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स्वतंत्रता दिवस पर विशेष---
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मेंहदावल कस्बे में स्वतंत्रत्रा सेनानी के पौत्र इस्माइल का आवास।
- फोटो : KHALILABAD
...तब वे भी समझौता कर लेते तो नहीं मिलती आजादी
आजादी के आंदोलन में मोहम्मद इस्माइल ने खोला था अंग्रेजों के खिलाफ मोर्चा
मेंहदावल। देश की आजादी में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मोहम्मद इस्माइल ने भी भूमिका निभाई थी। कठिन डगर में भी समझौता नहीं किया और आंदोलन में भाग लिया। आजादी में उनके योगदान को आज भी लोग याद करते हैं।
मेंहदावल कस्बे के नगरवाली माता मंदिर के समीप स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मोहम्मद इस्माइल का परिवार रहता है। इनका परिवार आर्थिक तंगी से गुजर रहा है। सरकारी मदद के नाम पर सिर्फ डूडा की ओर से प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिला है। मोहम्मद इस्माइल के पौत्र जुल्फकार सब्जी बेचकर परिवार का जीविकोपार्जन करते हैं। उन्होंने बताया कि बाबा मोहम्मद इस्माइल के आजादी के आंदोलन की कहानी लोगों की जुबानी ही सुनने को मिलती है। वर्ष 1930 में आजादी के दीवानों में शामिल होकर अंग्रेजों के विरुद्ध आंदोलन छेड़ा। मिश्र बंधुओं के साथ उनके बाबा ने भी अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह किया। राजा चंगेरा जो अंग्रेजों के हमदर्द थे, उनके विरुद्ध विद्रोह का बिगुल बजा और मिश्र बंधुओं के साथ बाबा भी विद्रोह में शामिल हुए।
राजा चंगेरा के महल पर धावा बोला गया, लेकिन चंगेरा महल छोड़कर फरार हो गए थे। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मोहम्मद इस्माइल को अंग्रेजों ने आंदोलन में सक्रिया भूमिका निभाने की वजह से इलाहाबाद के नैनी जेल भेज दिया था। 1932 में उन्होंने अंग्रेजों के विरुद्ध अन्य क्रांतिकारियों के साथ आंदोलन छेड़ा। बताया कि मेंहदावल के स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े लोगों के आह्वान पर चंद्रशेखर आजाद यहां आए थे और क्रांतिकारियों के साथ बैठक कर अंग्रेजों के विरुद्ध बगावत का बिगुल बजाया था। आजादी मिलने के बाद क्षेत्र में चारों तरफ उत्साह का माहौल रहा। लोगों ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को सिर आंखों पर बैठाया। जाति धर्म मजहब से ऊपर उठकर हिंदुस्तान की आजादी का जश्न हर परिवार में उस समय देखने को मिला। ताज्जुब यह है कि देश की आजादी में भागीदारी निभाने वाले इस्माइल का परिवार बेबसी भरी जिंदगी गुजार रहा है। आज भी इस परिवार का जीवकोपार्जन एक ठेले के सहारे चल रहा है। इनके पौत्र जुल्फिकार ने बताया कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के परिवार का सदस्य होने के बाद भी सरकार की तरफ से कोई सुविधा उन्हें नहीं मिलती है। नगर पंचायत द्वारा कुछ वर्ष पहले प्रधानमंत्री आवास जरूर मिला है। लेकिन राशन कार्ड गरीबी रेखा के ऊपर का है। अंत्योदय राशन कार्ड के लिए जिला आपूर्ति विभाग व तहसील का चक्कर काटकर थक गया। स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को 15 अगस्त वह 26 जनवरी को याद करने तक लोगों ने सीमित कर दिया है।
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आजादी के आंदोलन में मोहम्मद इस्माइल ने खोला था अंग्रेजों के खिलाफ मोर्चा
मेंहदावल। देश की आजादी में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मोहम्मद इस्माइल ने भी भूमिका निभाई थी। कठिन डगर में भी समझौता नहीं किया और आंदोलन में भाग लिया। आजादी में उनके योगदान को आज भी लोग याद करते हैं।
मेंहदावल कस्बे के नगरवाली माता मंदिर के समीप स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मोहम्मद इस्माइल का परिवार रहता है। इनका परिवार आर्थिक तंगी से गुजर रहा है। सरकारी मदद के नाम पर सिर्फ डूडा की ओर से प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिला है। मोहम्मद इस्माइल के पौत्र जुल्फकार सब्जी बेचकर परिवार का जीविकोपार्जन करते हैं। उन्होंने बताया कि बाबा मोहम्मद इस्माइल के आजादी के आंदोलन की कहानी लोगों की जुबानी ही सुनने को मिलती है। वर्ष 1930 में आजादी के दीवानों में शामिल होकर अंग्रेजों के विरुद्ध आंदोलन छेड़ा। मिश्र बंधुओं के साथ उनके बाबा ने भी अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह किया। राजा चंगेरा जो अंग्रेजों के हमदर्द थे, उनके विरुद्ध विद्रोह का बिगुल बजा और मिश्र बंधुओं के साथ बाबा भी विद्रोह में शामिल हुए।
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राजा चंगेरा के महल पर धावा बोला गया, लेकिन चंगेरा महल छोड़कर फरार हो गए थे। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मोहम्मद इस्माइल को अंग्रेजों ने आंदोलन में सक्रिया भूमिका निभाने की वजह से इलाहाबाद के नैनी जेल भेज दिया था। 1932 में उन्होंने अंग्रेजों के विरुद्ध अन्य क्रांतिकारियों के साथ आंदोलन छेड़ा। बताया कि मेंहदावल के स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े लोगों के आह्वान पर चंद्रशेखर आजाद यहां आए थे और क्रांतिकारियों के साथ बैठक कर अंग्रेजों के विरुद्ध बगावत का बिगुल बजाया था। आजादी मिलने के बाद क्षेत्र में चारों तरफ उत्साह का माहौल रहा। लोगों ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को सिर आंखों पर बैठाया। जाति धर्म मजहब से ऊपर उठकर हिंदुस्तान की आजादी का जश्न हर परिवार में उस समय देखने को मिला। ताज्जुब यह है कि देश की आजादी में भागीदारी निभाने वाले इस्माइल का परिवार बेबसी भरी जिंदगी गुजार रहा है। आज भी इस परिवार का जीवकोपार्जन एक ठेले के सहारे चल रहा है। इनके पौत्र जुल्फिकार ने बताया कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के परिवार का सदस्य होने के बाद भी सरकार की तरफ से कोई सुविधा उन्हें नहीं मिलती है। नगर पंचायत द्वारा कुछ वर्ष पहले प्रधानमंत्री आवास जरूर मिला है। लेकिन राशन कार्ड गरीबी रेखा के ऊपर का है। अंत्योदय राशन कार्ड के लिए जिला आपूर्ति विभाग व तहसील का चक्कर काटकर थक गया। स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को 15 अगस्त वह 26 जनवरी को याद करने तक लोगों ने सीमित कर दिया है।
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