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जिला पंचायत में भ्रष्टाचार के आरोपों की होगी जांच
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जिला पंचायत में भ्रष्टाचार के आरोपों की होगी जांच
संतकबीरनगर। दो साल पहले विधायकों की ओर से जिला पंचायत में व्याप्त भ्रष्टाचार की मुख्यमंत्री से की गई शिकायत की अब जांच होगी। शासन के निर्देश पर डीएम ने जांच की जिम्मेदारी सीडीओ को दी है। यदि सही से जांच हुई तो जिला पंचायत की गड़बड़ियां सामने आ जाएंगी।
खलीलाबाद के विधायक दिग्विजय नारायण उर्फ जय चौबे, मेंहदावल के विधायक राकेश सिंह बघेल और धनघटा के विधायक एवं उद्यान राज्यमंत्री श्रीराम चौहान ने वर्ष-2018 में जिला पंचायत के भ्रष्टाचार की शिकायत मुख्यमंत्री से की थी। माननीयों की शिकायत की थी कि संतकबीरनगर जनपद में जिला पंचायत में विगत कई वर्षों से अपर मुख्य अधिकारी की तैनाती नहीं है। सहायक अभियंता से ही अभियंता एवं अपर मुख्य अधिकारी का कार्य लिया जाता रहा। माननीयों ने पंचायती राजमंत्री से भी इस प्रकरण से अवगत कराया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। लिहाजा जिला पंचायत में भ्रष्टाचार चरम सीमा पर पहुंच गया। निर्माण कार्यों की गुणवता पर सवाल उठने लगे। ई- टेंडरिग प्रक्रिया का पालन ही नहीं हो रहा। उपलब्ध धन के सापेक्ष कई गुना निविदा कर दी गई। तीनों विधायकों ने सीएम से मांग की अपर मुख्य अधिकारी के संपूर्ण कार्यकाल के निर्माण कार्यों की जांच उच्च स्तरीय समिति से कराई जाए। सीधी भर्ती के अपर मुख्य अधिकारी की तैनाती करने का निर्देश दिए जाएं। सीएम के निर्देश पर सीधी भर्ती के अपर मुख्य अधिकारी अशोक कुमार मद्घेशिया की तैनाती तो जिले में हो गई थी, लेकिन प्रकरण की जांच नहीं हो पाई थी। वर्तमान अपर मुख्य अधिकारी अशोक कुमार मद्धेशिया ने बताया कि प्रकरण दो साल पुराना है। जब यहां राम आश्रय प्रसाद अभियंता थे और उन्हीं को अपर मुख्य अधिकारी का प्रभार दे दिया गया था। वर्तमान में कार्य की गुणवता ठीक है। ई- टेंडरिंग में नियमों का अनुपालन किया जा रहा है। उनके कार्यकाल में किसी तरह की कोई गड़बड़ी नहीं होने पाएगी। इस वित्तीय वर्ष में सिर्फ सात करोड़ रुपये अब तक मिला है। सीडीओ बब्बन उपाध्याय ने बताया कि डीएम ने उन्हें जांच सौंपी गई है। जल्द ही जांच कर रिपोर्ट डीएम को प्रेषित करेंगे।
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संतकबीरनगर। दो साल पहले विधायकों की ओर से जिला पंचायत में व्याप्त भ्रष्टाचार की मुख्यमंत्री से की गई शिकायत की अब जांच होगी। शासन के निर्देश पर डीएम ने जांच की जिम्मेदारी सीडीओ को दी है। यदि सही से जांच हुई तो जिला पंचायत की गड़बड़ियां सामने आ जाएंगी।
खलीलाबाद के विधायक दिग्विजय नारायण उर्फ जय चौबे, मेंहदावल के विधायक राकेश सिंह बघेल और धनघटा के विधायक एवं उद्यान राज्यमंत्री श्रीराम चौहान ने वर्ष-2018 में जिला पंचायत के भ्रष्टाचार की शिकायत मुख्यमंत्री से की थी। माननीयों की शिकायत की थी कि संतकबीरनगर जनपद में जिला पंचायत में विगत कई वर्षों से अपर मुख्य अधिकारी की तैनाती नहीं है। सहायक अभियंता से ही अभियंता एवं अपर मुख्य अधिकारी का कार्य लिया जाता रहा। माननीयों ने पंचायती राजमंत्री से भी इस प्रकरण से अवगत कराया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। लिहाजा जिला पंचायत में भ्रष्टाचार चरम सीमा पर पहुंच गया। निर्माण कार्यों की गुणवता पर सवाल उठने लगे। ई- टेंडरिग प्रक्रिया का पालन ही नहीं हो रहा। उपलब्ध धन के सापेक्ष कई गुना निविदा कर दी गई। तीनों विधायकों ने सीएम से मांग की अपर मुख्य अधिकारी के संपूर्ण कार्यकाल के निर्माण कार्यों की जांच उच्च स्तरीय समिति से कराई जाए। सीधी भर्ती के अपर मुख्य अधिकारी की तैनाती करने का निर्देश दिए जाएं। सीएम के निर्देश पर सीधी भर्ती के अपर मुख्य अधिकारी अशोक कुमार मद्घेशिया की तैनाती तो जिले में हो गई थी, लेकिन प्रकरण की जांच नहीं हो पाई थी। वर्तमान अपर मुख्य अधिकारी अशोक कुमार मद्धेशिया ने बताया कि प्रकरण दो साल पुराना है। जब यहां राम आश्रय प्रसाद अभियंता थे और उन्हीं को अपर मुख्य अधिकारी का प्रभार दे दिया गया था। वर्तमान में कार्य की गुणवता ठीक है। ई- टेंडरिंग में नियमों का अनुपालन किया जा रहा है। उनके कार्यकाल में किसी तरह की कोई गड़बड़ी नहीं होने पाएगी। इस वित्तीय वर्ष में सिर्फ सात करोड़ रुपये अब तक मिला है। सीडीओ बब्बन उपाध्याय ने बताया कि डीएम ने उन्हें जांच सौंपी गई है। जल्द ही जांच कर रिपोर्ट डीएम को प्रेषित करेंगे।
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