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तहखाने में देते थे यातना, तबेले में तैयार कराते थे उपले

Mon, 16 May 2022 11:42 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 16 May 2022 11:42 PM IST
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Used to torture in the cellar, used to prepare cow dung cakes
मगहर स्थित काजीपुर मोहल्ले में अपनों के बीच पहुंचा युवक। - फोटो : KHALILABAD
तहखाने में देते थे यातना, तबेले में तैयार कराते थे उपले
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मगहर (संतकबीरनगर)। नगर से किशोरावस्था में अपहृत शमशेर आलम 15 साल बाद रविवार को अपने घर लौटे। उन्होंने अपने परिजनों को आपबीती सुनाई तो सभी के रोंगटे खड़े हो गए। शमशेर के मुताबिक, अपहरण के बाद उनको नासिक के एक तहखाने में कैद करके रखा गया था। उन्हें यातनाएं देकर काम कराया जाता था। बहुत मुश्किल से वह वहां से निकल पाए।
नगर पंचायत मगहर के काजीपुर नई बाजार निवासी वजीउल्लाह के पुत्र शमशेर आलम लगभग दस वर्ष की उम्र में वर्ष 2007 में लापता हो गए थे। इसकी खोज में परिजन के लोग काफी परेशान हुए। पुलिस ने काफी जगह तलाशा था। करीब 15 साल बाद वह बदहवाश हालत में रविवार को घर लौटे।
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घर लौटने से परिजन खुशी से फूले नहीं समा रहे। बताया जाता है कि कसबे से 2007 के आसपास ही दो अन्य युवक भी लापता हो गए थे। दोनों की गुमशुदगी दर्ज है। उनका अब तक कोई सुराग नहीं मिल सका है। शमशेर के घर लौटने से उन युवकों के परिजनों की भी उम्मीदें जगी हैं। शमशेर ने बताया कि जहां उनको कैद करके रखा गया था, वहां उनकी तरह चार से पांच और लोगों को के साथ भी वैसा ही बर्ताव होता था। उनकी तरह कुछ और लोग भी वहां कैद थे।
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इंजेक्शन लगाया जाता था, पांव में डाली गई थी बेड़ी
मगहर। शमसेर ने बताया कि 2007 में वह आमी नदी पर टहलने गए थे। वहां तीन की संख्या में अजनबी आए और उन्हें कुछ सुंघाकर जीप में बैठा लिया। होश आने पर उन्हें पता चला कि उनको कहीं दूर लाया गया है। बाद में मालूम हुआ कि वह नासिक (महाराष्ट्र) में हैं। वहां उन्हें कुछ लोगों के हाथों उन्हें बेच दिया गया। उसके बाद उन्हें एक तहखाने में बंद करके रखा जाता था। वहां से निकालकर उन्हें तबेले में ले जाकर गोबर के उपले बनवाए जाते थे। कार्य करने के दौरान उन्हें एड़ी में इंजेक्शन लगाया जाता था। उनके दाएं पैर में बेड़ियां डाल दी गई थीं, ताकि वह कहीं भाग न सकें। उसकी याददाश्त को खत्म करने के लिए इंजेक्शन लगाए जाते थे। यातनाएं दी जा रही थीं। शमशेर को सिर्फ इतना याद है कि उस जगह को नासिक के दूध बाजार के नाम से जाना जाता है। बताया कि वहां से भागने की कोशिश करने वाले को ज्यादा यातनाएं देकर अपाहिज बना दिया जाता था।
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मुस्लिम शख्स की मदद से नासिक से निकल पाया
मगहर। शमशेर ने बताया कि उन्हें अपने नगर के नाम की जगह सिर्फ बस्ती ही याद रह गया था। उसके बारे में अक्सर वह सोचते रहते थे। वह वहां से भागने के लिए अक्सर मौके की तलाश में रहते थे। उन्हें एक मुस्लिम शख्स मिले, जिनसे उन्होंने आपबीती बताई। उस शख्स ने उनकी मदद करने का भरोसा दिया। आखिरकार वह मौका मिल गया। उस शख्स की मदद से वह उस तहखाने से निकलने में कामयाब हो गए। वह शख्स उन्हें नासिक रेलवे स्टेशन पर ले गया और बस्ती जाने वाली ट्रेन में बैठा दिया। ट्रेन में सफर के दौरान टीटी ने भी मदद की। टीटी ने उन्हें कपड़े दिए और बस्ती रेलवे स्टेशन पर जीआरपी को सौंप दिया। वहां कोई सुराग नहीं लगा तो पुलिस खलीलाबाद लेकर आई। वहां मौजूद उनके घर के सामने रहने वाली महिला ने उनके पिता को फोन पर सूचना दी। महिला को शक था कि शमशेर वहीं हैं, जो किशोरावस्था में लापता हो गए थे। उसके बाद परिवार के लोग रेलवे स्टेशन आए और शमशेर की पहचान कर अपने साथ ले गए।

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वर्जन
इस प्रकरण के बारे में पूरी जानकारी हासिल की जाएगी। पहले से दर्ज गुमशुदगी के केस में शमशेर के बयान के आधार पर धाराएं तरमीम करके जांच आगे बढ़ाई जाएगी। पुलिस इस मामले की ठीक ढंग से विवेचना करेगी। जो भी दोषी होंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई कराई जाएगी।
- सोनम कुमार, एसपी
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