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Sant Kabir Nagar News: कोर्ट में हाजिर न होने पर ब्रिटिश मौलाना, बेटे और बहू के खिलाफ वारंट जारी
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संतकबीरनगर। फर्जी कागजात के आधार पर जमीन खरीदने के मामले में आरोपी ब्रिटिश मौलाना शमशुल हुदा खान और उसके परिवार की मुश्किलें बढ़ गई हैं। न्यायालय में हाजिर न होने पर अदालत ने मौलाना शमशुल हुदा खान, उसके बेटे तौसीफ रजा और बहू नसरीन जहां निवासी मीट मंडी रोड खलीलाबाद के खिलाफ वारंट जारी कर दिया है। न्यायालय के इस आदेश के बाद पुलिस पर आरोपियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित कराने का दबाव बढ़ गया है।
यह मामला जिले में लंबे समय से चर्चा का विषय बना हुआ है। आरोप है कि फर्जी दस्तावेज तैयार कर मदरसा की जमीन खरीदी गई थी। मामले में सहसरांव गांव निवासी नूरुल हक खान की तहरीर पर कोतवाली खलीलाबाद पुलिस ने अप्रैल 2024 में प्राथमिकी दर्ज की थी। जांच के बाद पुलिस ने आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किए थे।
सुनवाई के दौरान आरोपियों को अदालत में उपस्थित होने के लिए कहा गया था, लेकिन तिथि पर उनके पेश न होने पर न्यायालय ने सख्त रुख अपनाते हुए वारंट जारी कर दिया।
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ब्रिटिश नागरिकता रखने वाला मौलाना शमशुल हुदा खान पहले भी विभिन्न मामलों को लेकर सुर्खियों में रहा है। जांच एजेंसियां उस पर विदेशी फंडिंग और पाकिस्तानी कनेक्शन से जुड़े आरोपों की भी जांच कर चुकी हैं। हालांकि इन मामलों में अंतिम न्यायिक निर्णय संबंधित प्रक्रियाओं के अधीन है।
फिलहाल न्यायालय से वारंट जारी होने के बाद पुलिस आरोपियों की गिरफ्तारी की कार्रवाई में जुट गई है। यदि इसके बाद भी आरोपी सात अगस्त को न्यायालय में उपस्थित नहीं होते हैं तो न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे और कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
सूत्रों के अनुसार, अदालत के आदेश के अनुपालन में संबंधित थाने की पुलिस को वारंट तामील कराने के निर्देश दिए गए हैं। अब सभी की नजर इस बात पर है कि आरोपी न्यायालय के समक्ष कब पेश होते हैं या पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर अदालत में प्रस्तुत करती है।
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फर्जी दस्तावेजों से जमीन खरीदने का आरोप
फर्जी दस्तावेजों से जमीन की खरीद-फरोख्त और भारतीय नागरिकता संबंधी अभिलेखों में कथित कूटरचना के मामले में पुलिस ने ब्रिटिश नागरिक मौलाना शमशुल हुदा खान समेत चार आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया था। विवेचना में पुलिस ने आरोपों को प्रमाणित मानते हुए तीन आरोपियों के विरुद्ध कार्रवाई की संस्तुति की है।
पुलिस विवेचना के अनुसार, मौलाना शमशुल हुदा खान पर ब्रिटिश नागरिक होते हुए कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर स्वयं को भारतीय निवासी दर्शाकर वर्ष 2014 से 2023 के बीच विभिन्न भूमि क्रय-विक्रय से जुड़े दस्तावेज तैयार कराने का आरोप हैं। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने विदेशी नागरिक होने के तथ्य को अभिलेखों में छिपाया और ओसीआई कार्ड सहित अन्य दस्तावेजों का उपयोग किया।
मामले में पुलिस ने मौलाना शमशुल हुदा खान, उसके बेटे मौलाना तौसीफ रजा खान, पत्नी सकैलन खातून तथा बहू नसरीन जहां के विरुद्ध कूटरचना, धोखाधड़ी और जालसाजी से संबंधित धाराओं में आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया है।
विवेचना रिपोर्ट में कहा गया है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोप प्रथम दृष्टया प्रमाणित पाए गए हैं। इसी आधार पर न्यायालय से सभी आरोपियों को तलब कर विधिक कार्रवाई किए जाने की संस्तुति की गई है।-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -
640 वर्ग मीटर में बना है मदरसा
ब्रिटिश मौलाना शमशुल हुदा खान द्वारा खलीलाबाद के मीट मंडी, मोतीनगर में बनवाए गए अवैध मदरसा कुल्लियातुल बनातिर रजविया का कुल क्षेत्रफल 640 वर्ग मीटर (लगभग 7,000 वर्ग फीट) है। यह मदरसा 640 वर्ग मीटर सरकारी भूमि पर अवैध रूप से बिना किसी स्वीकृत नक्शे के बनाया गया था। यह तीन मंजिला इमारत थी, जिसमें 25 कमरे बने थे। इस भवन के निर्माण में करीब पांच करोड़ रुपये की लागत आई, जिसके लिए अवैध रूप से विदेशी फंडिंग का इस्तेमाल किया गया। अवैध निर्माण और संदिग्ध गतिविधियों (यूपी एटीएस तथा ईडी की जांच) के कारण अप्रैल 2026 में जिला प्रशासन ने कमिश्नर कोर्ट के आदेश पर बुलडोजर चलाकर इस पूरे ढांचे को ध्वस्त करना शुरू किया। कोर्ट के आदेश पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई रुकी और अभी मामला न्यायालय में विचाराधीन है।
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यह मामला जिले में लंबे समय से चर्चा का विषय बना हुआ है। आरोप है कि फर्जी दस्तावेज तैयार कर मदरसा की जमीन खरीदी गई थी। मामले में सहसरांव गांव निवासी नूरुल हक खान की तहरीर पर कोतवाली खलीलाबाद पुलिस ने अप्रैल 2024 में प्राथमिकी दर्ज की थी। जांच के बाद पुलिस ने आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किए थे।
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सुनवाई के दौरान आरोपियों को अदालत में उपस्थित होने के लिए कहा गया था, लेकिन तिथि पर उनके पेश न होने पर न्यायालय ने सख्त रुख अपनाते हुए वारंट जारी कर दिया।
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ब्रिटिश नागरिकता रखने वाला मौलाना शमशुल हुदा खान पहले भी विभिन्न मामलों को लेकर सुर्खियों में रहा है। जांच एजेंसियां उस पर विदेशी फंडिंग और पाकिस्तानी कनेक्शन से जुड़े आरोपों की भी जांच कर चुकी हैं। हालांकि इन मामलों में अंतिम न्यायिक निर्णय संबंधित प्रक्रियाओं के अधीन है।
फिलहाल न्यायालय से वारंट जारी होने के बाद पुलिस आरोपियों की गिरफ्तारी की कार्रवाई में जुट गई है। यदि इसके बाद भी आरोपी सात अगस्त को न्यायालय में उपस्थित नहीं होते हैं तो न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे और कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
सूत्रों के अनुसार, अदालत के आदेश के अनुपालन में संबंधित थाने की पुलिस को वारंट तामील कराने के निर्देश दिए गए हैं। अब सभी की नजर इस बात पर है कि आरोपी न्यायालय के समक्ष कब पेश होते हैं या पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर अदालत में प्रस्तुत करती है।
फर्जी दस्तावेजों से जमीन खरीदने का आरोप
फर्जी दस्तावेजों से जमीन की खरीद-फरोख्त और भारतीय नागरिकता संबंधी अभिलेखों में कथित कूटरचना के मामले में पुलिस ने ब्रिटिश नागरिक मौलाना शमशुल हुदा खान समेत चार आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया था। विवेचना में पुलिस ने आरोपों को प्रमाणित मानते हुए तीन आरोपियों के विरुद्ध कार्रवाई की संस्तुति की है।
पुलिस विवेचना के अनुसार, मौलाना शमशुल हुदा खान पर ब्रिटिश नागरिक होते हुए कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर स्वयं को भारतीय निवासी दर्शाकर वर्ष 2014 से 2023 के बीच विभिन्न भूमि क्रय-विक्रय से जुड़े दस्तावेज तैयार कराने का आरोप हैं। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने विदेशी नागरिक होने के तथ्य को अभिलेखों में छिपाया और ओसीआई कार्ड सहित अन्य दस्तावेजों का उपयोग किया।
मामले में पुलिस ने मौलाना शमशुल हुदा खान, उसके बेटे मौलाना तौसीफ रजा खान, पत्नी सकैलन खातून तथा बहू नसरीन जहां के विरुद्ध कूटरचना, धोखाधड़ी और जालसाजी से संबंधित धाराओं में आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया है।
विवेचना रिपोर्ट में कहा गया है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोप प्रथम दृष्टया प्रमाणित पाए गए हैं। इसी आधार पर न्यायालय से सभी आरोपियों को तलब कर विधिक कार्रवाई किए जाने की संस्तुति की गई है।
640 वर्ग मीटर में बना है मदरसा
ब्रिटिश मौलाना शमशुल हुदा खान द्वारा खलीलाबाद के मीट मंडी, मोतीनगर में बनवाए गए अवैध मदरसा कुल्लियातुल बनातिर रजविया का कुल क्षेत्रफल 640 वर्ग मीटर (लगभग 7,000 वर्ग फीट) है। यह मदरसा 640 वर्ग मीटर सरकारी भूमि पर अवैध रूप से बिना किसी स्वीकृत नक्शे के बनाया गया था। यह तीन मंजिला इमारत थी, जिसमें 25 कमरे बने थे। इस भवन के निर्माण में करीब पांच करोड़ रुपये की लागत आई, जिसके लिए अवैध रूप से विदेशी फंडिंग का इस्तेमाल किया गया। अवैध निर्माण और संदिग्ध गतिविधियों (यूपी एटीएस तथा ईडी की जांच) के कारण अप्रैल 2026 में जिला प्रशासन ने कमिश्नर कोर्ट के आदेश पर बुलडोजर चलाकर इस पूरे ढांचे को ध्वस्त करना शुरू किया। कोर्ट के आदेश पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई रुकी और अभी मामला न्यायालय में विचाराधीन है।