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Sant Kabir Nagar News: फिर बदला मौसम, बादल छाने से किसानों की बढ़ी चिंता

Sat, 04 Apr 2026 02:36 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 04 Apr 2026 02:36 AM IST
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The weather changed again, and the cloud cover increased the worries of the farmers.
बारिश हुई तो कटाई व मड़ाई में खड़ी हो सकती है बाधा
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संतकबीरनगर। मौसम में एक बार फिर बदलाव हुआ है। बादल छाने के साथ तेज हवा चल रही है। साथ ही बारिश की संभावना बनी हुई है। ऐसे में किसानों को कटाई और मड़ाई की चिंता सताने लगी है। कुछ किसान आनन-फानन में गेहूं की फसल की मशीन से कटाई कराने में जुट गए है।
इधर मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि दो दिन बादल छाए रहने और बारिश की संभावना है। रबी की मुख्य फसल गेहूं पक कर तैयार है। किसान मटाई और मड़ाई में जुटे हैं। इस बीच शुक्रवार को अचानक मौसम बदल गया और बादल छा गए। किसानों को इस बात की चिंता सता रही है कि यदि कहीं बारिश हो गई तो फसल की मटाई और मड़ाई प्रभावित हो सकती है। साथ ही सफल भीगने पर गेहूं के दाने काले पड़ सकते है, और उत्पादन पर असर पड़ सकता है।
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खलीलाबाद विकास खंड के दुबौली निवासी किसान राकेश कुमार, सरैया निवासी बृजेश कुमार आदि ने बताया कि गेहूं की फसल पक कर तैयार हो गई है, और कटाई और मड़ाई की तैयारी है, लेकिन मौसम में बदलाव के चलते चिंता बढ़ गई है। यदि बारिश हो गई तो फसल को नुकसान पहुंच सकता है। कुमारगंज अयोध्या के मौसम वैज्ञानिक अमरनाथ मिश्र का कहना है कि दो दिन बादल छाए रहने की संभावना है। हल्की बारिश भी हो सकती है। इसके बाद मौसम सामान्य हो जाएगा।
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मौसम की मार : पतले और कमजोर हो गए पिछैती गेहूं के दाने
धनघटा। रबी सीजन में इस बार लगातार बदलते मौसम ने गेहूं की फसल पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है। ठंड और गर्मी के असामान्य उतार चढ़ाव के कारण दानों की गुणवत्ता प्रभावित हुई है, जिससे उत्पादन पर भी असर पड़ने का आशंका जताई जा रही है।

किसानों के अनुसार अगेती बुआई के फसल के दाने अपेक्षाकृत बेहतर है, जबकि पिछली बुआई वाले फसल के दाने पतले और कमजोर है। अधिकतर बुआई नवंबर के अंतिम सप्ताह और दिसंबर के प्रथम सप्ताह में की गई थी। कृषि वैज्ञानिक डॉ. देवेश कुमार के अनुसार शुरुआत में ठंड का असर अधिक रहा और जनवरी-फरवरी में तापमान बढ़ गया, जिसका असर फसलों पर पड़ा है।
किसान राम रूप, दयाशंकर, रामाश्रय, दयाराम, रामप्रवेश आदि का कहना है कि पिछैती खेती कमजोर हुई और पैदावार भी पहले की अपेक्षा कम हो रहा है।
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