना के तहत आवेदन करने के दौरान आवेदकों को पूरी बात नहीं पता चल सकी। लोगों को उम्मीद थी कि सीधे लाभ मिलेगा। नियम के अनुसार, आवेदकों को दस से 15 प्रतिशत पूंजी खुद लगानी थी। कुछ आवेदक पूरी तरह से योजना के धन पर आश्रित थे। ऐसे में उनकी फाइलों को निरस्त कर दिया गया।