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शौचालय में घपला

Thu, 05 Sep 2019 10:51 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 05 Sep 2019 10:51 PM IST
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toilet scam
54 शौचालयों की रकम डकार गए पूर्व प्रधान और सचिव
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डीएम के निर्देश पर हुई जांच में उजागर हुआ मामला
दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी में जुटा विभाग
शोभित कुमार पांडेय
संतकबीरनगर। नाथनगर विकास खंड के कोदवट गांव में पूर्व प्रधान और पूर्व सचिव ने मिलीभगत करके 54 शौचालयों की रकम निकालकर गबन कर लिया। डीएम के निर्देश पर हुई जांच में मामला उजागर हुआ। अब दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी में विभाग जुट गया है।

कोदवट गांव के निवासी राजेश कुमार ने डीएम को प्रार्थना पत्र दिया था। इसमें आरोप मढ़ा कि कोदवट राम मनोहर लोहिया गांव घोषित हुआ था। कागज में गांव को ओडीएफ घोषित कर दिया गया। कागज में 1200 शौचालयों का निर्माण कर सरकारी धन का गबन कर लिया गया। डीपीआरओ के जरिए जांच की गई तो 758 शौचालय मौके पर मिले। इसमें 244 शौचालय निर्मित पाए गए तथा 174 परिवारों के शौचालय ध्वस्त पाए गए और 189 शौचालयों का निर्माण कराया गया है। इसके साथ ही लाभार्थियों के ऐसे नाम मिले जो गांव में नहीं हैं। डीपीआरओ आलोक कुमार प्रियदर्शी ने बताया कि इस संबंध में 14 अगस्त को शौचालय निर्माण के लिए आवंटित धनराशि का अनियमित तरीके से आहरण करने के संबंध में जिला कंसल्टेंट स्वच्छ भारत मिशन अभिषेक सिंह के जरिए आख्या प्रस्तुत की गई। 19 अगस्त 2018 को पूर्व प्रधान अमरजीत को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया। ग्राम पंचायत सचिव क्षितिज चौधरी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। पूर्व प्रधान और सचिव की ओर से संयुक्त रूप से स्पष्टीकरण दिया गया। पांच जनवरी 2019 को सीडीओ की ओर से स्पष्टीकरण की जांच के लिए डीसी मनरेगा को जांच अधिकारी नामित किया गया। 14 जनवरी को जांच आख्या उपलब्ध कराने के लिए डीसी मनरेगा से अनुरोध किया गया, लेकिन जांच आख्या उनकी ओर से उपलब्ध नहीं कराई गई। डीएम के निर्देश पर जांच में सहयोग के लिए जिला कंसल्टेंट स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण विशाल शुक्ल, खंड प्रेरक संदीप शुक्ल, सोहन कुमार वर्मा को नामित किया गया। डीपीआरओ की ओर से 19 जुलाई को कोदवट का स्थलीय निरीक्षण किया गया एवं जांच की प्रगति की समीक्षा की गई। जांच में पाया गया कि ग्राम प्रधान और सचिव की ओर से स्पष्टीकरण में 758 शौचालय की सूची प्राप्त की है। 758 में 103 शौचालय निर्मल भारत अभियान के तहत आईडी ही जेनरेट की गई थी, शौचालय निर्माण प्रारंभ नहीं कराया गया। 758 शौचालयों में से 12 परिवारों के घरों में ताला बंद पाया गया। इसके कारण सत्यापन नहीं हो पाया। जबकि दो परिवारों ने अवगत कराया कि खुद के पैसे से शौचालय का निर्माण कराया गया है। जबकि प्रधान इसे अनुदान की धनराशि से निर्मित बता रहे हैं। 174 परिवारों के शौचालय ध्वस्त पाए गए। 34 लाभार्थी परिवार गांव में मिले ही नहीं। उनका अस्तित्व गांव में नहीं है। 244 शौचालय ही निर्मित पाए गए। पूर्व प्रधान और सचिव की ओर से प्रस्तुत स्पष्टीकरण में कुल चार तरह के शौचालयों का जिक्र किया गया है। डीपीआरओ ने बताया कि जांच के बाद निष्कर्ष में पाया गया कि 253 शौचालयों के लिए सचिव और प्रधान को जिम्मेदार नहीं माना जा सकता है। जांच आख्या के अनुसार 551 शौचालय जो धरातल पर होने चाहिए, उसमें से 253 शौचालयों की संख्या को घटाने पर 298 शौचालय वास्तविक रूप से निर्मित होने चाहिए। जबकि जांच टीम को मौके पर 244 शौचालय ही निर्मित पाए गए हैं। 54 शौचालयों की धनराशि की अनियमितता के लिए पूर्व प्रधान और तत्कालीन सचिव जिम्मेदार हैं। इसके विरुद्ध अलग से कार्रवाई की जाएगी। डीएम रवीश गुप्त ने बताया कि दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होगी।
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