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यूपी एग्रो व पीसीएफ के प्रबंधकों पर होगी कार्रवाई
Sant Kabir Nagar
Updated Wed, 14 Dec 2016 11:19 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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जिले में सरकारी धान खरीद का बुरा हाल है। आलम यह है कि यूपी एग्रो और पीसीएफ क्रय एजेंसियां धान खरीद में फिसड्डी साबित हो रही हैं, जबकि प्राइवेट प्लेयर्स फार्मर्स फार्चून लिमिटेड की खरीद की गति भी बेहद सुस्त है। डीएम ने जिला धान खरीद अधिकारी एडीएम को निर्देश दिया है कि यूपी एग्रो,पीसीएफ के जिला प्रबंधकों के खिलाफ कार्रवाई के लिए आयुक्त खाद्य रसद, मंडलायुक्त बस्ती और प्रमुख सचिव खाद्य एवं शासन को पत्र भेजें।
जिले में धान की खरीद के लिए कुल 53 क्रय केंद्र स्थापित है। जिसमें खाद्य विभाग के छह, पीसीएफ के 26 ,यूपी एग्रो के तीन और प्राइवेट प्लेयर्स फार्मर्स फार्चून लिमिटेड के 17 केंद्रों को धान खरीद जिम्मेदारी दी गई है। जिले को 520700 मीट्रिक टन धान की खरीद करनी है, लेकिन अब तक सिर्फ 1539 मीट्रिक टन ही खरीद हो पाई है। किसान बिचौलियों के हाथ धान बेचने को विवश है और उन्हें सरकारी क्रय केंद्र का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
यूपी एग्रो के किसी भी केंद्र पर खरीद शुरू नहीं हो पाई है। जबकि यूपी एग्रो को 12000 मीट्रिक टन धान खरीदना है। इसी तरफ पीसीएफ को 20700 मीट्रिक टन खरीदना है, लेकिन अभी तक इस एजेंसी ने 10.348 मीट्रिक टन धान खरीद पाई है। प्राइवेट प्लेयर्स भी 7300 मीट्रिक टन के सापेक्ष 11.600 मीट्रिक टन खरीद की है। डिप्टी आरएमओ विपिन कुमार ने बताया कि यूपी एग्रो और पीसीएफ के साथ प्राइवेट प्लेयर्स फारचून प्राइवेट लिमिटेड के जरिए धान खरीद में दिलचस्पी नहीं ली जा रही है।
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एडीएम सत्येंद्र नाथ शुक्ला ने बताया कि खाद्य विभाग का एक, यूपी एग्रो की तीन, पीसीएफ की 21 और प्राइवेट प्लेयर्स लिमिटेड की एजेंसी के तीन क्रय केंद्रों पर खरीद शून्य है। क्रय एजेंसियों के जिम्मेदारों को पूर्व में निरीक्षण के दौरान भी सख्त हिदायत दी गई थी। डीएम सुरेश कुमार ने बताया कि यूपी एग्रो, पीसीएफ के जिला प्रबंधकों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश एडीएम को दिए गए है। इसके साथ ही प्राइवेट प्लेयर्स फार्चून लिमिटेड के जिम्मेदार को भी कड़ी चेतावनी दी गई है। यदि लक्ष्य पूर्ति की दिशा में प्रयास नहीं हुआ तो संबंधितों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब है कि एक नवंबर से धान की खरीद हो रही है, जो कि फरवरी के अंत तक जारी रहेगी।
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जिले में धान की खरीद के लिए कुल 53 क्रय केंद्र स्थापित है। जिसमें खाद्य विभाग के छह, पीसीएफ के 26 ,यूपी एग्रो के तीन और प्राइवेट प्लेयर्स फार्मर्स फार्चून लिमिटेड के 17 केंद्रों को धान खरीद जिम्मेदारी दी गई है। जिले को 520700 मीट्रिक टन धान की खरीद करनी है, लेकिन अब तक सिर्फ 1539 मीट्रिक टन ही खरीद हो पाई है। किसान बिचौलियों के हाथ धान बेचने को विवश है और उन्हें सरकारी क्रय केंद्र का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
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यूपी एग्रो के किसी भी केंद्र पर खरीद शुरू नहीं हो पाई है। जबकि यूपी एग्रो को 12000 मीट्रिक टन धान खरीदना है। इसी तरफ पीसीएफ को 20700 मीट्रिक टन खरीदना है, लेकिन अभी तक इस एजेंसी ने 10.348 मीट्रिक टन धान खरीद पाई है। प्राइवेट प्लेयर्स भी 7300 मीट्रिक टन के सापेक्ष 11.600 मीट्रिक टन खरीद की है। डिप्टी आरएमओ विपिन कुमार ने बताया कि यूपी एग्रो और पीसीएफ के साथ प्राइवेट प्लेयर्स फारचून प्राइवेट लिमिटेड के जरिए धान खरीद में दिलचस्पी नहीं ली जा रही है।
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एडीएम सत्येंद्र नाथ शुक्ला ने बताया कि खाद्य विभाग का एक, यूपी एग्रो की तीन, पीसीएफ की 21 और प्राइवेट प्लेयर्स लिमिटेड की एजेंसी के तीन क्रय केंद्रों पर खरीद शून्य है। क्रय एजेंसियों के जिम्मेदारों को पूर्व में निरीक्षण के दौरान भी सख्त हिदायत दी गई थी। डीएम सुरेश कुमार ने बताया कि यूपी एग्रो, पीसीएफ के जिला प्रबंधकों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश एडीएम को दिए गए है। इसके साथ ही प्राइवेट प्लेयर्स फार्चून लिमिटेड के जिम्मेदार को भी कड़ी चेतावनी दी गई है। यदि लक्ष्य पूर्ति की दिशा में प्रयास नहीं हुआ तो संबंधितों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब है कि एक नवंबर से धान की खरीद हो रही है, जो कि फरवरी के अंत तक जारी रहेगी।