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Sant Kabir Nagar News: सस्ते तेल से कर रहे तैयार, यह फास्टफूड कर देगा बीमार
Fri, 21 Mar 2025 11:41 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Fri, 21 Mar 2025 11:41 PM IST
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संतकबीरनगर। बाजार में बिक रहे चटपटे स्वाद वाले व्यंजन सेहत के लिए फायदेमंद नहीं हैं। गर्म समोसे, चाट-पकौड़े आपको बीमार बना सकते हैं। होटल, रेस्टोरेंट, फास्ट फूड वैन और ठेलों पर झटपट तैयार होने वाले यह जायकेदार व्यंजन सेहत के लिए नुकसानदेह है। सस्ते रिफाइंड के मिश्रण में यह कारोबारी फास्ट फूड तैयार कर रहे हैं। खराब क्वालिटी के तेल और रंगों से युक्त मसालाें में बने यह पकवान खस्ता और दिखने में आकर्षक और चटपटे भी होते हैं, लेकिन इसमें इस्तेमाल किए जाने वाली घटिया क्वालिटी के सामान लोगों की सेहत को बर्बाद कर रहे हैं।
जानकारों का कहना है कि विशेष किस्म के रंग मिलाए जाने से एवं कई बार फ्राई करने से चाइनीज मोमो, फिंगर चिप्स, एग रोल स्वादिष्ट तो बन जाता है, लेकिन यह सेहत के लिए नुकसानदेह है। क्योंकि इनकी कड़ाही में एक ही बार तेल पड़ता है और उसी को बार-बार गर्म करके फास्ट फूड तैयार किया जाता है। ऐसे धंधेबाजों की शहर में लंबी फेहरिस्त है। छोटा कारोबार होने की वजह से इनकी खाद्य सामग्रियों की जांच भी नहीं हो पाती है। शहर के आजाद तिराहा, मुखलिसपुर ओवरब्रिज के नीचे, बैंक चौराहा, गोला बाजार, मेंहदावल बाईपास आदि जगहों पर चाइनीज फास्ट फूड की दुकानें रोज सज रही है। खुले में खाद्य पदार्थ की बिक्री होने से उसमें सड़क से उड़ने वाली धूल-गर्द भी पड़ रही है, पर धंधेबाजों को इसकी फिक्र नहीं है। नाला और नालियों के किनारे इस तरह की दुकानों पर खाने-पीने की सामग्री तैयार की जा रही हैं।
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सस्ता रिफाइंड होता है इस्तेमाल
शहर में फास्ट फूड बचने वाले ठेलों पर सस्ता रिफाइंड इस्तेमाल किया जाता है। ब्रांडेड कंपनियों के रिफाइंड 170 रुपये लीटर है, जबकि लोकल रिफाइंड 80 से 90 रुपये लीटर मिल जा रहे है। इसकी वजह से दुकानदार इन्हीं का इस्तेमाल कर रहे हैं।
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तीखी चटनी है खतरनाक
लाल मिर्च को स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है, लेकिन यह तब फायदा पहुंचाएगी, जब उसमें प्रोसेसिंग के जरिए कुछ मिलाया न गया हो। माेमोज बेचने वाले मिर्च की क्वालिटी की चिंता नहीं करते हैं, वे मार्केट से सस्ती या लोकल मिर्च पाउडर खरीदकर उसकी चटनी बनाते हैं, ऐसी चटनी खाने से बवासीर होने का खतरा बना रहता है।
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मिलावटी मैदा खतरनाक : डॉ. वरुणेश
मोमोज के ऊपर की लेयर मैदे से बनाई जाती है। जो अनाज का रेशेदार चोकर हटाने के बाद बचा हुआ स्टार्च वाला हिस्सा होता है। इस स्टार्च वाले हिस्से में कुछ ब्लीच वाले केमिकल मिलाए जाते हैं। खलीलाबाद सीएचसी अधीक्षक डॉ. वरुणेश दुबे का कहना है कि मैदा में एलोक्सन होता है। यह केमिकल मैदा को काफी समय तक नरम बनाए रखता है। मैदा में मिलाए जाने वाले ब्लीच केमिकल अग्नाश्य को बहुत नुकसान पहुंचाते हैं। एलोक्सन केमिकल अग्नाश्य के लिए हानिकारक होता है और यह न केवल बवासीर बल्कि डायबिटीज के लिए जिम्मेदार हो सकता है। वहीं मोमोज के स्वाद के लिए मोनो-सोडियम ग्लूटामेट मिलाया जाता है। सोडियम ग्लूटामेट सफेद क्रिस्टल पाउडर की तरह होता है जो शरीर के नर्व डिसऑर्डर पसीना आना, उल्टी आना और हार्ट रेट बढ़ाने जैसे स्वास्थ्य जोखिम का कारण बन सकता है।
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फरवरी में 42 कुंतल नेेपाली पॉम ऑयल हुआ था सीज
खाद टीम ने छह फरवरी को शहर के मोती चौराहा स्थित एक फर्म पर छापेमारी की थी। वहां पर काफी संख्या में पाम ऑयल रखा हुआ मिला। गोदाम में तीन ब्रांड के नेपाली पाम आयल मिले थे, जिसमें शक्ति ब्रांड का 2383 किग्रा पाम ऑयल, जिसकी कीमत 3,54,968 रुपये, सफारी ब्रांड का 1446 किग्रा, जिसकी कीमत 1,49,600 रुपये और न्यूट्री प्लस ब्रांड का 360 किग्रा पाम ऑयल, जिसकी कीमत 47,852 रुपये है, को सीज कर दिया था। खाद टीम ने बताया था कि तीनों ब्रांड में स्टाॅक लेबल पर आवश्यक उद्घोषणा ओमेगा-3 एवं ओमेगा 6 फैटी एसिड नहीं लिखी गई थी, जिससे यह पता नहीं चल रहा था कि पाम ऑयल में कितने प्रतिशत फैट है। इसको कंपनी के जरिए छिपाया गया था। इस वजह से इसे सीज कर ट्रेडर्स की अभिरक्षा में दे दिया गया था।
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लगातार छापेमारी अभियान चल रहा है। फरवरी में पॉम ऑयल सीज किया गया था। उसकी रिपोर्ट अभी नहीं आई है। खाद्य पदार्थों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
- सतीश कुमार, सहायक आयुक्त, खाद्य एवं औषधि प्रशासन
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जानकारों का कहना है कि विशेष किस्म के रंग मिलाए जाने से एवं कई बार फ्राई करने से चाइनीज मोमो, फिंगर चिप्स, एग रोल स्वादिष्ट तो बन जाता है, लेकिन यह सेहत के लिए नुकसानदेह है। क्योंकि इनकी कड़ाही में एक ही बार तेल पड़ता है और उसी को बार-बार गर्म करके फास्ट फूड तैयार किया जाता है। ऐसे धंधेबाजों की शहर में लंबी फेहरिस्त है। छोटा कारोबार होने की वजह से इनकी खाद्य सामग्रियों की जांच भी नहीं हो पाती है। शहर के आजाद तिराहा, मुखलिसपुर ओवरब्रिज के नीचे, बैंक चौराहा, गोला बाजार, मेंहदावल बाईपास आदि जगहों पर चाइनीज फास्ट फूड की दुकानें रोज सज रही है। खुले में खाद्य पदार्थ की बिक्री होने से उसमें सड़क से उड़ने वाली धूल-गर्द भी पड़ रही है, पर धंधेबाजों को इसकी फिक्र नहीं है। नाला और नालियों के किनारे इस तरह की दुकानों पर खाने-पीने की सामग्री तैयार की जा रही हैं।
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सस्ता रिफाइंड होता है इस्तेमाल
शहर में फास्ट फूड बचने वाले ठेलों पर सस्ता रिफाइंड इस्तेमाल किया जाता है। ब्रांडेड कंपनियों के रिफाइंड 170 रुपये लीटर है, जबकि लोकल रिफाइंड 80 से 90 रुपये लीटर मिल जा रहे है। इसकी वजह से दुकानदार इन्हीं का इस्तेमाल कर रहे हैं।
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तीखी चटनी है खतरनाक
लाल मिर्च को स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है, लेकिन यह तब फायदा पहुंचाएगी, जब उसमें प्रोसेसिंग के जरिए कुछ मिलाया न गया हो। माेमोज बेचने वाले मिर्च की क्वालिटी की चिंता नहीं करते हैं, वे मार्केट से सस्ती या लोकल मिर्च पाउडर खरीदकर उसकी चटनी बनाते हैं, ऐसी चटनी खाने से बवासीर होने का खतरा बना रहता है।
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मिलावटी मैदा खतरनाक : डॉ. वरुणेश
मोमोज के ऊपर की लेयर मैदे से बनाई जाती है। जो अनाज का रेशेदार चोकर हटाने के बाद बचा हुआ स्टार्च वाला हिस्सा होता है। इस स्टार्च वाले हिस्से में कुछ ब्लीच वाले केमिकल मिलाए जाते हैं। खलीलाबाद सीएचसी अधीक्षक डॉ. वरुणेश दुबे का कहना है कि मैदा में एलोक्सन होता है। यह केमिकल मैदा को काफी समय तक नरम बनाए रखता है। मैदा में मिलाए जाने वाले ब्लीच केमिकल अग्नाश्य को बहुत नुकसान पहुंचाते हैं। एलोक्सन केमिकल अग्नाश्य के लिए हानिकारक होता है और यह न केवल बवासीर बल्कि डायबिटीज के लिए जिम्मेदार हो सकता है। वहीं मोमोज के स्वाद के लिए मोनो-सोडियम ग्लूटामेट मिलाया जाता है। सोडियम ग्लूटामेट सफेद क्रिस्टल पाउडर की तरह होता है जो शरीर के नर्व डिसऑर्डर पसीना आना, उल्टी आना और हार्ट रेट बढ़ाने जैसे स्वास्थ्य जोखिम का कारण बन सकता है।
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फरवरी में 42 कुंतल नेेपाली पॉम ऑयल हुआ था सीज
खाद टीम ने छह फरवरी को शहर के मोती चौराहा स्थित एक फर्म पर छापेमारी की थी। वहां पर काफी संख्या में पाम ऑयल रखा हुआ मिला। गोदाम में तीन ब्रांड के नेपाली पाम आयल मिले थे, जिसमें शक्ति ब्रांड का 2383 किग्रा पाम ऑयल, जिसकी कीमत 3,54,968 रुपये, सफारी ब्रांड का 1446 किग्रा, जिसकी कीमत 1,49,600 रुपये और न्यूट्री प्लस ब्रांड का 360 किग्रा पाम ऑयल, जिसकी कीमत 47,852 रुपये है, को सीज कर दिया था। खाद टीम ने बताया था कि तीनों ब्रांड में स्टाॅक लेबल पर आवश्यक उद्घोषणा ओमेगा-3 एवं ओमेगा 6 फैटी एसिड नहीं लिखी गई थी, जिससे यह पता नहीं चल रहा था कि पाम ऑयल में कितने प्रतिशत फैट है। इसको कंपनी के जरिए छिपाया गया था। इस वजह से इसे सीज कर ट्रेडर्स की अभिरक्षा में दे दिया गया था।
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लगातार छापेमारी अभियान चल रहा है। फरवरी में पॉम ऑयल सीज किया गया था। उसकी रिपोर्ट अभी नहीं आई है। खाद्य पदार्थों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
- सतीश कुमार, सहायक आयुक्त, खाद्य एवं औषधि प्रशासन
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