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Sant Kabir Nagar News: ये कैसा नियम...कुत्ता काटे तो चार और पीड़ित खोजें, तब लगेगी वैक्सीन
Sat, 20 Apr 2024 03:49 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Sat, 20 Apr 2024 03:49 AM IST
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- एक वॉयल में पांच डोज की वजह से स्टाफ करता है आनाकानी, बाजार से खरीदनी पड़ती है वैक्सीन
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। तेज धूप की वजह से कुत्ताें का आतंक बढ़ गया है। ग्रामीण इलाकों में गली में घूमने वाले कुत्तों ने अगर काट लिया तो सीएचसी पर जब तक चार लोग नहीं आएंगे तब तक वैक्सीन नहीं लगेगी। इसके लिए जिला अस्पताल में ही आना होगा। जिसमें समय भी जाया होगा। नजदीक के अस्पतालों में सुविधा तो है पर मरीज न होने की वजह से वाॅयल नहीं खोलना चाहते हैं, क्योंकि एक वाॅयल में पांच लोगों को इंजेक्शन लगता है। अगर एक बार वाॅयल खुल गया और मरीज पूरे नहीं रहे तो वाॅयल खराब हो जाता है।
जनपद में जिला अस्पताल व सीएचसी पर एंटी रैबिज इंजेक्शन लगाने की सुविधा उपलब्ध है। हर दिन सीएचसी और जिला अस्पताल में 40 से 50 मरीज वैक्सीन लगवाने पहुंच रहे हैं। कुत्ता काटने के बाद 48 घंटे के अंदर पहली डोज लगवाना अनिवार्य है। कुल चार डोज लगाए जाते हैं। जिसकी तिथि निर्धारित कर दी जाती है। उसी तिथि के अनुसार मरीज आकर वैक्सीन लगवा लेता है।
जिले के सीएचसी का हाल यह है कि अगर किसी व्यक्ति को कुत्ते ने काट लिया तो वह वैक्सीन लगवाने जाता है। लेकिन उसे इंतजार करना पड़ता है। तीन से चार मरीज हो जाएं तो वाॅयल खोला जाता है और इंजेक्शन लगाई जाती है। इससे पहले मरीज को चिकित्सक काे दिखाना जरूरी होता है। चिकित्सक के तय किए गए डोज के अनुसार ही वैक्सीन लगती है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि अब ऐसा नहीं है जो भी मरीज आ रहे हैं उन्हे वैक्सीन लगवाई जा रही है।
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जिला अस्पताल में एंटी रैबिज वैक्सीन का एक सप्ताह का आकड़ा
तिथि एंटी रैबिज वैक्सीन
13 अप्रैल 71
15 अप्रैल 60
16 अप्रैल 55
17 अप्रैल 29
18 अप्रैल 43
19 अप्रैल 57
नोट- इस आकड़े में बच्चे भी शामिल हैं।
तेज धूप व गर्मी तथा खाली पेट कुत्ते हो रहे हिंसक
गर्मी के मौसम में कुत्ते ज्यादा आक्रामक होते हैं। इस वजह से वह सड़कों पर आने-जाने वालों को दौड़ाते हुए काटते हैं। इसके पीछे चिकित्सक भोजन की कमी और तापमान में उतार-चढ़ाव को कारण मान रहे हैं। जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन एपी मिश्रा ने बताया कि कुत्तों के दिमाग में थर्मो रेगुलेटरी सिस्टम नहीं होता है। यही कारण है कि अपनी गर्मी को शांत करने के लिए जीभ निकालकर हांफते हैं। इससे महज 10 से 15 प्रतिशत ही गर्मी निकल पाती है। गर्मी के चलते उनमें चिड़चिड़ापन आ जाता है। जरा भी आवाज सुनने पर आक्रामक होकर लोगों को काट लेते हैं।
दूसरी बड़ी वजह यह भी है कि इनके रहने की जगह भी कम होती जा रही है। इसके अलावा पहले घरों के आसपास इन्हें खाने के लिए पर्याप्त मात्रा में जूठन मिल जाता था। सफाई को लेकर लोग जागरूक हुए तो अब कुत्तों को खाने को भी नहीं मिल पा रहा है। खाली पेट होने के चलते भी गुस्सा बढ़ा है।
हाई डोज एंटी रैबीज वैक्सीन उपलब्ध
जिन लोगों को कुत्ते गंभीर रूप से काट लेते हैं, उन्हें हाई डोज एंटी रैबीज वैक्सीन लगाई जाती है। यह इंजेक्शन कंधे के बजाय मरीज के जख्म पर लगाई जाती है। हाई डोज वैक्सीन जिला अस्पताल के अलावा सीएचसी पर उपलब्ध है। निजी अस्पतालों में इस वैक्सीन लगवाने के लिए लोगों को दो हजार रुपये खर्च करने पड़ते हैं। यह सिर्फ गोरखपुर के निजी अस्पताल में लगाई जाती है।
केस एक
महुली के रहने वाले आलोक सिंह को तीन अप्रैल को कुत्ता ने काट लिया। वह सीएचसी नाथनगर पहुंचे तो उन्हें कहा गया कि कुछ देर रुक जाइए और मरीज आ जाएं तो वैक्सीन लग जाएगी। इसके लिए आलोक को इंतजार करना पड़ा। फिर वह जिला अस्पताल में आकर वैक्सीन लगवाए।
केस दो
मेंहदावल कस्बे के वीरेंद्र के आठ वर्षीय बच्चे को 12 अप्रैल को कुत्ते ने काट लिया। वह सीएचसी में वैक्सीन लगवाने गए तो एक मरीज और आने के बाद ही सुई लगाई गई। इसमें करीब दो घंटे तक इंतजार करना पड़ा था।
एक वाॅयल खुलने के बाद चार घंटे तक करता है काम
कुत्ता काटने वाला इंजेक्शन एंटी रैबिज के एक वाॅयल में पांच लोगों को वैक्सीन लगती है। वाॅयल खुलने के बाद चार घंटे तक कार्य करता है वह भी फ्रीज में रहने पर। मरीज को वाॅयल से सुई लगाने के बाद उसे अंदर रख दिया जाता है। चार घंटे बाद उसे निष्प्रयोज्य कर फेंक दिया जाता है।
ऐसे करें बचाव
- कुत्तों से बच्चों को दूर रखें, दौड़ाने पर रुक जाएं।
- कुत्तों के काटने के बाद 10 से 12 बार काटने वाले स्थान को साबुन से धोएं। डाॅक्टर से संपर्क कर उपचार कराएं।
- घर के आसपास रहने वाले कुत्तों के पानी और भोजन की व्यवस्था करें।
- गर्मी के समय कुत्तों को परेशान न करें, न ही उन्हें मारें, इससे वह और आक्रामक हो जाते हैं।
- पालक अपने कुत्तों को रैबीज वाले टीके अवश्य लगवा लें।
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संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। तेज धूप की वजह से कुत्ताें का आतंक बढ़ गया है। ग्रामीण इलाकों में गली में घूमने वाले कुत्तों ने अगर काट लिया तो सीएचसी पर जब तक चार लोग नहीं आएंगे तब तक वैक्सीन नहीं लगेगी। इसके लिए जिला अस्पताल में ही आना होगा। जिसमें समय भी जाया होगा। नजदीक के अस्पतालों में सुविधा तो है पर मरीज न होने की वजह से वाॅयल नहीं खोलना चाहते हैं, क्योंकि एक वाॅयल में पांच लोगों को इंजेक्शन लगता है। अगर एक बार वाॅयल खुल गया और मरीज पूरे नहीं रहे तो वाॅयल खराब हो जाता है।
जनपद में जिला अस्पताल व सीएचसी पर एंटी रैबिज इंजेक्शन लगाने की सुविधा उपलब्ध है। हर दिन सीएचसी और जिला अस्पताल में 40 से 50 मरीज वैक्सीन लगवाने पहुंच रहे हैं। कुत्ता काटने के बाद 48 घंटे के अंदर पहली डोज लगवाना अनिवार्य है। कुल चार डोज लगाए जाते हैं। जिसकी तिथि निर्धारित कर दी जाती है। उसी तिथि के अनुसार मरीज आकर वैक्सीन लगवा लेता है।
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जिले के सीएचसी का हाल यह है कि अगर किसी व्यक्ति को कुत्ते ने काट लिया तो वह वैक्सीन लगवाने जाता है। लेकिन उसे इंतजार करना पड़ता है। तीन से चार मरीज हो जाएं तो वाॅयल खोला जाता है और इंजेक्शन लगाई जाती है। इससे पहले मरीज को चिकित्सक काे दिखाना जरूरी होता है। चिकित्सक के तय किए गए डोज के अनुसार ही वैक्सीन लगती है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि अब ऐसा नहीं है जो भी मरीज आ रहे हैं उन्हे वैक्सीन लगवाई जा रही है।
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जिला अस्पताल में एंटी रैबिज वैक्सीन का एक सप्ताह का आकड़ा
तिथि एंटी रैबिज वैक्सीन
13 अप्रैल 71
15 अप्रैल 60
16 अप्रैल 55
17 अप्रैल 29
18 अप्रैल 43
19 अप्रैल 57
नोट- इस आकड़े में बच्चे भी शामिल हैं।
तेज धूप व गर्मी तथा खाली पेट कुत्ते हो रहे हिंसक
गर्मी के मौसम में कुत्ते ज्यादा आक्रामक होते हैं। इस वजह से वह सड़कों पर आने-जाने वालों को दौड़ाते हुए काटते हैं। इसके पीछे चिकित्सक भोजन की कमी और तापमान में उतार-चढ़ाव को कारण मान रहे हैं। जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन एपी मिश्रा ने बताया कि कुत्तों के दिमाग में थर्मो रेगुलेटरी सिस्टम नहीं होता है। यही कारण है कि अपनी गर्मी को शांत करने के लिए जीभ निकालकर हांफते हैं। इससे महज 10 से 15 प्रतिशत ही गर्मी निकल पाती है। गर्मी के चलते उनमें चिड़चिड़ापन आ जाता है। जरा भी आवाज सुनने पर आक्रामक होकर लोगों को काट लेते हैं।
दूसरी बड़ी वजह यह भी है कि इनके रहने की जगह भी कम होती जा रही है। इसके अलावा पहले घरों के आसपास इन्हें खाने के लिए पर्याप्त मात्रा में जूठन मिल जाता था। सफाई को लेकर लोग जागरूक हुए तो अब कुत्तों को खाने को भी नहीं मिल पा रहा है। खाली पेट होने के चलते भी गुस्सा बढ़ा है।
हाई डोज एंटी रैबीज वैक्सीन उपलब्ध
जिन लोगों को कुत्ते गंभीर रूप से काट लेते हैं, उन्हें हाई डोज एंटी रैबीज वैक्सीन लगाई जाती है। यह इंजेक्शन कंधे के बजाय मरीज के जख्म पर लगाई जाती है। हाई डोज वैक्सीन जिला अस्पताल के अलावा सीएचसी पर उपलब्ध है। निजी अस्पतालों में इस वैक्सीन लगवाने के लिए लोगों को दो हजार रुपये खर्च करने पड़ते हैं। यह सिर्फ गोरखपुर के निजी अस्पताल में लगाई जाती है।
केस एक
महुली के रहने वाले आलोक सिंह को तीन अप्रैल को कुत्ता ने काट लिया। वह सीएचसी नाथनगर पहुंचे तो उन्हें कहा गया कि कुछ देर रुक जाइए और मरीज आ जाएं तो वैक्सीन लग जाएगी। इसके लिए आलोक को इंतजार करना पड़ा। फिर वह जिला अस्पताल में आकर वैक्सीन लगवाए।
केस दो
मेंहदावल कस्बे के वीरेंद्र के आठ वर्षीय बच्चे को 12 अप्रैल को कुत्ते ने काट लिया। वह सीएचसी में वैक्सीन लगवाने गए तो एक मरीज और आने के बाद ही सुई लगाई गई। इसमें करीब दो घंटे तक इंतजार करना पड़ा था।
एक वाॅयल खुलने के बाद चार घंटे तक करता है काम
कुत्ता काटने वाला इंजेक्शन एंटी रैबिज के एक वाॅयल में पांच लोगों को वैक्सीन लगती है। वाॅयल खुलने के बाद चार घंटे तक कार्य करता है वह भी फ्रीज में रहने पर। मरीज को वाॅयल से सुई लगाने के बाद उसे अंदर रख दिया जाता है। चार घंटे बाद उसे निष्प्रयोज्य कर फेंक दिया जाता है।
ऐसे करें बचाव
- कुत्तों से बच्चों को दूर रखें, दौड़ाने पर रुक जाएं।
- कुत्तों के काटने के बाद 10 से 12 बार काटने वाले स्थान को साबुन से धोएं। डाॅक्टर से संपर्क कर उपचार कराएं।
- घर के आसपास रहने वाले कुत्तों के पानी और भोजन की व्यवस्था करें।
- गर्मी के समय कुत्तों को परेशान न करें, न ही उन्हें मारें, इससे वह और आक्रामक हो जाते हैं।
- पालक अपने कुत्तों को रैबीज वाले टीके अवश्य लगवा लें।